आईजीआई एयरपोर्ट पर ₹5.38 करोड़ का हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त, कुआलालंपुर से आए दो तस्कर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport), नई दिल्ली पर सीमा शुल्क विभाग ने 7 जून 2025 को एक बड़ी तस्करी की साजिश नाकाम करते हुए 15.38 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त किया, जिसका अवैध बाज़ार मूल्य लगभग ₹5.38 करोड़ आंका गया है। कुआलालंपुर से फ्लाइट डी7-182 से आए दो यात्रियों को ग्रीन चैनल पार करने के तुरंत बाद हिरासत में लिया गया और उन्हें एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
कैसे हुई गिरफ्तारी
सीमा शुल्क अधिकारियों ने विशेष खुफिया जानकारी और यात्री-प्रोफाइलिंग के आधार पर इन दोनों संदिग्धों पर नज़र रखी। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यात्री अपने नियमित चेक-इन बैगेज के अलावा दो बिल्कुल नए गीजर भी साथ ले जा रहे थे। यह असामान्य सामान तत्काल संदेह का कारण बना।
संदिग्धों के मोबाइल फोन की गहन जांच और लगातार पूछताछ के बाद अधिकारियों को गीजरों के भीतर छिपी सामग्री का गहरा संदेह हुआ। इसके बाद दोनों उपकरणों का एक्स-रे परीक्षण कराया गया, जिसमें आंतरिक संरचना में असामान्य घनत्व के संकेत मिले।
बरामदगी का विवरण
गीजरों को खोलने पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने भीतर 145 वैक्यूम-सील्ड पैकेट बरामद किए, जिनमें हरे पत्तेदार पदार्थ भरा था। जांच में यह पदार्थ हाइड्रोपोनिक वीड (गांजा) होने का संदेह है। बरामद मादक पदार्थ का कुल वजन 15.38 किलोग्राम रहा और इसका अनुमानित अवैध बाज़ार मूल्य ₹5.38 करोड़ बताया गया है। पूरी खेप को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत विधिवत जब्त कर लिया गया है।
आईजीआई पर बढ़ती तस्करी की घटनाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब आईजीआई हवाई अड्डे पर नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले भी सीमा शुल्क अधिकारियों ने बैंकॉक की फ्लाइट एआई-2356 से आए दो थाईलैंड के यात्रियों को ग्रीन चैनल पार करने के बाद रोका था। उस मामले में ₹48 करोड़ मूल्य के हाइड्रोपोनिक गांजे के 6 वैक्यूम-सील्ड पैकेट बरामद हुए थे — एक यात्री के सामान से लगभग 29 किलोग्राम और दूसरे से लगभग 19 किलोग्राम। गौरतलब है कि दोनों मामलों में तस्करी का तरीका एक जैसा रहा — घरेलू उपकरणों में छिपाकर हाइड्रोपोनिक गांजे की खेप लाने की कोशिश।
आगे की जांच
दोनों गिरफ्तार यात्रियों से पूछताछ जारी है। अधिकारियों के अनुसार जांच का दायरा व्यापक आपूर्ति श्रृंखला और संभावित भारतीय संपर्कों तक फैलाया जा रहा है। सीमा शुल्क विभाग की सक्रिय प्रोफाइलिंग प्रणाली एक बार फिर कारगर साबित हुई है।