राहुल गांधी की बहस की माँग पर हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार — 'सड़क नहीं, संसद में करें बहस'
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 नवंबर 2026 को गुवाहाटी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सार्वजनिक बहस की गांधी की माँग को सीधे खारिज करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष का असली मंच सड़क नहीं, संसद है। सरमा ने कहा, 'हम संसद में बहस चाहते हैं, सड़कों पर नहीं।'
संसद बनाम सड़क — सरमा का मुख्य तर्क
सरमा ने सवालिया लहजे में कहा, 'अगर राहुल गांधी खुद को नेता प्रतिपक्ष मानते हैं, तो प्रधानमंत्री के साथ उनकी बहस कहाँ होनी चाहिए? सड़कों पर या संसद में?' उनका तर्क था कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा रखने वाले किसी भी नेता की प्राथमिक जिम्मेदारी सदन के भीतर सरकार को जवाबदेह ठहराना है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत-अमेरिका संबंध और कांग्रेस की ओर से उठाए गए अन्य नीतिगत सवालों पर चर्चा के लिए संसद पर्याप्त मंच है। सरमा ने कहा कि संसद में उठाए गए सवालों का जवाब केंद्रीय गृह मंत्री समेत संबंधित मंत्री दे सकते हैं और प्रधानमंत्री भी चर्चा के दौरान हस्तक्षेप कर सकते हैं।
गुलाब वाले वीडियो पर तंज
सरमा ने राहुल गांधी के उस हालिया वीडियो का जिक्र किया जिसमें वे प्रधानमंत्री को दिवाली की शुभकामनाएँ देते हुए हाथ में गुलाब लिए दिख रहे थे। सरमा ने कहा, 'गुलाब का संबंध वैलेंटाइन डे से है, दिवाली से नहीं।' इस टिप्पणी के ज़रिए उन्होंने राहुल गांधी की भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक बोध पर सवाल उठाया।
यह टिप्पणी उनकी व्यापक आलोचना का हिस्सा थी, जिसमें उन्होंने गांधी पर सार्थक राजनीतिक भागीदारी के बजाय सतही प्रतीकवाद को तरजीह देने का आरोप लगाया।
ईवीएम पर दोहरे रवैये का आरोप
सरमा ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर दोहरे रवैये का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनाव जीतती है, तो कांग्रेस नतीजों पर सवाल उठाती है, लेकिन जब कांग्रेस स्वयं चुनाव जीतती है, तो वही परिणाम स्वीकार्य हो जाते हैं।
गौरतलब है कि EVM विवाद बीते कई वर्षों से विपक्षी राजनीति का स्थायी मुद्दा बना हुआ है और सर्वोच्च न्यायालय भी अनेक बार इन मशीनों की विश्वसनीयता को बरकरार रख चुका है।
सरमा की राहुल गांधी से अपील
असम के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से अपील की कि वे संसद में उपस्थित रहें और बिना किसी व्यवधान के बहस में हिस्सा लें, ताकि देश के लोग महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर होने वाली चर्चा को सुन सकें। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संसद सत्रों में अक्सर हंगामे और वॉकआउट देखने को मिलते रहे हैं।
सरमा ने कहा कि राहुल गांधी को इस 'सड़क-बहस' की मानसिकता से बाहर निकलकर सार्थक संसदीय भागीदारी पर ध्यान देना चाहिए। देखना होगा कि कांग्रेस इस चुनौती पर कैसी प्रतिक्रिया देती है।