आईआईटी-बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत: मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं 10-11 अक्टूबर तक टली
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) बॉम्बे ने 24 सितंबर 2026 को घोषणा की कि दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मौत के मद्देनज़र मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। 26 और 27 सितंबर को प्रस्तावित ये परीक्षाएं अब 10 और 11 अक्टूबर को आयोजित की जाएंगी, जबकि परीक्षाओं का टाइम-टेबल पूर्ववत रहेगा। पवई कैंपस में विरोध-प्रदर्शनों के कुछ दिनों बाद यह फैसला लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे 18 सितंबर 2026 की शाम को पवई कैंपस के हॉस्टल कमरे में फंदे से लटके पाए गए थे। यह घटना कथित तौर पर मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई। इस दुखद घटना के बाद कैंपस में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसके चलते संस्थान को शैक्षणिक गतिविधियाँ अस्थायी रूप से स्थगित करनी पड़ीं।
जाँच और कानूनी कार्रवाई
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस ने बुधवार, 23 सितंबर को कहा कि जाँच निष्पक्ष और सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि इस मामले में भ्रामक जानकारी न फैलाई जाए।
सूत्रों के अनुसार, आईआईटी-बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को जाँच के दौरान छुट्टी पर भेज दिया गया है। वाकोडे के माता-पिता ने प्रोफेसर डूला की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की है और उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने तथा जाति-आधारित भेदभाव के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। संस्थान प्रशासन पर भी परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साहिल वाकोडे के परिवार से फोन पर बात की और न्याय की लड़ाई में हर संभव समर्थन का आश्वासन दिया। महाराष्ट्र कांग्रेस ने यह जानकारी गुरुवार, 24 सितंबर को साझा की। इसके साथ ही यूथ कांग्रेस ने गुरुवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की घोषणा की, जिसमें इस मामले पर भविष्य की रणनीति और आगे की कार्रवाई का खुलासा किए जाने की उम्मीद थी।
संस्थान की प्रतिक्रिया
आईआईटी-बॉम्बे ने एक आधिकारिक बयान में परीक्षाओं की नई तारीखों की घोषणा की। संस्थान ने बताया कि बुधवार, 23 सितंबर से पवई कैंपस में कक्षाएं पुनः शुरू हो गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब साहिल की मौत के बाद कैंपस में तनाव का माहौल था और छात्रों में गहरा आक्रोश था।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मामला देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। मुंबई पुलिस की जाँच की दिशा और प्रोफेसर डूला के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया इस मामले में आगे की तस्वीर तय करेगी। परिवार और सामाजिक संगठनों की माँगों के बीच संस्थागत जवाबदेही का सवाल बना हुआ है।