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आईआईटी बॉम्बे में छात्र विरोध चौथे दिन भी जारी, साहिल वाकोडे की मौत के बाद निदेशक के इस्तीफे की मांग

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आईआईटी बॉम्बे में छात्र विरोध चौथे दिन भी जारी, साहिल वाकोडे की मौत के बाद निदेशक के इस्तीफे की मांग

सारांश

आईआईटी बॉम्बे में बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद चौथे दिन भी विरोध जारी है। एक वर्ष में 4 छात्रों की मौत, जिनमें 3 दलित — यह महज़ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि व्यापक संस्थागत सवाल है जिसका जवाब अब तक नहीं मिला।

मुख्य बातें

आईआईटी बॉम्बे में 21 सितंबर 2026 को लगातार चौथे दिन भी छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या इस विरोध का तात्कालिक कारण है; यह दो महीनों में दूसरी आत्महत्या की घटना है।
पिछले एक वर्ष में 4 छात्रों की मौत हुई, जिनमें से 3 दलित थे — जातिगत उत्पीड़न की जाँच की माँग भी उठी।
निदेशक ने कथित तौर पर इस्तीफे का संकेत दिया, लेकिन 21 सितंबर तक कोई औपचारिक इस्तीफा नहीं।
छात्र संगठनों ने निदेशक का इस्तीफा, प्रोफेसरों का माफीनामा और संस्थागत सुधारों की जवाबदेही की माँग रखी है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे में बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद 21 सितंबर 2026 को लगातार चौथे दिन भी छात्र संगठनों ने परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रखा और संस्थान के निदेशक के इस्तीफे की माँग दोहराई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक निदेशक औपचारिक रूप से पद नहीं छोड़ते, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

मुंबई विश्वविद्यालय की अंग्रेज़ी साहित्य में परास्नातक छात्रा सना ने सोमवार को प्रदर्शन स्थल से बोलते हुए कहा, 'एक छात्र की जो संस्थागत हत्या की गई है, इसको लेकर हमने संबंधित सभी लोगों, प्रोफेसरों की माफीनामा और रेज़िग्नेशन की माँग है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक निदेशक का इस्तीफा वास्तव में सामने नहीं आ जाता।

गौरतलब है कि आईआईटी बॉम्बे के निदेशक ने कथित तौर पर इस्तीफे का संकेत दिया था, परंतु 21 सितंबर तक कोई औपचारिक इस्तीफा प्रस्तुत नहीं किया गया था। छात्र संगठनों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए दबाव बनाए रखने का निर्णय लिया।

एक वर्ष में चार मौतें — जाँच की माँग

सना के अनुसार पिछले एक वर्ष में आईआईटी बॉम्बे में 4 छात्रों की मृत्यु हो चुकी है, और साहिल वाकोडे का मामला पिछले दो महीनों में आत्महत्या की दूसरी घटना है। उन्होंने कहा, 'एक ही वर्ष में 4 छात्रों की मौत आम बात नहीं है।' इस श्रृंखला ने संस्थान की छात्र-कल्याण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता की पर्याप्तता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हुई है।

जातिगत उत्पीड़न के आरोप

प्रदर्शनकारियों ने एक और गंभीर पहलू उठाया है। सना ने बताया कि पिछले एक वर्ष में जिन 4 छात्रों ने आत्महत्या की, उनमें से 3 दलित थे। उन्होंने कहा कि इस आधार पर यह जाँचा जाना चाहिए कि क्या इन छात्रों को उनकी जाति के आधार पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। 'अगर छात्रों या विश्वविद्यालय की फैकल्टी की ओर से ऐसी चीज़ें की जा रही हैं, तो यह बेहद शर्मनाक घटना है' — यह सीधे आरोप अब जाँच एजेंसियों के लिए एक अलग जाँच बिंदु बन सकते हैं।

आलोचकों का कहना है कि देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए 'इनक्लूसिव एनवायरनमेंट' सुनिश्चित करने के तंत्र अभी भी कमज़ोर हैं।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

संस्थान प्रशासन की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं आया है। निदेशक के कथित इस्तीफे के संकेत के बावजूद, औपचारिक कदम न उठाए जाने से प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ा है। संस्थान की प्रतिक्रिया की धीमी रफ्तार ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी है।

आगे की राह

छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि उनकी माँगों में निदेशक का इस्तीफा, संबंधित प्रोफेसरों का माफीनामा, और संस्थागत सुधारों को लेकर जवाबदेही शामिल हैं। यदि ये माँगें पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन को और विस्तार दिए जाने की बात कही जा रही है। इस मामले की गूँज अब संसदीय गलियारों तक पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासन की उसी अस्पष्टता को दर्शाता है जो पहले से संस्थान पर सवाल उठा रही थी। बिना संरचनात्मक सुधार और पारदर्शी जाँच के, यह आंदोलन समाप्त होने के बजाय और व्यापक होने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी बॉम्बे में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद छात्र संगठन संस्थान के निदेशक के इस्तीफे, संबंधित प्रोफेसरों के माफीनामे और संस्थागत सुधारों की माँग को लेकर लगातार चौथे दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने इसे 'संस्थागत हत्या' करार दिया है।
साहिल वाकोडे कौन थे?
साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र थे, जिनकी आत्महत्या ने यह विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उनका मामला पिछले दो महीनों में संस्थान में आत्महत्या की दूसरी घटना बताया जा रहा है।
क्या आईआईटी बॉम्बे में जातिगत उत्पीड़न की जाँच होगी?
प्रदर्शनकारियों ने माँग की है कि पिछले एक वर्ष में चार छात्रों की मौत में से तीन दलित छात्रों का होना जाँच का विषय बनना चाहिए। कथित तौर पर यह देखा जाना ज़रूरी है कि क्या इन छात्रों को उनकी जाति के आधार पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। अभी तक किसी आधिकारिक जाँच की घोषणा नहीं हुई है।
आईआईटी बॉम्बे के निदेशक ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया?
रिपोर्टों के अनुसार निदेशक ने इस्तीफे का संकेत दिया था, लेकिन 21 सितंबर 2026 तक कोई औपचारिक इस्तीफा प्रस्तुत नहीं किया गया। छात्र संगठनों ने कहा है कि जब तक इस्तीफा वास्तव में नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
आईआईटी बॉम्बे में कितने छात्रों की मौत हुई है?
प्रदर्शनकारियों के अनुसार पिछले एक वर्ष में आईआईटी बॉम्बे में 4 छात्रों की मौत हुई है, जिनमें से 3 दलित थे। साहिल वाकोडे का मामला पिछले दो महीनों में दूसरी आत्महत्या की घटना बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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