इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन: 14 जुलाई से शुरू होगा भारत का पहला सेवा क्षेत्र सूचकांक, मासिक डेटा मिलेगा 60 दिनों में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार 14 जुलाई 2026 को देश का पहला इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP) परीक्षण आधार पर जारी करेगी, जो भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र की मासिक गतिविधियों को पहली बार व्यापक रूप से मापने में सक्षम होगा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 7 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक बयान में इस फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने की पुष्टि की।
क्या है इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन
प्रस्तावित ISP मौजूदा इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का पूरक होगा और अर्थव्यवस्था की समग्र निगरानी को अधिक प्रभावी बनाएगा। गौरतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) है, और यह क्षेत्र रोज़गार, निवेश तथा निर्यात का प्रमुख आधार बन चुका है। इसके बावजूद अब तक इसकी मासिक गतिविधियों के लिए कोई संरचित सूचकांक उपलब्ध नहीं था।
डेटा स्रोत और तकनीकी ढाँचा
इंडेक्स तैयार करने के लिए GST नेटवर्क से प्राप्त समेकित आँकड़ों के साथ-साथ रेलवे, विमानन, बैंकिंग और बीमा जैसे क्षेत्रों के प्रशासनिक डेटा का उपयोग किया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे GST-मुक्त क्षेत्रों को शामिल करने के लिए एनुअल सर्वे ऑफ अनइनकॉरपोरेटेड सेक्टर एंटरप्राइजेज इन सर्विसेज सेक्टर एंड एस्टैब्लिशमेंट्स (ASISSSE) के आँकड़ों का भी इस्तेमाल होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इंडेक्स निर्माण के लिए व्यक्तिगत GST डेटा की न तो आवश्यकता है और न ही उस तक कोई पहुँच है।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ISP को लासपेयर वॉल्यूम इंडेक्स के रूप में तैयार किया जाए और 2024-25 को आधार वर्ष (Base Year) बनाया जाए। भार निर्धारण GVA के आधार पर होगा और NIC 2025 के दो-अंकीय स्तर पर विभिन्न सेवा उप-क्षेत्रों के अलग-अलग सूचकांक भी प्रकाशित किए जाएंगे।
तकनीकी सलाहकार समिति की भूमिका
इस सूचकांक को विकसित करने के लिए मई 2025 में इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन पर तकनीकी सलाहकार समिति (TAC-ISP) का गठन किया गया था। इसकी अध्यक्षता नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष ने की। समिति ने इंडेक्स के वैचारिक, तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। अप्रैल 2026 में एक दृष्टिपत्र जारी कर आम नागरिकों और हितधारकों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए थे।
GST के बाद मज़बूत हुई सांख्यिकीय प्रणाली
मंत्रालय के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद देश की सांख्यिकीय प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब लाखों व्यवसायों द्वारा प्रति माह दर्ज किए जाने वाले बाहरी आपूर्ति के आँकड़ों के आधार पर सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का अधिक सटीक विश्लेषण संभव हो पाया है। यह ऐसे समय में आया है जब नीति निर्माता उच्च-आवृत्ति आर्थिक संकेतकों की माँग बढ़ा रहे हैं।
नीति निर्माताओं और निवेशकों पर असर
समिति की सिफारिश के अनुसार, ISP हर महीने तैयार किया जाएगा और संबंधित महीने की समाप्ति के 60 दिनों के भीतर जारी किया जाएगा। इससे नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और निवेशकों को भारत के सेवा क्षेत्र की स्थिति का समय पर और विश्वसनीय संकेत मिल सकेगा। शुरुआती चरण में परीक्षण आधार पर जारी किए जाने वाले आँकड़ों पर विशेषज्ञों और हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर कार्यप्रणाली को और परिष्कृत किया जाएगा।