दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून वाशिंगटन रवाना, रूबियो से होर्मुज, $350 अरब निवेश और प्योंगयांग पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को वाशिंगटन के लिए रवाना हो गए, जहाँ वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ तीन प्रमुख मुद्दों — स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन सुरक्षा, 350 अरब डॉलर के निवेश पैकेज के क्रियान्वयन और उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियों — पर विस्तृत बातचीत करेंगे। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंत्रिस्तरीय बैठक शुक्रवार को होगी।
सितंबर में दूसरी आमने-सामने मुलाकात
यह चो और रूबियो के बीच सितंबर में दूसरी प्रत्यक्ष बैठक होगी। इससे पहले दोनों 1 सितंबर को अमेरिका में ही मिल चुके हैं। इतने कम अंतराल में दो द्विपक्षीय बैठकें इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश मौजूदा भू-राजनीतिक दबावों के बीच अपनी कूटनीतिक समन्वय की गति तेज़ करना चाहते हैं।
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी हुई है, और अमेरिका अपने सहयोगियों से समर्थन मांग रहा है।
होर्मुज पर दक्षिण कोरिया का रुख
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। दक्षिण कोरिया ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए इस मार्ग पर किसी भी व्यवधान का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
चो ह्यून ने रवाना होने से पहले कहा कि उनका देश नागरिकों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देगा। हालाँकि, दक्षिण कोरिया ने अभी तक होर्मुज में किसी सैन्य अभियान में शामिल होने का कोई निर्णय नहीं लिया है — और यही अनिर्णय वाशिंगटन के साथ बातचीत का केंद्र बिंदु बनेगा।
350 अरब डॉलर निवेश पैकेज का क्रियान्वयन
दोनों देशों ने हाल ही में 350 अरब डॉलर के निवेश पैकेज पर सहमति बनाई है, जिसमें अमेरिकी जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग के लिए अकेले 150 अरब डॉलर शामिल हैं। इस समझौते के साथ अमेरिका ने दक्षिण कोरियाई उत्पादों पर टैरिफ को 15 प्रतिशत तक सीमित रखने की व्यवस्था की है।
सोल अब इस समझौते के व्यावहारिक क्रियान्वयन और निवेश से जुड़े बारीक विवरणों पर समन्वय बढ़ाना चाहता है। चो की यह यात्रा उसी दिशा में एक ठोस कूटनीतिक कदम मानी जा रही है।
उत्तर कोरिया: ट्रंप-किम और ली प्रशासन की उम्मीदें
उत्तर कोरिया का मुद्दा बातचीत में तीसरा बड़ा एजेंडा होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ दोबारा वार्ता में रुचि दिखाई है। उधर, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का प्रशासन भी प्योंगयांग के साथ संवाद फिर शुरू करने की कोशिश में है।
सोल चाहता है कि उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ उसका समन्वय बना रहे, साथ ही तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता भी खुला रखा जाए।
आगे क्या
चो ह्यून अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान अमेरिकी सांसदों और अन्य अधिकारियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। बातचीत के नतीजे — खासकर होर्मुज में दक्षिण कोरिया की भूमिका और निवेश पैकेज की अगली किस्त को लेकर — आने वाले हफ्तों में क्षेत्रीय सुरक्षा की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।