4 अक्टूबर 2026
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हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार: 'चुनाव आते ही गोगोई और राहुल गांधी जेल की बात करने लगते हैं'

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हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार: 'चुनाव आते ही गोगोई और राहुल गांधी जेल की बात करने लगते हैं'

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के 'जेल' वाले बयान को तार्किक रूप से खारिज करते हुए पूछा — 'चुनाव 2029 में है, राहुल गांधी अभी PM कैसे बनेंगे?' उनका पलटवार बताता है कि असम में 2026 से पहले की राजनीतिक जंग अभी से शुरू हो चुकी है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के 'जेल' वाले बयान पर कड़ा पलटवार किया।
गोगोई ने दावा किया था कि राहुल गांधी के PM बनते ही सरमा के खिलाफ मामला दर्ज होगा और उन्हें जेल भेजा जाएगा।
सरमा ने तर्क दिया कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में है, इसलिए राहुल गांधी अभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'जेल में बंद कैदी वोट नहीं देते — आम जनता वोट देती है।' सरमा ने नेताओं से सड़क, स्कूल, कल्याणकारी योजनाओं जैसे जनसरोकार के मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार, 3 अक्टूबर को गुवाहाटी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के उस बयान पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें गोगोई ने दावा किया था कि यदि कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं तो सरमा के खिलाफ मामला दर्ज होगा और उन्हें जेल भेजा जाएगा। सरमा ने इस बयान को राजनीतिक रूप से खोखला करार देते हुए कहा कि चुनाव प्रचार में 'जेल' की बजाय आम जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गुरुवार को दावा किया था कि राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनते ही अगले दिन मुख्यमंत्री सरमा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होगा और उन्हें जेल भेजा जाएगा। इस बयान पर दो दिन बाद मुख्यमंत्री सरमा ने सीधा जवाब दिया और कहा कि यह बयान तार्किक रूप से ही टिकता नहीं।

सरमा ने सवाल उठाया, 'अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है, ऐसे में राहुल गांधी अभी प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं?' उन्होंने कहा, 'अगले नौ महीनों में कोई चुनाव नहीं है। चुनाव कैसे होगा? मैं इसका फॉर्मूला जानना चाहता हूं।'

सरमा का सीधा संदेश

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जब चुनाव आते हैं तो वोट के बारे में सोचना चाहिए, जेल के बारे में नहीं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'जेल में बंद कैदी वोट नहीं देते — आम जनता वोट देती है।' यह टिप्पणी कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सीधा प्रहार मानी जा रही है।

सरमा ने राजनीतिक नेताओं को सलाह दी कि चुनाव प्रचार में सड़क, स्कूल, कॉलेज और कल्याणकारी योजनाओं जैसे जनसरोकार के मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि प्रतिद्वंद्वी को जेल भेजने की बातें।

कांग्रेस बनाम भाजपा: बढ़ती तकरार

गौरतलब है कि असम में राजनीतिक सरगर्मी तेज होने के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच बयानबाजी का दौर तीखा हो गया है। कांग्रेस कथित राजनीतिक और कानूनी मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि मुख्यमंत्री सरमा लगातार बहस को शासन और विकास के मुद्दों की ओर मोड़ने पर जोर देते रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब असम में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू होती दिख रही हैं और दोनों दल जनमत को प्रभावित करने के लिए हर मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं।

राजनीतिक संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ इस तरह के दावे किए हों। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान अक्सर चुनावी माहौल बनाने के लिए दिए जाते हैं। सरमा ने भी इसी पैटर्न की ओर इशारा करते हुए कहा, 'जब भी चुनाव आते हैं, गौरव गोगोई और राहुल गांधी जेल की बात करने लगते हैं।'

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की बयानबाजी दोनों दलों के अलग-अलग चुनावी एजेंडे को उजागर करती है — कांग्रेस जहाँ जवाबदेही के मुद्दे को केंद्र में रखना चाहती है, वहीं भाजपा विकास और सुशासन को अपनी पहचान बनाए रखना चाहती है।

क्या होगा आगे

असम की राजनीति में यह तकरार आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है। 2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री सरमा की यह प्रतिक्रिया स्पष्ट करती है कि भाजपा कांग्रेस के आरोपों को सीधे नकारते हुए विकास-केंद्रित छवि बनाए रखने की रणनीति पर चलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तार्किक रूप से कमजोर — क्योंकि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में है। सरमा ने इसी कमजोरी को पकड़ा और बहस को विकास बनाम प्रतिशोध के फ्रेम में ले गए, जो भाजपा के लिए चुनावी रूप से फायदेमंद जमीन है। लेकिन यह भी सच है कि कांग्रेस इस तरह के बयानों से अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश करती है, न कि नीतिगत बहस छेड़ने की। असल सवाल यह है कि क्या असम का मतदाता 2026 में 'जेल बनाम जनकल्याण' की इस बहस को प्रासंगिक मानेगा — या फिर महंगाई, रोजगार और बाढ़ राहत जैसे ठोस मुद्दे हावी होंगे।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री सरमा के बारे में क्या बयान दिया था?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गुरुवार को दावा किया था कि यदि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं तो अगले ही दिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ मामला दर्ज होगा और उन्हें जेल भेजा जाएगा।
हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बयान पर क्या जवाब दिया?
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में है, इसलिए राहुल गांधी अभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार में 'जेल' की बजाय सड़क, स्कूल और कल्याणकारी योजनाओं जैसे जनसरोकार के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
क्या यह पहली बार है जब कांग्रेस ने सरमा के खिलाफ इस तरह का बयान दिया है?
नहीं, मुख्यमंत्री सरमा ने खुद कहा कि 'जब भी चुनाव आते हैं, गौरव गोगोई और राहुल गांधी जेल की बात करने लगते हैं।' यह बयान इस बात का संकेत है कि कांग्रेस की यह रणनीति बार-बार दोहराई जाती है।
असम में अगला विधानसभा चुनाव कब होगा और इस बयानबाजी का क्या असर होगा?
असम में अगला विधानसभा चुनाव 2026 में होना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दोनों दलों की यह तकरार आने वाले महीनों में और तेज होगी, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में लगे हैं।
सरमा ने मतदाताओं को लेकर क्या बात कही?
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि 'जेल में बंद कैदी वोट नहीं देते — आम जनता वोट देती है।' उनका यह बयान कांग्रेस की चुनावी रणनीति को सीधे चुनौती देता है और यह संदेश देता है कि असली चुनावी ताकत जनता के हाथ में है।
राष्ट्र प्रेस
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