बांग्लादेश-अमेरिका रक्षा समझौते GSOMIA और ACSA पर अंतरराष्ट्रीय संगठन की चेतावनी, संप्रभुता को बताया खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) ने 21 मई को चेतावनी दी कि बांग्लादेश और अमेरिका के बीच प्रस्तावित दो प्रमुख रक्षा समझौते — GSOMIA (सैन्य सूचना सामान्य सुरक्षा समझौता) और ACSA (अधिग्रहण एवं क्रॉस-सर्विसिंग समझौता) — देश की संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। संगठन के अनुसार, इन समझौतों के भू-राजनीतिक और रणनीतिक परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।
समझौतों की पृष्ठभूमि
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने पर राजनीतिक स्तर पर सहमति बनी है। लंबे समय से लंबित GSOMIA और ACSA पर बातचीत आगे बढ़ रही है। ACSA विदेशी सैन्य अभियानों के लिए लॉजिस्टिक पहुँच बढ़ा सकता है, जबकि GSOMIA खुफिया साझेदारी और सैन्य एकीकरण को और गहरा कर सकता है।
GCDG की मुख्य आपत्तियाँ
GCDG ने कहा कि ये दोनों समझौते बांग्लादेश को किसी वैश्विक शक्ति के सैन्य और रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र में खींच सकते हैं, जिससे देश की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता कमज़ोर हो सकती है। संगठन ने यह भी कहा कि बिना सार्वजनिक चर्चा, संसदीय समीक्षा और राष्ट्रीय सहमति के इन समझौतों को अंतिम रूप देना बांग्लादेश की विदेश नीति के मूल सिद्धांत — 'सभी के साथ मित्रता, किसी के प्रति द्वेष नहीं' — से खतरनाक विचलन होगा।
संगठन ने अपने बयान में कहा, 'बांग्लादेश ने ऐतिहासिक रूप से संतुलित और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति अपनाई है। बाहरी दबाव में सैन्य समझौतों में शामिल होना दक्षिण एशिया और बंगाल की खाड़ी में क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है और देश को व्यापक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में उलझा सकता है।'
व्यापार वार्ता से जुड़ाव पर चिंता
GCDG ने चिंता जताई कि इन समझौतों को अमेरिका के साथ चल रही व्यापार और कूटनीतिक वार्ताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। संगठन के अनुसार, आर्थिक या राजनीतिक समर्थन के बदले रणनीतिक और सैन्य रियायतें देना बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध होगा। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशियाई देश में लोकतंत्र, जवाबदेही और स्वतंत्र राजनीतिक भागीदारी की माँगें तेज़ हो रही हैं।
BNP सरकार पर सवाल
संगठन ने कहा कि सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के पास ऐसे 'गोपनीय' और दीर्घकालिक सुरक्षा समझौतों में शामिल होने का 'नैतिक और राजनीतिक जनादेश' नहीं है। GCDG ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विदेशी समर्थन और राजनीतिक वैधता हासिल करने के लिए बांग्लादेश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता करने को तैयार दिखाई दे रही है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि GSOMIA और ACSA जैसे समझौते अमेरिका कई देशों के साथ कर चुका है, और इन्हें प्रायः व्यापक सुरक्षा साझेदारी की नींव माना जाता है। बांग्लादेश में इन समझौतों पर संसदीय बहस और नागरिक समाज की माँगें तेज़ होने की संभावना है। क्षेत्रीय शक्तियों, विशेषकर भारत और चीन, की इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया भी महत्त्वपूर्ण होगी।