बांकुरा पुलिस इंस्पेक्टर जयंता पाल की रेलवे ट्रैक पर रहस्यमय मौत, जाँच जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में डीआईबी इंस्पेक्टर जयंता पाल की शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2026 को रेलवे ट्रैक पर हुई मौत ने कई अनुत्तरित सवाल खड़े कर दिए हैं। केथरडांगा के पास अरण्यक एक्सप्रेस की चपेट में आने से हुई इस मौत को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, परिजनों की आशंकाएँ और जयंता का विवादास्पद अतीत जाँचकर्ताओं के सामने एक जटिल तस्वीर पेश कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार शाम को बांकुरा शहर के निकट केथरडांगा इलाके में अरण्यक एक्सप्रेस ने जयंता पाल के शव को कुचल दिया। शव बांकुरा स्टेशन की ओर आती ट्रेन की चपेट में आया। शनिवार दोपहर को बांकुरा सम्मिलानी मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम पूरा हुआ, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट शनिवार शाम तक मिलने की उम्मीद थी।
पुलिस के अनुसार, जयंता ने करीब 45 दिन पहले बांकुरा पुलिस स्टेशन में कार्यभार संभाला था। तीन-चार दिन काम करने के बाद उन्होंने बीमारी के कारण 40 दिन की छुट्टी ले ली थी। शुक्रवार को वे वापस ड्यूटी पर लौटे और उसी दिन यह घटना घटी।
रहस्य को गहरा करने वाले सवाल
घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति जाँचकर्ताओं को उलझन में डाल रही है। जहाँ से शव बरामद हुआ, वह स्थान बंद रेलवे गेट से करीब 50 मीटर दूर है। गौरतलब है कि करीब एक साल पहले रेलवे अधिकारियों ने उस गेट को बंद कर एक सबवे का निर्माण कराया था। जाँचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जयंता ने उपलब्ध सबवे का उपयोग क्यों नहीं किया और बंद गेट से आगे 50 मीटर तक क्यों गए।
प्रत्यक्षदर्शी सुदाम शीट ने बताया कि वे उस वक्त खुद रेलवे लाइन पार कर रहे थे, जब उन्होंने एक व्यक्ति को चलती ट्रेन के सामने कूदते देखा। उनके शब्दों में, 'यह घटना किसी भी तरह से दुर्घटना नहीं थी। मुझे पूरा यकीन है कि उसने आत्महत्या की है।'
परिजनों की प्रतिक्रिया
जयंता के परिवार में उनके 80 वर्षीय पिता, पत्नी और एक बेटा हैं। परिवार अभी तक आत्महत्या की बात स्वीकार करने को तैयार नहीं है। उनके दामाद राजीव मुखर्जी ने कहा, 'कम से कम मुझे तो नहीं लगता कि यह आत्महत्या थी। हम दोनों स्थानीय क्लब से जुड़े थे। अगर कोई समस्या होती तो वह हमें ज़रूर बताते।' हालाँकि मुखर्जी ने यह भी कहा कि जयंता की पत्नी ही उनकी मानसिक स्थिति के बारे में सटीक जानकारी दे सकती हैं। घटना की सूचना मिलते ही जयंता की साली और दामाद बांकुरा पहुँच गए।
विवादों से भरा अतीत
यह ऐसे समय में आया है जब जयंता का अतीत पहले से ही विवादों से घिरा था। 20 फरवरी 2025 को जयंता ने हावड़ा के घोषपारा पेट्रोल पंप के सामने खुद को गोली मार ली थी, हालाँकि उस समय वे बच गए थे। उस वक्त वे हुगली जिले के चंदिताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक के रूप में कार्यरत थे। कथित तौर पर उस घटना के समय एक महिला भी उनके साथ मौजूद थी, और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बिना अपने कार्यक्षेत्र से इतनी दूर होने पर सवाल उठे थे। उस घटना के बाद जयंता को कुछ दिनों के लिए निलंबित भी किया गया था।
जाँच की दिशा
जाँचकर्ता अब जयंता की मानसिक स्थिति का पता लगाने में जुटे हैं। उनके परिवार और सहकर्मियों से पूछताछ की जा रही है और उनके फोन की जाँच भी की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद मौत की सटीक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह मामला पश्चिम बंगाल पुलिस के भीतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।