पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 14 जून 2026 को बेंगलुरु में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के निकट व्यवधानों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने यह बात भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'विकसित भारत' कार्यक्रम में कही।
जीडीपी आंकड़े बोलते हैं
सीतारमण ने कहा कि यह दावा केंद्र सरकार का नहीं, बल्कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में भारत को सबसे तेज़ वृद्धि दर वाला देश मानता है। आँकड़ों के अनुसार, हर तिमाही और हर वर्ष भारत इस स्थान पर बना हुआ है।
विपक्ष पर पलटवार
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) की आर्थिक आलोचना पर सीतारमण ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) और उनकी पार्टी लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि भारत मुश्किल में है। फिर भी, पश्चिम एशिया में संकट और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास व्यवधानों के बावजूद, भारत लगातार आगे बढ़ रहा है।" वित्त मंत्री ने आगाह किया कि इस तरह की लगातार आलोचना से नागरिकों के मन में देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
वैश्विक शिपिंग और ईंधन आपूर्ति की चुनौती
सीतारमण ने भू-राजनीतिक तनाव के बहुआयामी आर्थिक प्रभाव को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा, "इन चुनौतियों का असर न सिर्फ कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों पर, बल्कि ग्लोबल शिपिंग पर भी पड़ता है। शिपिंग कंपनियां संघर्ष वाले इलाकों से अपने जहाज भेजने में हिचकिचाती हैं। जहाजों पर हमले का खतरा होने के कारण इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ जाते हैं। चाहे जहाज खाली हो या उसमें कच्चा तेल लदा हो, इंश्योरेंस का खर्च काफी बढ़ जाता है और देश तक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आखिरकार यह खर्च उठाना ही पड़ता है।" यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल बाज़ार पहले से दबाव में हैं।
सरकार का दावा: आपूर्ति निर्बाध
वित्त मंत्री ने दावा किया कि इन तमाम वैश्विक चुनौतियों के बीच नरेंद्र मोदी सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रखी है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट, जिससे दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, भू-राजनीतिक दबाव में है। आगे भी भारत की आर्थिक प्रगति की दिशा इन वैश्विक परिस्थितियों के प्रबंधन पर निर्भर करेगी।