होर्मुज स्ट्रेट में तैनाती पर दक्षिण कोरिया का मंथन, ईरान की चेतावनी के बीच अमेरिका संग रक्षा वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच 14 सितंबर 2026 को शुरू हो रही उच्चस्तरीय रक्षा वार्ता ऐसे नाज़ुक मोड़ पर आई है, जब सोल होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य तैनाती के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि यह बैठक तब हो रही है जब ईरान पहले ही खुली चेतावनी दे चुका है कि किसी भी सैन्य उपस्थिति के 'गंभीर परिणाम' होंगे।
बुसान में KIDD बैठक का आयोजन
कोरिया-अमेरिका इंटीग्रेटेड डिफेंस डायलॉग (KIDD) की द्विवार्षिक बैठक बुधवार से शुक्रवार तक दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर बुसान में आयोजित की जाएगी। यह पहली बार है जब यह वार्ता सोल या वॉशिंगटन के बाहर हो रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बुसान को चुनने के पीछे दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को रेखांकित करने की मंशा है।
वार्ता का नेतृत्व दक्षिण कोरिया की ओर से उप रक्षा मंत्री (नीति) किम होंग-चोल और अमेरिका की ओर से पूर्वी एशिया मामलों के उप सहायक रक्षा सचिव जॉर्ज लेमूर करेंगे। दोनों देशों के रक्षा और विदेश मामलों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे।
होर्मुज तैनाती पर अटकलें और ईरान की चेतावनी
हालांकि दोनों सरकारों ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि बैठक में होर्मुज स्ट्रेट में दक्षिण कोरियाई सैन्य तैनाती के विकल्प पर भी चर्चा होगी। अमेरिका लंबे समय से दक्षिण कोरिया पर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा में भागीदारी निभाने का दबाव बना रहा है।
पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया ने होर्मुज क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए एक आकलन दल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजा था, जिसके बाद तैनाती की संभावनाओं को लेकर कयास तेज़ हो गए। हालाँकि सोल सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान पहले ही सार्वजनिक रूप से चेतावनी दे चुका है कि किसी भी तरह की बाहरी सैन्य उपस्थिति के 'गंभीर परिणाम' भुगतने होंगे।
ओपीकॉन हस्तांतरण — एक अहम एजेंडा
इस बैठक में युद्धकालीन सैन्य संचालन नियंत्रण (OPCON) का मुद्दा भी केंद्र में रहेगा। दक्षिण कोरिया चाहता है कि वह अमेरिका से यह नियंत्रण वापस लेकर अपनी सेना का पूर्ण संचालन स्वयं करे। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के 2030 में समाप्त होने वाले पाँच वर्षीय कार्यकाल से पहले — और यदि संभव हो तो अगले ही साल — इस प्रक्रिया को पूरा करने की कोशिश है।
सोल की मांग है कि संयुक्त सैन्य बलों की 'पूर्ण परिचालन क्षमता' (FOC) के सत्यापन का दूसरा चरण इस वर्ष पूरा हो, और इस शरद ऋतु में होने वाली रक्षा प्रमुखों की बैठक में OPCON हस्तांतरण का लक्ष्य वर्ष घोषित किया जाए।
KIDD की पृष्ठभूमि और इस सत्र का महत्त्व
KIDD की शुरुआत 2011 में हुई थी और यह दोनों सहयोगी देशों के बीच वरिष्ठ स्तर की व्यापक रक्षा वार्ता का प्रमुख मंच है। इस साल यह दूसरी KIDD बैठक होगी — पिछला सत्र मई में वॉशिंगटन में हुआ था। गौरतलब है कि इस बार की वार्ता में जहाज निर्माण सहयोग, OPCON, और होर्मुज तैनाती जैसे बहुआयामी मुद्दे एक साथ मेज़ पर हैं, जो इसे अपने हालिया इतिहास की सबसे भारी-भरकम बैठकों में से एक बनाता है।
आगे क्या होगा
बैठक के परिणाम — विशेषकर होर्मुज पर किसी भी संकेत के साथ — दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व दोनों में व्यापक कूटनीतिक हलचल पैदा कर सकते हैं। अगर दक्षिण कोरिया तैनाती का निर्णय लेता है, तो उसे ईरान के साथ संबंधों में सीधी तनातनी का सामना करना पड़ सकता है। शरद ऋतु की रक्षा प्रमुखों की बैठक इस मामले में अगला अहम मील का पत्थर होगी।