बंगाल का अगला मुख्यमंत्री मुस्लिम होना चाहिए: हुमायूं कबीर का बयान
सारांश
Key Takeaways
- हुमायूं कबीर का मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग उठाना
- ओवैसी के साथ गठबंधन से मिली ताकत
- बंगाल में मुस्लिम आबादी की राजनीतिक स्थिति
- रामनवमी से संबंधित दंगों का संदर्भ
- आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखें
कोलकाता, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन करने के बाद टीएमसी से निष्कासित और जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने यह दावा किया है कि पहले हम बंगाल में मुस्लिम उपमुख्यमंत्री की आवश्यकता पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। अब जब ओवैसी हमारे साथ हैं, तो हम चाहते हैं कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री मुस्लिम हो। इस विषय पर हम आवाज उठाते रहेंगे।
कोलकाता में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि मैं हमेशा से कहता आया हूं कि पश्चिम बंगाल की ३७ प्रतिशत मुस्लिम आबादी और जिनका ३२ प्रतिशत इलेक्टोरल रोल में नाम है, उनके वोट से कोई मुख्यमंत्री न बने, तो उपमुख्यमंत्री तो बनना चाहिए। यह मुद्दा मैंने पहले भी उठाया था। हमारे नेता ओवैसी का कहना है कि उपमुख्यमंत्री पद के लिए लड़ाई नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री पद के लिए जीत चाहिए। मैंने उनकी बात को मान लिया है। आज से हम मुख्यमंत्री बनने के लिए आवाज उठाएंगे।
हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि दस साल पहले रामनवमी बंगाल की राजनीति में कोई खास महत्व नहीं रखती थी। हिंदू-मुस्लिम विवाद भी नहीं था। लेकिन भाजपा ने पिछले दस वर्षों में इसे बदला है। रामनवमी के दौरान जो दंगे हुए, वे भाजपा ने हिंदुओं का वोट बटोरने के लिए कराए। भाजपा अब भी इसी रणनीति पर काम कर रही है।
मुर्शिदाबाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद डिस्ट्रिक्ट एक महत्वपूर्ण जिला है जहां हिंदू-मुस्लिम सदियों से एक साथ रहते आ रहे हैं। मेरा बांग्लादेश से कोई संबंध नहीं है। मेरी नागरिकता भारतीय है और मैं यहीं रहूंगा, यहीं की मिट्टी में दफन होऊंगा।
हिंदू और मुस्लिम वोट को लेकर हुमायूं कबीर ने कहा कि हिंदू वोट उनका मुद्दा है, जबकि मुसलमान वोट मेरा मुद्दा है। जब वे हिंदू वोट के लिए काम करेंगे, हम उतना ही मुसलमान वोट के लिए काम करेंगे। ममता बनर्जी मंदिरों का निर्माण करवा रही हैं ताकि वे भी वोट का बंटवारा कर सकें। मेरे पास ८०-१०० प्रतिशत मुस्लिम वोट हैं, जिससे हमारा मामला आसानी से सुलझ जाएगा।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की २९४ विधानसभा सीटों के लिए २३ और २९ अप्रैल को मतदान होगा, और चुनाव के नतीजे ४ मई को घोषित किए जाएंगे।