पुणे के डेक्कन कॉलेज में शास्त्रीय मराठी अध्ययन केंद्र को केंद्र की मंजूरी, फडणवीस ने जताई खुशी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2026 को पुणे स्थित डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान में शास्त्रीय मराठी भाषा अध्ययन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी। यह निर्णय 3 अक्टूबर 2024 को मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के ऐतिहासिक फैसले के ठीक एक वर्ष बाद आया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी थी। इस मंजूरी से भाषा के संरक्षण और अनुसंधान के लिए केंद्रीय निधि और समर्पित अवसंरचना का मार्ग खुल गया है।
केंद्र में क्या होगा शामिल
सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह उत्कृष्टता केंद्र ऐतिहासिक भाषाविज्ञान, प्राचीन ग्रंथों के डिजिटलीकरण, साहित्यिक संरक्षण और सांस्कृतिक अनुसंधान के क्षेत्र में प्रमुख पहलों का नेतृत्व करेगा। इसके साथ ही प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में मराठी अध्ययन के लिए विशेष प्रोफेसर पदों के सृजन की भी सुविधा मिलेगी। भारत के सबसे पुराने विरासत शैक्षणिक संस्थानों में से एक, डेक्कन कॉलेज इस नए शोध केंद्र की मेजबानी करेगा।
डीपीआर और निधि की प्रक्रिया
महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। अब यह डीपीआर केंद्र सरकार को औपचारिक रूप से प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद केंद्रीय निधि का आवंटन होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि "केंद्र सरकार ने डेक्कन कॉलेज में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की हमारी मांग को मंजूरी दे दी है" और डीपीआर जमा करने तथा आवश्यक केंद्रीय निधि प्राप्त करने का मार्ग अब प्रशस्त हो गया है।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने इस स्वीकृति को "मराठी भाषा, साहित्य, इतिहास और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम" बताया। उन्होंने कहा कि यह केंद्र मराठी के अकादमिक अध्ययन को एक नई दिशा देगा। फडणवीस ने यह भी रेखांकित किया कि शास्त्रीय मराठी भाषा दिवस की पूर्व संध्या पर लिया गया यह निर्णय महाराष्ट्र के लोगों और विश्वभर के मराठी भाषियों में गर्व का भाव जगाता है।
व्यापक संदर्भ और महत्व
गौरतलब है कि भारत में अब तक संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त था। मराठी को यह मान्यता देना एक दीर्घकालिक माँग की पूर्ति थी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और डिजिटलीकरण पर विशेष ज़ोर दे रही है। डेक्कन कॉलेज की अकादमिक साख और पुरातत्व तथा भाषाविज्ञान में उसकी दशकों पुरानी विशेषज्ञता इस केंद्र को एक सशक्त आधार प्रदान करती है।
आगे की राह
डीपीआर प्रस्तुत होने के बाद केंद्रीय निधि का आवंटन होगा और अनुसंधान कार्य की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। यह केंद्र न केवल मराठी की ऐतिहासिक जड़ों को संजोएगा, बल्कि नई पीढ़ी के भाषाविदों और शोधकर्ताओं के लिए एक राष्ट्रीय संदर्भ संस्थान के रूप में उभरने की क्षमता रखता है।