यमुनानगर में पराली जलाने पर तीन भाइयों पर केस, एक साल तक MSP पर फसल बेचने पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के यमुनानगर जिले में पराली जलाने के एक मामले में प्रशासन ने 2 अक्टूबर 2026 को कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन भाइयों के खिलाफ केस दर्ज किया है और उन पर एक साल तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य डबास ने इसकी पुष्टि की है और बताया कि जिले में धान की कटाई शुरू होते ही यह पहला दर्ज मामला सामने आया है।
मुख्य घटनाक्रम
डॉ. डबास के अनुसार, लगभग चार दिन पहले यमुनानगर के एक गाँव में धान की कटाई के बाद बचे अवशेषों (पराली) में आग लगाई गई। कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुँची और जले हुए फसल अवशेषों के साक्ष्य मिले। उन्होंने बताया, 'यमुनानगर जिले में धान का तकरीबन 10 प्रतिशत क्षेत्र कट चुका है। हमारे संज्ञान में एक मामला आया था — एक गाँव में फसल अवशेषों में आग लगाई गई।'
जाँच में पाया गया कि धान की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को जानबूझकर जलाया गया था। इस पर संबंधित तीनों भाइयों के खिलाफ केस दर्ज किया गया और उनके खाते में रेड एंट्री कर दी गई।
दंड और जुर्माना
प्रशासन ने दोषी किसान पर पर्यावरण प्रदूषण के आरोप में ₹5,000 का जुर्माना लगाया है। इसके अतिरिक्त, रेड एंट्री के कारण अगले एक साल तक उनकी कोई भी फसल MSP पर नहीं खरीदी जाएगी। गौरतलब है कि MSP प्रतिबंध एक किसान के लिए अत्यंत गंभीर आर्थिक दंड है, क्योंकि इससे उन्हें सरकारी मंडियों में उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।
जिलाध्यक्ष ने धारा 163 भी लागू की हुई है, जो पराली जलाने को प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित करती है। यह कार्रवाई पिछले 10 वर्षों से चल रहे जागरूकता अभियान के बावजूद नियम उल्लंघन होने पर की गई है।
सरकारी प्रोत्साहन योजना
डॉ. डबास ने बताया कि हरियाणा सरकार ने किसानों को पराली न जलाने के लिए एक समग्र प्रोत्साहन ढाँचा तैयार किया है। धान की रोपाई के समय ही किसानों को ₹4,500 की सहायता राशि दी जाती है। इसके बाद, जो किसान कटाई के बाद पराली को जलाने की बजाय अन्य उपयोगी कार्यों में लगाते हैं, उन्हें प्रति एकड़ ₹1,200 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
उन्होंने दावा किया कि धान की फसल की रोपाई से लेकर कटाई तक हरियाणा सरकार ने जो समग्र व्यवस्था बनाई है, वैसी पूरे देश में नहीं है।
विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया
डॉ. आदित्य डबास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतनी सुविधाओं और जागरूकता के बाद भी यदि कोई नियम तोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का हक किसी को नहीं है।' यह बयान इस बात का संकेत है कि आगे भी ऐसे उल्लंघनों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
आम जनता और किसानों पर असर
पराली जलाने से उत्पन्न धुएँ से वायु प्रदूषण का स्तर तेज़ी से बढ़ता है, जिसका सीधा असर हरियाणा और दिल्ली-NCR के लाखों नागरिकों पर पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्दियों की दस्तक के साथ उत्तर भारत में वायु प्रदूषण संकट गहराने की आशंका बढ़ जाती है। यमुनानगर की यह कार्रवाई राज्य में पराली प्रबंधन नीति के प्रवर्तन की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है।