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एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन समाप्त किया, अब स्वतंत्र चुनाव लड़ेगी

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एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन समाप्त किया, अब स्वतंत्र चुनाव लड़ेगी

सारांश

पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़कर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पीछे कई राजनीतिक आरोप और विवाद हैं, जो चुनावी माहौल को गर्म कर रहे हैं।

मुख्य बातें

एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन समाप्त किया।
पार्टी ने स्वतंत्र चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
हुमायूं कबीर पर टीएमसी द्वारा गंभीर आरोप लगे हैं।
कबीर ने आरोपों को खारिज किया है।
यह घटनाक्रम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

कोलकाता, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावों के आगमन से हलचल बढ़ गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हुमायूं कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह किसी अन्य दल के साथ मिलकर नहीं, बल्कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी

एआईएमआईएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई पोस्ट में बताया, "हुमायूं कबीर के बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि बंगाल के मुसलमान कितने कमजोर हैं। एआईएमआईएम ऐसे बयानों से खुद को नहीं जोड़ सकती, जो मुसलमानों की गरिमा को संदेह में डालते हैं। वर्तमान में, एआईएमआईएम ने कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है। बंगाल के मुसलमान अत्यंत गरीब, उपेक्षित और शोषित समुदायों में से एक हैं। दशकों तक धर्मनिरपेक्ष शासन के बावजूद, उनके लिए कुछ विशेष नहीं किया गया है। एआईएमआईएम की नीति यह है कि हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज हो। हम बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे और भविष्य में किसी भी पार्टी के साथ हमारा कोई गठबंधन नहीं होगा।"

यह मामला एक विवादास्पद वीडियो के सामने आने के बाद शुरू हुआ है। इस वीडियो में हुमायूं कबीर को कथित रूप से भाजपा नेताओं के साथ मिलकर ममता बनर्जी को हराने की योजना बनाते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किया, जिसके चलते राजनीतिक माहौल गर्मा गया है।

टीएमसी ने आरोप लगाया है कि हुमायूं कबीर भाजपा के प्रमुख नेताओं, जैसे सुवेंदु अधिकारी और हिमंत बिस्वा सरमा के संपर्क में थे। इसके अलावा, पार्टी ने दावा किया है कि ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील की गई है, जिसमें से 200 करोड़ रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं। टीएमसी ने इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की है।

दूसरी ओर, हुमायूं कबीर ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह असली नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से तैयार किया गया है। उन्होंने इसे अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश बताया और कहा कि वह इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। भाजपा ने भी इन आरोपों को गलत ठहराया है। पार्टी का कहना है कि टीएमसी चुनाव में हार के डर से ऐसे झूठे आरोप लगा रही है और माहौल को खराब करने की कोशिश कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। यह कदम मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक आवाज को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएमआईएम ने क्यों गठबंधन तोड़ा?
एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर के विवादास्पद बयानों के कारण गठबंधन तोड़ा, जिससे मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठे।
क्या हुमायूं कबीर पर लगाए गए आरोप सही हैं?
हुमायूं कबीर ने सभी आरोपों का खंडन किया है और वीडियो को फर्जी बताया है।
टीएमसी का क्या कहना है?
टीएमसी ने आरोप लगाया है कि कबीर भाजपा नेताओं के साथ साठगांठ में थे और ममता बनर्जी को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर डील हुई है।
एआईएमआईएम का चुनावी रणनीति क्या होगी?
एआईएमआईएम ने स्पष्ट किया है कि वह बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी और किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
इस राजनीतिक घटनाक्रम का क्या असर होगा?
यह घटनाक्रम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है, खासकर मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक स्थिति पर।
राष्ट्र प्रेस
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