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हिमाचल प्रदेश राजस्थान को ₹400 करोड़ की बिजली बेचेगा: CM सुक्खू का बड़ा ऐलान

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हिमाचल प्रदेश राजस्थान को ₹400 करोड़ की बिजली बेचेगा: CM सुक्खू का बड़ा ऐलान

सारांश

हिमाचल प्रदेश ने राजस्थान को ₹15.50 प्रति यूनिट पर बिजली बेचने का सौदा किया — चार महीनों में ₹400 करोड़ राजस्व का लक्ष्य। वाइल्डफ्लावर हॉल विवाद से ₹401 करोड़ की वसूली और बैरा-सिउल में 50% मुफ़्त बिजली हिस्सेदारी की माँग — सुक्खू सरकार की राजकोषीय पुनरुद्धार की रणनीति साफ़ दिखती है।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश ने राजस्थान को ₹15.50 प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने पर सहमति जताई है।
इस समझौते से चार महीनों में ₹400 करोड़ राजस्व मिलने का अनुमान है।
180 मेगावाट की बैरा-सिउल जलविद्युत परियोजना में 44 वर्ष के संचालन के बाद हिमाचल की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी 50% करने की माँग केंद्र के समक्ष रखी गई।
23 साल से लंबित वाइल्डफ्लावर हॉल विवाद सुलझा; राज्य को ₹401 करोड़ प्राप्त हुए और अब ई-नीलामी से सालाना ₹37 करोड़ अतिरिक्त राजस्व।
किसानों को कच्ची हल्दी ₹150/किलो , गेहूँ ₹80/किलो , मक्का ₹50/किलो MSP; गाय दूध ₹61/लीटर , भैंस दूध ₹71/लीटर समर्थन मूल्य।
सभी आदिवासी बस्तियों में 100% विद्युतीकरण और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 4 नवंबर 2026 को चंबा में घोषणा की कि राज्य सरकार ने राजस्थान को ₹15.50 प्रति यूनिट की दर से बिजली आपूर्ति करने पर सहमति जताई है, जिससे चार महीनों में ₹400 करोड़ का राजस्व अर्जित होने का अनुमान है। यह समझौता हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा-आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

बिजली सौदे का विवरण

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि राजस्थान के साथ यह बिजली सौदा ₹15.50 प्रति यूनिट की दर पर हुआ है, जो बाज़ार दरों के अनुरूप बताया जा रहा है। चार माह की इस आपूर्ति से राज्य के खजाने में ₹400 करोड़ आने की उम्मीद है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष यह माँग दृढ़ता से रखी है कि 180 मेगावाट की बैरा-सिउल जलविद्युत परियोजना के 44 वर्षों का संचालन काल पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश की निःशुल्क बिजली हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जाए।

वाइल्डफ्लावर हॉल विवाद और राजस्व वसूली

मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला स्थित वाइल्डफ्लावर हॉल का मामला वर्ष 2003 से लंबित था। राज्य सरकार ने कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से इस विवाद को सफलतापूर्वक सुलझाया, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को ₹401 करोड़ प्राप्त हुए।

गौरतलब है कि पिछले 23 वर्षों से राज्य को इस संपत्ति से कोई राजस्व नहीं मिला था। अब ई-नीलामी के माध्यम से इस संपत्ति से प्रतिवर्ष लगभग ₹37 करोड़ का राजस्व अर्जित होने का अनुमान है, और इस आय को जन कल्याण कार्यों पर खर्च किए जाने की बात कही गई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और एमएसपी

सुक्खू ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने पर इतना ध्यान दिया है। राज्य सरकार किसानों को कच्ची हल्दी के लिए ₹150 प्रति किलो, गेहूँ के लिए ₹80 प्रति किलो और मक्का के लिए ₹50 प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रही है।

इसके साथ ही, गाय के दूध के लिए ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए ₹71 प्रति लीटर का समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है, जो पहले की दरों की तुलना में लगभग दोगुना बताया जा रहा है।

आदिवासी क्षेत्रों में विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की सभी स्थायी और मौसमी आदिवासी बस्तियों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। पिछले कुछ वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

सरकार इन क्षेत्रों में राजीव गांधी सरकारी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल, सीबीएसई से संबद्ध विद्यालय और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के साथ-साथ पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश राजकोषीय दबाव से उबरने के लिए अपनी जलविद्युत क्षमता के व्यावसायिक दोहन पर तेज़ी से ध्यान केंद्रित कर रहा है। बैरा-सिउल परियोजना में बढ़ी हुई बिजली हिस्सेदारी और राजस्थान जैसे राज्यों के साथ बिजली व्यापार के विस्तार से हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा राजस्व नीति की दीर्घकालिक दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह केंद्र की सहमति पर निर्भर है — जो अनिश्चित बनी हुई है। किसान MSP की दरें राजनीतिक रूप से आकर्षक हैं, लेकिन इनकी बजटीय स्थिरता और वास्तविक खरीद पर पारदर्शी आँकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल प्रदेश राजस्थान को किस दर पर बिजली बेचेगा?
हिमाचल प्रदेश ने राजस्थान को ₹15.50 प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने पर सहमति जताई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार इस सौदे से चार महीनों में राज्य को ₹400 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा।
बैरा-सिउल जलविद्युत परियोजना में हिमाचल की माँग क्या है?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष माँग रखी है कि 180 मेगावाट की बैरा-सिउल परियोजना के 44 वर्षों का संचालन काल पूरा होने के बाद राज्य की निःशुल्क बिजली हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जाए। फिलहाल यह माँग केंद्र के विचाराधीन बताई जा रही है।
वाइल्डफ्लावर हॉल मामले में राज्य को कितनी राशि मिली?
शिमला स्थित वाइल्डफ्लावर हॉल का विवाद 2003 से लंबित था। राज्य सरकार ने कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए इसे सुलझाया और ₹401 करोड़ प्राप्त किए। अब ई-नीलामी के माध्यम से इस संपत्ति से सालाना लगभग ₹37 करोड़ अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल सरकार किसानों को कौन-सी फसलों पर MSP दे रही है?
राज्य सरकार कच्ची हल्दी के लिए ₹150 प्रति किलो, गेहूँ के लिए ₹80 प्रति किलो और मक्का के लिए ₹50 प्रति किलो MSP दे रही है। इसके अलावा, गाय के दूध पर ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध पर ₹71 प्रति लीटर का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, जो पहले की दरों से लगभग दोगुना बताया गया है।
हिमाचल प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में विकास की क्या स्थिति है?
CM सुक्खू के अनुसार, राज्य की सभी स्थायी और मौसमी आदिवासी बस्तियों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। सरकार इन क्षेत्रों में राजीव गांधी सरकारी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूल, सीबीएसई-संबद्ध स्कूल और उत्कृष्टता केंद्र भी स्थापित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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