सीएम सुक्खू ने खट्टर से माँगी बैरा-स्यूल परियोजना में 50% निशुल्क बिजली रॉयल्टी, ₹7,784 करोड़ ऊर्जा बकाया का मुद्दा उठाया
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 17 जून 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSUs) की उन परियोजनाओं में — जहाँ प्रारंभिक 12 वर्ष की अवधि पूर्ण हो चुकी है — सामान्य 12 प्रतिशत निशुल्क बिजली रॉयल्टी से ऊपर अतिरिक्त रॉयल्टी हिस्सेदारी बढ़ाने का आग्रह किया। यह बैठक हिमाचल प्रदेश के दीर्घकालिक जलविद्युत अधिकारों और शहरी विकास वित्तपोषण दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण रही।
बैरा-स्यूल परियोजना में 50% रॉयल्टी की माँग
मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र सरकार से 180 मेगावाट की बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना में निशुल्क बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का अनुरोध किया। उनका तर्क था कि इस परियोजना के संचालन को 44 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, इसलिए राज्य को अब अधिक न्यायसंगत हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने स्मरण दिलाया कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान राज्य के हजारों निवासियों ने विस्थापन का दंश झेला, प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव सहे और पौंग बांध से विस्थापित लोगों का पुनर्वास आज भी पूर्ण नहीं हो सका है।
बीबीएमबी ऊर्जा बकाया — ₹7,784 करोड़ का दावा
सुक्खू ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) परियोजनाओं में राज्य को देय ऊर्जा बकाया के भुगतान में हो रहे विलंब का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने आग्रह किया कि हरियाणा और पंजाब दोनों राज्य अपनी सहमति देकर 31 अक्तूबर 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया तथा उसके बाद 6 प्रतिशत ब्याज सहित हिमाचल प्रदेश को अदा करें। यदि यह बकाया नकद रूप में चुकाया जाए, तो 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज की दर से अनुमानित राशि ₹7,784 करोड़ बनती है।
शानन परियोजना और अन्य प्रमुख मुद्दे
मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना की पृष्ठभूमि से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया और इस परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के वैध अधिकार का पक्ष रखा। इसके साथ ही उन्होंने कांगड़ा में प्रस्तावित 'एयरो सिटी' और 'हिम चंडीगढ़' परियोजनाओं के विकास के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता की माँग की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरीकरण, पर्यटन और निवेश को प्रोत्साहन देना है।
शहरी विकास योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की माँग
सुक्खू ने खट्टर को बताया कि राज्य सरकार 24 शहरी स्थानीय निकायों में 'अर्बन चैलेंज फंड' के तहत ₹1,179 करोड़ की परियोजनाएँ प्रस्तावित कर रही है, जिनमें से ₹660 करोड़ की परियोजनाएँ प्रथम चरण में केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने 'क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव' के अंतर्गत स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन कार्यों के लिए ₹12.33 करोड़ जारी करने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त, अमृत योजना के तहत पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं के लिए शेष ₹64.45 करोड़ जारी करने और अमृत मित्रा योजना के अंतर्गत 14 शहरी स्थानीय निकायों में 43 परियोजनाओं को स्वीकृति देने का भी आग्रह किया।
डिजिटल डोर प्लेट और आगे की राह
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहरी स्थानीय निकायों में प्रत्येक संपत्ति को विशिष्ट पहचान देने के लिए QR-आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली राज्य में प्रक्रियाधीन है। इस परियोजना के दूसरे चरण के सफल क्रियान्वयन के लिए उन्होंने आगामी पाँच वर्षों में ₹18 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता माँगी। यह बैठक हिमाचल प्रदेश के जलविद्युत अधिकारों और शहरी अवसंरचना दोनों मोर्चों पर केंद्र से संसाधन जुटाने की राज्य की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।