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चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सेदारी पर हिमाचल का दावा, CM सुक्खू ने पंजाब के राज्यपाल से की मुलाकात

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चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सेदारी पर हिमाचल का दावा, CM सुक्खू ने पंजाब के राज्यपाल से की मुलाकात

सारांश

हिमाचल CM सुक्खू ने पंजाब के राज्यपाल कटारिया से मिलकर चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सेदारी का पुराना दावा फिर दोहराया, 13,066 मिलियन यूनिट बिजली बकाया और 2 मार्च 2024 को लीज़ समाप्त हो चुकी शानन परियोजना पर हिमाचल का अधिकार जताया।

मुख्य बातें

हिमाचल CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से चंडीगढ़ में मुलाकात कर कई लंबित मुद्दे उठाए।
हिमाचल ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के आधार पर चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सेदारी का दावा दोहराया।
चंडीगढ़ के सेक्टर 52 में 4.736 एकड़ भूमि पर नए हिमाचल सदन के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया।
राज्य BBMB परियोजनाओं में अपने हिस्से की 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और वित्तीय बकाये का एक दशक से इंतज़ार कर रहा है।
शानन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की 99 वर्षीय लीज़ 2 मार्च 2024 को समाप्त हो चुकी है; सुक्खू ने कहा कि अब किसी भी दावे का कोई कानूनी आधार नहीं।
सुक्खू ने सभी विवादों को सहकारी संघवाद की भावना से सुलझाने का भरोसा जताया।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 27 जून 2025 को चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भेंट की और दशकों से लंबित कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के बकाये और शानन जलविद्युत परियोजना जैसे संवेदनशील विषय प्रमुखता से उठाए गए।

चंडीगढ़ में हिमाचल का दावा

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश पुराने पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य है। उनके अनुसार, राज्य को सौंपे गए क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर हिमाचल को चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत की न्यायोचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि चंडीगढ़ का निर्माण और विकास अविभाजित पंजाब के साझा संसाधनों से हुआ था। जहाँ पंजाब और हरियाणा पाँच दशकों से अधिक समय से शहर की भूमि, संपत्ति और प्रशासनिक ढाँचे से लाभान्वित हो रहे हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश को अभी तक उसका उचित अंश नहीं मिला है।

नए 'हिमाचल सदन' की माँग

सुक्खू ने चंडीगढ़ में एक अतिरिक्त 'हिमाचल सदन' बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि दशकों पहले बना मौजूदा हिमाचल भवन अब छात्रों, मरीजों और अन्य आगंतुकों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने में सक्षम नहीं है। चंडीगढ़ राज्य के लिए उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और प्रशासनिक कार्यों का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ हर महीने हज़ारों निवासी आते हैं — इनमें PGI में उपचार के लिए आने वाले बड़ी संख्या में मरीज भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन के साथ बातचीत के बाद प्रस्तावित हिमाचल सदन के लिए सेक्टर 52 में 4.736 एकड़ की उपयुक्त भूमि चिह्नित की जा चुकी है।

BBMB बकाया और बिजली अधिकार

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े दीर्घकालिक बकाये के निपटारे के लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने BBMB परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के अधिकार को मान्यता दी है। राज्य एक दशक से अधिक समय से 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़ी वित्तीय बकाया राशि की प्रतीक्षा कर रहा है।

शानन जलविद्युत परियोजना विवाद

सुक्खू ने शानन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका तर्क है कि पुराना मंडी राज्य कभी संयुक्त पंजाब का हिस्सा नहीं था — वह 1948 में सीधे भारत संघ में शामिल हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडी जिले में स्थित यह परियोजना पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 2(एन) के तहत परिभाषित 'हस्तांतरित क्षेत्रों' में कभी शामिल नहीं थी, इसलिए इस अधिनियम के प्रावधान यहाँ लागू नहीं होते।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शानन परियोजना की 99 वर्षीय लीज़ 2 मार्च 2024 को समाप्त हो चुकी है। सुक्खू ने कहा कि लीज़ की समाप्ति के साथ ही उससे जुड़े सभी अधिकार भी स्वतः समाप्त हो गए हैं और समाप्त हो चुकी लीज़ के आधार पर परियोजना पर किसी भी प्रकार का दावा कानूनी दृष्टि से निराधार है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री सुक्खू ने भरोसा जताया कि सभी लंबित मामलों को रचनात्मक संवाद, आपसी सम्मान और सहकारी संघवाद की भावना से सुलझाया जा सकता है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हिमाचल प्रदेश अपने अंतर-राज्यीय और केंद्र-राज्य संसाधन विवादों को कूटनीतिक रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले हफ्तों में इन मुद्दों पर केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों के साथ आगे की वार्ता की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी विवाद जारी है — यह दर्शाता है कि अंतर-राज्यीय जल और ऊर्जा विवादों में कानूनी स्पष्टता के बावजूद क्रियान्वयन कितना जटिल है। BBMB बकाये पर सर्वोच्च न्यायालय की मान्यता के बाद भी एक दशक से अधिक समय तक बकाया न मिलना संस्थागत जड़ता की गंभीर तस्वीर पेश करता है। असली परीक्षा यह है कि राज्यपाल स्तर की यह बैठक केंद्र सरकार तक दबाव पहुँचाने में कितनी कारगर होती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश की 7.19% हिस्सेदारी का दावा किस आधार पर है?
यह दावा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 पर आधारित है, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश को पुराने पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य माना गया है। राज्य को सौंपे गए क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर हिमाचल का चंडीगढ़ में 7.19% हिस्सा बनता है, जो पाँच दशकों से अधिक समय से लंबित है।
शानन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट विवाद क्या है?
शानन जलविद्युत परियोजना हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है और इसकी 99 वर्षीय लीज़ 2 मार्च 2024 को समाप्त हो चुकी है। CM सुक्खू का तर्क है कि मंडी कभी संयुक्त पंजाब का हिस्सा नहीं था, इसलिए पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधान यहाँ लागू नहीं होते और लीज़ समाप्ति के बाद किसी भी दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है।
BBMB बकाये में हिमाचल प्रदेश को क्या मिलना है?
सर्वोच्च न्यायालय ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के 7.19% हिस्से को मान्यता दी है। राज्य एक दशक से अधिक समय से 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़ी वित्तीय बकाया राशि की प्रतीक्षा कर रहा है।
चंडीगढ़ में नए हिमाचल सदन की ज़रूरत क्यों है?
मौजूदा हिमाचल भवन दशकों पुराना है और अब छात्रों, PGI में इलाज कराने वाले मरीजों तथा अन्य आगंतुकों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने में सक्षम नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन के साथ बातचीत के बाद सेक्टर 52 में 4.736 एकड़ की भूमि नए हिमाचल सदन के लिए चिह्नित की जा चुकी है।
इन लंबित मुद्दों का अब तक समाधान क्यों नहीं हुआ?
ये विवाद 1966 के पंजाब पुनर्गठन से जुड़े हैं और इनमें कई राज्यों, केंद्र सरकार तथा न्यायिक निकायों के हित आपस में उलझे हुए हैं। CM सुक्खू ने इन्हें सहकारी संघवाद की भावना से सुलझाने की अपील की है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और केंद्रीय हस्तक्षेप के बिना इनका निपटारा मुश्किल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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