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सरकार ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोड वाहनों के नए शुल्क नियमों की घोषणा की

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सरकार ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोड वाहनों के नए शुल्क नियमों की घोषणा की

सारांश

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोड वाहनों के लिए नए शुल्क नियमों की जानकारी दी है। यह नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और ओवरलोडिंग पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।

मुख्य बातें

ओवरलोड वाहनों का शुल्क अब ओवरलोडिंग प्रतिशत पर आधारित है।
10 प्रतिशत तक के ओवरलोड पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं।
40 प्रतिशत से अधिक ओवरलोड पर चार गुना शुल्क लागू होगा।
टोल प्लाजा पर वजन मापने वाले उपकरणों से ओवरलोडिंग की जांच होगी।
फास्टैग के माध्यम से ही ओवरलोडिंग शुल्क का संग्रह होगा।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर अधिक वजन वाले वाहनों के लिए शुल्क नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नए नियमों की घोषणा की है। इन नियमों को 'नेशनल हाईवे फीस (रेट निर्धारण और संग्रह) चौथा संशोधन नियम, 2026' के तहत लागू किया गया है।

ये नए नियम 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य ओवरलोडिंग पर रोकथाम, सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और हाईवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

नए नियमों के अनुसार, अब ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। यदि कोई वाहन 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त वजन ले जा रहा है, तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।

हालांकि, यदि वाहन 10 प्रतिशत से अधिक और 40 प्रतिशत तक ओवरलोड है, तो उसे बेस रेट का दोगुना शुल्क चुकाना होगा।

अगर ओवरलोडिंग 40 प्रतिशत से अधिक है, तो उस पर बेस रेट का चार गुना शुल्क लिया जाएगा।

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर स्थित प्रमाणित वजन मापने वाले उपकरणों से की जाएगी। यदि किसी टोल प्लाजा पर वजन मापने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो वहां ओवरलोड शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इसके अलावा, ओवरलोडिंग शुल्क केवल फास्टैग के माध्यम से ही वसूला जाएगा, और ऐसे वाहनों की जानकारी राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर में दर्ज की जाएगी।

जो वाहन बिना वैध फास्टैग के नेशनल हाईवे पर प्रवेश करेंगे, उनके खिलाफ मौजूदा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, ये नए नियम कुछ निजी निवेश परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे, जब तक कि संबंधित कंपनी (कंसेशनायर) इन्हें अपनाने की सहमति न दे।

सरकार ने शुल्क गणना को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण भी दिए हैं, ताकि विभिन्न वाहनों के लिए ओवरलोड फीस को समझना आसान हो सके।

सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से ओवरलोडिंग में कमी आएगी, सड़कों को कम नुकसान होगा, और माल ढुलाई सुरक्षित एवं सुचारु रूप से हो सकेगी।

साथ ही, डब्ल्यूआईएम (वेट-इन-मोशन) तकनीक के माध्यम से वाहनों का वजन चलते-फिरते ही मापा जा सकेगा, जिससे प्रक्रिया और भी सरल और पारदर्शी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकार ने ओवरलोड वाहनों को नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे सड़क सुरक्षा में सुधार और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में वृद्धि होगी। यह नियम उचित समय पर आए हैं और इससे संबंधित सभी पक्षों को लाभ होगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इन नए शुल्क नियमों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य ओवरलोडिंग पर नियंत्रण, सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ओवरलोडिंग शुल्क कैसे निर्धारित किया जाएगा?
ओवरलोडिंग शुल्क ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। 10 प्रतिशत तक कोई शुल्क नहीं होगा, 10 से 40 प्रतिशत के लिए दोगुना और 40 प्रतिशत से अधिक पर चार गुना शुल्क लगेगा।
क्या ओवरलोडिंग की जांच कैसे की जाएगी?
ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर लगे प्रमाणित वजन मापने वाले उपकरणों से की जाएगी।
फास्टैग का क्या महत्व है?
ओवरलोडिंग शुल्क केवल फास्टैग के माध्यम से ही वसूला जाएगा और बिना वैध फास्टैग के वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी।
क्या ये नियम सभी वाहनों पर लागू होंगे?
ये नए नियम कुछ निजी निवेश परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे, जब तक कि संबंधित कंपनी इन्हें अपनाने की सहमति न दे।
राष्ट्र प्रेस
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