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CAG रिपोर्ट में हिमाचल सरकार पर बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा: जय राम ठाकुर

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CAG रिपोर्ट में हिमाचल सरकार पर बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा: जय राम ठाकुर

सारांश

CAG रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार के कार्यकाल में ₹438 करोड़ की बजट गड़बड़ी और ई-प्रोक्योरमेंट अनियमितताओं का पर्दाफाश किया। विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक जवाबदेही की माँग की है।

मुख्य बातें

CAG रिपोर्ट इस सप्ताह हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई, जिसमें सुक्खू सरकार के तहत व्यापक वित्तीय अनियमितताएँ उजागर हुईं।
बिना बजट आवंटन के ₹438 करोड़ खर्च किए गए; वहीं ₹673 करोड़ का प्रावधान होने के बावजूद योजनाओं पर कोई व्यय नहीं हुआ।
सरकारी विभागों और PSU की ई-प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियाँ पाई गईं; एक विशेष समूह को अनुचित लाभ देने के आरोप।
विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सार्वजनिक जवाबदेही की माँग की।
एक विवादित सरकारी नियुक्ति को रद्द करने के आदेश का ठाकुर ने स्वागत किया, इसे सरकार की मनमानी पर अंकुश बताया।

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने शुक्रवार, 4 सितंबर को आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा में इस सप्ताह प्रस्तुत भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार में व्यापक वित्तीय कुप्रबंधन और अनियमितताओं को उजागर किया है। शिमला में जारी एक आधिकारिक बयान में ठाकुर ने कहा कि ऑनलाइन टेंडरिंग, सरकारी खरीद और कर संग्रह में गंभीर गड़बड़ियों के चलते राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा है।

CAG रिपोर्ट में क्या सामने आया

ठाकुर के अनुसार, CAG रिपोर्ट में सबसे गंभीर अनियमितताएँ सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के माध्यम से की गई खरीद और टेंडरिंग प्रक्रिया से जुड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष समूह को विभागीय संसाधनों का उपयोग करते हुए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने और अनुबंध हासिल करने की अनुमति दी जा रही थी।

बजट में गड़बड़ी के आरोप

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता ठाकुर ने दावा किया कि बिना किसी बजट आवंटन के लगभग ₹438 करोड़ खर्च किए गए। इसके विपरीत, ₹673 करोड़ का बजट प्रावधान विभिन्न योजनाओं के लिए किया गया था, परंतु वास्तविक व्यय शून्य रहा। उन्होंने कहा कि राज्य का बढ़ता राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटा गहरी चिंता का विषय है।

सरकार पर पक्षपात का आरोप

ठाकुर ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार के अनेक निर्णय राज्य के खजाने को नुकसान पहुँचाकर कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाते प्रतीत होते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी संरक्षण से आखिर किसे फायदा हो रहा है और मुख्यमंत्री पर अपने करीबियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, सरकार के कई फैसले निष्पक्षता और न्याय की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।

नियुक्तियों पर विवाद

सरकारी नियुक्तियों के मुद्दे पर ठाकुर ने एक विवादित नियुक्ति को रद्द करने और उसके स्थान पर योग्य उम्मीदवार की नियुक्ति के न्यायिक आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस कदम ने सरकार की मनमानी पर अंकुश लगाया है। साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि नियुक्तियों में लिए गए फैसले मुख्यमंत्री के 'व्यवस्था परिवर्तन' के दावे को खोखला साबित करते हैं।

विपक्ष की माँग और आगे की राह

ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील की कि वे राज्य की जनता को CAG रिपोर्ट में उजागर खामियों के कारण स्पष्ट करें। उन्होंने चेतावनी दी कि तानाशाही रवैये के बजाय संविधान के दायरे में रहकर शासन चलाना होगा। BJP ने इस मुद्दे पर विधानसभा में और अधिक जवाबदेही की माँग करने का संकेत दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वित्तीय अनुशासन की गंभीर विफलता दर्शाता है। असली सवाल यह है कि ई-प्रोक्योरमेंट — जो पारदर्शिता की गारंटी माना जाता है — वह भी अनियमितताओं का माध्यम बन गया। सुक्खू सरकार यदि 'व्यवस्था परिवर्तन' के अपने वादे को विश्वसनीय रखना चाहती है, तो उसे CAG की हर आपत्ति पर समयबद्ध और सत्यापन-योग्य जवाब देना होगा।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश की CAG रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?
CAG रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार के अंतर्गत ऑनलाइन टेंडरिंग, सरकारी खरीद और कर संग्रह में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। बिना बजट आवंटन के ₹438 करोड़ खर्च किए गए, जबकि ₹673 करोड़ का प्रावधान होने के बावजूद योजनाओं पर कोई व्यय नहीं हुआ।
जय राम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार के फैसले राज्य के खजाने को नुकसान पहुँचाकर चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाते हैं। उन्होंने ई-प्रोक्योरमेंट में एक विशेष समूह को अनुचित लाभ देने और नियुक्तियों में पक्षपात का भी आरोप लगाया।
ई-प्रोक्योरमेंट में क्या गड़बड़ी पाई गई?
CAG रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के ज़रिए की गई खरीद और टेंडरिंग में सबसे गंभीर अनियमितताएँ थीं। आरोप है कि एक खास समूह को विभागीय संसाधनों का उपयोग करते हुए टेंडर हासिल करने की सुविधा दी जा रही थी।
इस CAG रिपोर्ट का हिमाचल की जनता पर क्या असर पड़ेगा?
राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे में वृद्धि से राज्य की सार्वजनिक सेवाओं और विकास योजनाओं पर दबाव बढ़ सकता है। विपक्ष ने माँग की है कि मुख्यमंत्री इन खामियों के कारण जनता को स्पष्ट करें और जवाबदेही सुनिश्चित करें।
सरकारी नियुक्ति विवाद में क्या हुआ?
एक विवादित सरकारी नियुक्ति को रद्द कर उसके स्थान पर योग्य उम्मीदवार की नियुक्ति का आदेश दिया गया। जय राम ठाकुर ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सरकार की मनमानी पर अंकुश लगा है, हालाँकि उन्होंने नियुक्तियों में व्यापक पक्षपात के आरोप भी लगाए।
राष्ट्र प्रेस
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