हिमाचल CM सुक्खू पर BJP का बड़ा हमला: राज्य इतिहास का सर्वाधिक कर्ज, भ्रष्टाचार और फर्जी मुकदमों के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 6 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर गंभीर आरोप लगाए — कि उनकी सरकार ने राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक कर्ज लिया है, जिससे हिमाचल प्रदेश गहरे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। शिमला में मीडिया से बात करते हुए BJP प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने कहा कि यह सरकार विकास नहीं, केवल घोषणाओं की सरकार बनकर रह गई है।
मुख्य आरोप: रिकॉर्ड कर्ज और 'सिंडिकेट राज'
राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिलने के बाद पिछला कर्ज चुकाने में कई दशक लगे थे, लेकिन मौजूदा सरकार ने एक ही कार्यकाल में रिकॉर्ड कर्ज ले लिया है। उनके अनुसार, सरकार पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज ले रही है, जो वित्तीय कुप्रबंधन का स्पष्ट संकेत है।
राणा ने दावा किया, 'हिमाचल प्रदेश में अब लोकतांत्रिक सरकार नहीं, बल्कि चहेते लोगों का एक सिंडिकेट शासन कर रहा है।' उनके अनुसार, सचिवालय में अहम फैसलों से लेकर विभिन्न विभागों में नियुक्तियों तक, इस 'सिंडिकेट' का प्रभाव हर स्तर पर दिखता है।
करदाताओं के धन के दुरुपयोग का आरोप
BJP प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जनता के कर का पैसा विकास कार्यों पर नहीं, बल्कि दर्जनों विशेष ड्यूटी अधिकारियों, सलाहकारों, मीडिया सलाहकारों और राजनीतिक रूप से नियुक्त व्यक्तियों के वेतन पर खर्च किया जा रहा है। राणा ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार में अपने करीबियों का पक्ष लेने और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सर्वाधिक फर्जी मुकदमे दर्ज कराने के लिए भी याद किया जाएगा।
बुनियादी ढाँचे और सेवाओं की बदहाली
राणा के अनुसार, केंद्र सरकार से नेशनल हाईवे, आपदा राहत और विकास परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये मिलने के बावजूद सड़कें जर्जर हालत में हैं, पुल क्षतिग्रस्त हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बुनियादी कनेक्टिविटी के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन — सभी क्षेत्रों में गिरावट देखी जा रही है।
राज्य द्वारा संचालित हिमाचल सड़क परिवहन निगम (HRTC) अभूतपूर्व वित्तीय संकट में है — कई बस रूट बंद हो चुके हैं, डीजल और स्पेयर पार्ट्स की कमी की खबरें हैं, कर्मचारियों को वित्तीय लाभ मिलने में देरी हो रही है और पेंशनभोगियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की आशंका
BJP प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मुनाफा कमाने वाली सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के कमाई करने वाले होटलों और नई दिल्ली स्थित हिमाचल निकेतन जैसी अहम सरकारी संपत्तियों का उल्लेख किया। राणा ने सवाल उठाया कि यदि सरकार की नीयत साफ है, तो ये फैसले जनता के सामने क्यों नहीं रखे जा रहे।
आगे क्या
BJP के इन आरोपों पर सुक्खू सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में शुरू हो चुकी हैं और राज्य की वित्तीय स्थिति पर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है।