हिमाचल प्रदेश में टोल दरों में महत्वपूर्ण बदलाव, यात्री वाहनों का शुल्क घटा 100 रुपए प्रतिदिन
सारांश
Key Takeaways
- हिमाचल प्रदेश में यात्री वाहनों का टोल शुल्क घटा 100 रुपए प्रतिदिन।
- सरकार ने टोल दरों में बदलाव का निर्णय विपक्ष के विरोध के बाद लिया।
- स्थानीय निवासियों को टोल से छूट मिलेगी।
- सभी अधिसूचित टोल बैरियरों पर नई दरें लागू होंगी।
- पर्यटन और परिवहन क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
शिमला, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश में टोल और एंट्री टैक्स को लेकर चल रहे विवाद के बीच सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दरों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए एक बड़ा राहत पैकेज पेश किया है। मार्च में जारी अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों में बढ़ाई गई टोल दरों पर विधानसभा में विपक्ष के सख्त विरोध और परिवहनकर्ताओं तथा आम जनता की नाराजगी के बाद अब सरकार ने अपनी नीति में बदलाव किया है।
यात्री वाहनों के लिए सबसे बड़ा निर्णय लिया गया है। पहले 12+1 क्षमता वाले वाहनों के लिए प्रति दिन 130 रुपए टोल निर्धारित था, जिसे अब घटाकर 100 रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। यह संशोधित दर हिमाचल के बाहर पंजीकृत 12 सीटर तक के वाहनों पर भी लागू होगी, जिससे बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों और टैक्सी ऑपरेटरों को राहत मिलेगी।
सरकार की प्रारंभिक अधिसूचना में विभिन्न श्रेणियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक शुल्क तय किया गया था। इसमें 7,500 किलोग्राम तक के मालवाहक वाहनों के लिए 170, कुछ हल्के व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के लिए 320, दो एक्सल ट्रकों के लिए 570, तीन एक्सल वाहनों के लिए 600, 4 से 6 एक्सल वाले भारी वाहनों और निर्माण मशीनरी के लिए 800, और 7 या उससे अधिक एक्सल वाले ओवरसाइज्ड वाहनों के लिए 900 रुपए प्रतिदिन टोल निर्धारित किया गया था।
इसके अतिरिक्त, ट्रैक्टरों के लिए 100 रुपए प्रति दिन की दर तय की गई थी, जिसमें तिमाही और वार्षिक भुगतान का विकल्प भी दिया गया था। वहीं, मोटर और स्कूटर रिक्शा के लिए 30 रुपए प्रतिदिन शुल्क रखा गया था।
संशोधित टोल नीति में सरकार ने छूट के दायरे को भी बढ़ाया है। अब हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत हल्के मोटर वाहन, चाहे वे निजी हों या व्यावसायिक, दोनों को टोल से छूट मिलेगी। इसमें टैक्सी ऑपरेटरों को भी शामिल किया गया है, जो पहले इस दायरे में स्पष्ट रूप से नहीं आते थे। स्थानीय निवासियों के लिए भी सरकार ने राहत का प्रावधान किया है। टोल बैरियर के पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को अब सत्यापन के बाद मुफ्त कंसेशनल टोकन दिए जाएंगे, जिससे उन्हें रोजमर्रा के आवागमन में टोल नहीं देना पड़ेगा।
टोल दरों में यह बदलाव उस समय आया है जब विपक्ष, विशेषकर भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए सरकार पर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया था। विधानसभा में भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दरों की समीक्षा का आश्वासन दिया था।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, संशोधित टोल ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि राज्य के राजस्व हितों को नुकसान न पहुंचे। साथ ही, आम जनता और परिवहन क्षेत्र को भी राहत मिल सके। सरकार का मानना है कि यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य में पर्यटन और परिवहन गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि संशोधित टोल दरें और नई छूटें वित्त वर्ष 2026–27 से राज्य के सभी अधिसूचित टोल बैरियरों पर लागू होंगी।