तमिलनाडु महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हजीना सैयद को हटाया गया: आलाकमान का बड़ा फैसला
सारांश
Key Takeaways
- हजीना सैयद को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए हटाया गया।
- उनकी नियुक्ति 21 अप्रैल, 2024 को हुई थी।
- उन्होंने कांग्रेस में एक प्रमुख चेहरा बनकर अपनी पहचान बनाई।
- पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
- आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
चेन्नई, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस पार्टी में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने हजीना सैयद को तमिलनाडु प्रदेश महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के आधार पर की गई है।
यह फैसला हजीना की नियुक्ति के लगभग दो साल बाद लिया गया है, जिसने राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है।
हजीना सैयद को 21 अप्रैल, 2024 को इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने सुधा रामकृष्णन का स्थान लिया, जो मयिलादुथुराई निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए पद छोड़ चुकी थीं। उस समय हजीना एक प्रभावशाली संगठनात्मक नेता मानी जाती थीं, क्योंकि वे पूर्व में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रह चुकी थीं।
इन वर्षों में, उन्होंने कांग्रेस का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं और टेलीविजन बहसों तथा सार्वजनिक मंचों पर पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। पार्टी के विचारों को स्पष्टता से व्यक्त करने और राजनीतिक चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी ने उन्हें कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच पहचान दिलाई।
हजीना का राजनीतिक सफर एक दशक से भी अधिक का है, जिसमें उन्होंने अखिल भारतीय महिला कांग्रेस में 12 वर्ष से अधिक समय तक सेवा की है। इस दौरान, वे अखिल भारतीय सचिव, तमिलनाडु कांग्रेस प्रवक्ता और कई राज्यों के चुनाव प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहीं।
एक पारंपरिक कांग्रेसी परिवार से ताल्लुक रखने वाली हजीना सैयद का पार्टी से गहरा संबंध है। उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे, और कांग्रेस में उनकी दीर्घकालिक भागीदारी उनकी विरासत और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता से प्रेरित है। उनके व्यापक योगदान के बावजूद, पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए उन्हें हटाना आवश्यक समझा।
आधिकारिक आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जरूरत पड़ने पर पार्टी नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
इस अचानक लिए गए फैसले ने कांग्रेस पार्टी और तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।