भारत ने अफगान शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए अफगानिस्तान को सौंपे फैमिली टेंट, पाकिस्तान से रोज़ाना 10,000 से अधिक लौट रहे
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने 13 जुलाई 2026 को अफगानिस्तान के प्रति अपनी मानवीय प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए अफगानिस्तान के शरणार्थी और पुनर्वास मंत्रालय (एमओआरआर) को परिवारों के रहने के लिए टेंट सौंपे। यह सहायता ऐसे समय में दी गई है जब पाकिस्तान से बड़ी संख्या में अफगान नागरिक अपने देश वापस लौट रहे हैं और उनके पुनर्वास की चुनौती गंभीर रूप ले चुकी है।
भारत की मानवीय सहायता का विवरण
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस सहायता की जानकारी देते हुए कहा, 'अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत की लगातार मानवीय मदद के तहत, भारत ने एमओआरआर को परिवारों के रहने के लिए टेंट सौंपे हैं। इसका मकसद अफगानिस्तान लौट रहे लोगों को रहने की जगह और दोबारा बसने में मदद देना है।' यह कदम भारत की उस दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अफगानिस्तान को मानवीय आधार पर सहायता देता रहा है।
पाकिस्तान से अफगानों की बड़े पैमाने पर वापसी
इस समय पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों और बिना वैध दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को वापस भेजने की कार्रवाई तेज़ हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, जिन अफगान नागरिकों के पास वैध वीज़ा नहीं था, उन्हें 10 जुलाई तक स्वेच्छा से देश छोड़ने की मोहलत दी गई थी। यह समयसीमा समाप्त होने के बाद पाकिस्तानी प्रशासन ने औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी।
तालिबान की 'हाई कमीशन फॉर एड्रेसिंग रिटर्नीज़ इश्यूज़' के सचिवालय के अनुसार, पिछले सप्ताहांत सिर्फ 24 घंटों में 4,000 से अधिक अफगानों को पाकिस्तान से वापस भेजा गया। पाकिस्तान के लांडी कोटल स्थित हमज़ा बाबा ट्रांज़िट पॉइंट के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से सभी अफगान नागरिकों को वापस लौटने का आदेश जारी होने के बाद रोज़ाना लौटने वालों की संख्या 10,000 से भी अधिक हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चिंता
पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के प्रवक्ता कैसर खान अफरीदी ने पाकिस्तान सरकार के अफगान शरणार्थियों और शरण मांगने वालों को 'जबरन' वापस भेजने के फैसले पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा, 'यूएनएचसीआर को खासतौर पर उन महिलाओं और लड़कियों की चिंता है जिन्हें ऐसे देश में लौटने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जहाँ उनके मानवाधिकार खतरे में हैं। इसके अलावा कुछ और समूह भी हैं जिन्हें वापस लौटने पर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।'
अफरीदी ने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि अफगानों की वापसी उनकी अपनी इच्छा से हो, सुरक्षित हो और सम्मानजनक तरीके से कराई जाए। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर पहले से ही गंभीर प्रतिबंध लागू हैं।
आगे की स्थिति और भारत की भूमिका
यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में बुनियादी ढाँचा और आवास संसाधन लाखों वापस लौटने वालों की ज़रूरतें पूरी करने में सक्षम नहीं हैं। भारत की यह सहायता — भले ही प्रतीकात्मक रूप में हो — अफगान नागरिकों के प्रति उसकी सहानुभूति और क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी रुचि को रेखांकित करती है। आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान से वापसी की यह लहर और तेज़ होने की आशंका है, जिससे अफगानिस्तान पर मानवीय दबाव और बढ़ेगा।