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थल सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी से मिले नामित उच्चायुक्त त्रिवेदी, भारत-बांग्लादेश आर्मी-टू-आर्मी संपर्क पर मंथन

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थल सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी से मिले नामित उच्चायुक्त त्रिवेदी, भारत-बांग्लादेश आर्मी-टू-आर्मी संपर्क पर मंथन

सारांश

भारत की रक्षा कूटनीति एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय है — थल सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी से नामित उच्चायुक्त त्रिवेदी की मुलाकात, आईएनएस सुनयना की 17 देशों के साथ सफल वापसी और अवैध हथियारों पर 15-देशीय प्रशिक्षण पहल — ये सब मिलकर हिंद महासागर में भारत की बढ़ती सामरिक धुरी को रेखांकित करते हैं।

मुख्य बातें

भारत के नामित उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात कर भारत-बांग्लादेश आर्मी-टू-आर्मी संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की।
भारतीय नौसैनिक युद्धपोत आईएनएस सुनयना आईओएस सागर-26 मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर स्वदेश लौटा; मिशन में 17 देशों के नौसैनिक शामिल रहे।
मिशन के दौरान आईएनएस सुनयना ने चट्टोग्राम बंदरगाह का दौरा किया; 12 मई को बांग्लादेश नौसेना ने औपचारिक विदाई दी।
भारत ने 16 फरवरी 2025 से एशिया-प्रशांत के 15 देशों के लिए अवैध हथियारों की तस्करी रोकने हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
विशेषज्ञों के अनुसार ये पहलें भारत को हिंद महासागर और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करती हैं।

भारत के बांग्लादेश के लिए नामित उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने नई दिल्ली में भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-बांग्लादेश रक्षा संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने, सीमा सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने तथा आर्मी-टू-आर्मी संपर्कों को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक और समुद्री भूमिका लगातार विस्तार पा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

दोनों देशों की सेनाएँ अब केवल सीमा सुरक्षा और सामरिक समन्वय तक सीमित नहीं हैं। समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे व्यापक मुद्दों पर भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। 22 मई को हुई इस बैठक को द्विपक्षीय रक्षा कूटनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आईओएस सागर-26 मिशन की सफल वापसी

भारतीय नौसेना का आईओएस सागर-26 मिशन हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग और साझेदारी की भावना को मूर्त रूप देने वाली एक बड़ी उपलब्धि के रूप में उभरा है। कई सप्ताह तक समुद्र में संयुक्त प्रशिक्षण और परिचालन गतिविधियाँ संपन्न करने के बाद भारतीय नौसैनिक युद्धपोत आईएनएस सुनयना बुधवार को स्वदेश लौट आया। जहाज के आगमन पर आयोजित फ्लैग-इन समारोह ने हिंद महासागर में भारत की बढ़ती समुद्री उपस्थिति और मित्र देशों के साथ गहराते संबंधों को रेखांकित किया।

'वन ओशन, वन मिशन' की भावना पर आधारित इस मिशन का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ समुद्र को सहयोग, विश्वास और साझेदारी के मंच के रूप में स्थापित करना था। इस मिशन के दौरान भारत समेत 17 देशों के नौसैनिक एक ही युद्धपोत पर साथ रहे, जिनमें बांग्लादेश के नौसैनिक भी शामिल थे। सभी ने संयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त किया और एक-दूसरे की सैन्य कार्यप्रणाली तथा रणनीतियों को समझा।

बहुराष्ट्रीय भागीदारी और क्षेत्रीय विश्वास

इस बहुराष्ट्रीय पहल में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और संयुक्त अरब अमीरात के नौसैनिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और सैन्य परंपराओं के बावजूद सभी देशों का साझा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और सहयोगपूर्ण बनाना था।

आईएनएस सुनयना ने मिशन के दौरान बांग्लादेश के चट्टोग्राम बंदरगाह का भी दौरा किया, जहाँ संयुक्त गतिविधियों, पेशेवर संवादों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। 12 मई को चट्टोग्राम से रवाना होते समय बांग्लादेश नौसेना ने युद्धपोत को औपचारिक और भव्य विदाई दी, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते सामरिक विश्वास का प्रतीक माना गया। इसके बाद यह युद्धपोत श्रीलंका के कोलंबो की ओर अग्रसर हुआ था।

अवैध हथियारों पर नियंत्रण: क्षेत्रीय प्रशिक्षण पहल

क्षेत्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने के प्रयासों के तहत भारत ने इसी वर्ष 16 फरवरी से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 देशों के प्रतिनिधियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य हथियारों की ट्रैकिंग प्रणाली को सुदृढ़ करना, क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना और अवैध हथियारों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना था।

इस कार्यक्रम में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, फिजी, ईरान, किरिबाती, किर्गिज गणराज्य, लाओस, लेबनान, मंगोलिया, मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड के प्रतिनिधि शामिल हुए। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की पहलें न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करती हैं, बल्कि भारत को हिंद महासागर और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में भी स्थापित करती हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश रक्षा संबंध अब द्विपक्षीय सीमाओं से आगे बढ़कर बहुपक्षीय सुरक्षा ढाँचे का हिस्सा बन रहे हैं। आर्मी-टू-आर्मी संपर्क बढ़ाने की यह पहल आने वाले समय में संयुक्त सैन्य अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और गति दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये संपर्क संस्थागत रूप ले पाते हैं या महज प्रतीकात्मक बने रहते हैं। अवैध हथियारों पर 15-देशीय प्रशिक्षण पहल दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंडे को खुद आकार देने की कोशिश कर रहा है — यह पहल जितनी सुरक्षा की है, उतनी ही रणनीतिक प्रभाव विस्तार की भी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल उपेंद्र द्विवेदी और दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात में क्या चर्चा हुई?
भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और बांग्लादेश के लिए नामित उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की बैठक में भारत-बांग्लादेश रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने, सीमा सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और आर्मी-टू-आर्मी संपर्कों को नई गति देने पर चर्चा हुई। यह बैठक हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सामरिक भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आईओएस सागर-26 मिशन क्या था और इसमें कौन-से देश शामिल थे?
आईओएस सागर-26 भारतीय नौसेना का एक बहुराष्ट्रीय समुद्री सहयोग मिशन था, जो 'वन ओशन, वन मिशन' की भावना पर आधारित था। इसमें भारत समेत 17 देशों के नौसैनिक एक ही युद्धपोत आईएनएस सुनयना पर साथ रहे, जिनमें बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य देश शामिल थे।
आईएनएस सुनयना ने बांग्लादेश के चट्टोग्राम बंदरगाह पर क्या किया?
आईएनएस सुनयना ने चट्टोग्राम बंदरगाह पर भारत और बांग्लादेश की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त गतिविधियाँ, पेशेवर संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। 12 मई को रवाना होते समय बांग्लादेश नौसेना ने युद्धपोत को औपचारिक और भव्य विदाई दी।
भारत ने अवैध हथियारों पर किस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया?
भारत ने 16 फरवरी 2025 से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 देशों के प्रतिनिधियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका उद्देश्य हथियारों की ट्रैकिंग प्रणाली को मजबूत करना और अवैध हथियारों की आवाजाही पर नियंत्रण सुनिश्चित करना था। इसमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड समेत अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह सहयोग हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम है और भारत को एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करता है। दोनों देशों की सेनाएँ अब सीमा सुरक्षा के अलावा समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण जैसे व्यापक मुद्दों पर भी साथ काम कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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