6 अक्टूबर 2026
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अफगानिस्तान पर 8वीं मॉस्को फॉर्मेट बातचीत: भारत ने संप्रभुता और मानवीय सहायता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

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अफगानिस्तान पर 8वीं मॉस्को फॉर्मेट बातचीत: भारत ने संप्रभुता और मानवीय सहायता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

सारांश

मॉस्को में 8वीं अफगानिस्तान फॉर्मेट बातचीत में भारत ने एक बार फिर अफगान जनता के साथ खड़े रहने का संदेश दिया — कूटनीतिक मंच पर भी, और दवाओं की खेप के जरिए भी। यह भारत की उस सतत नीति की अभिव्यक्ति है जो तालिबान शासन के बाद भी अफगान जनता से संपर्क नहीं तोड़ती।

मुख्य बातें

भारत ने 5 अक्टूबर 2026 को मॉस्को में 8वीं मॉस्को फॉर्मेट बातचीत में अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की पुनः पुष्टि की।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राजदूत विनय कुमार और डॉ.
सुरेश कुमार ने किया।
हाल ही में काबुल के एक सरकारी अस्पताल को जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल सामान की खेप पहुँचाई गई।
20 अगस्त 2026 को भी इसी प्रकार की मेडिकल आपूर्ति काबुल भेजी गई थी।
जुलाई में नूरिस्तान बाढ़ के बाद भारत ने अफगानिस्तान के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को राहत सामग्री पहुँचाई।

भारत ने 5 अक्टूबर 2026 को मॉस्को में आयोजित अफगानिस्तान पर 8वीं मॉस्को फॉर्मेट बातचीत में एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह अफगान जनता की भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अफगानिस्तान की संप्रभुता, एकता तथा क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण समर्थन करता है। रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय परामर्श में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल और उनकी भागीदारी

इस बातचीत में भारत का प्रतिनिधित्व रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार और विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं ईरान) डॉ. एम. सुरेश कुमार ने किया। रूस स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में पुष्टि की कि प्रतिनिधिमंडल ने अफगानिस्तान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती और साझेदारी के आधार पर अपनी स्थिति रखी। गौरतलब है कि मॉस्को फॉर्मेट अफगानिस्तान मुद्दे पर एक प्रमुख बहुपक्षीय मंच है जिसमें क्षेत्रीय शक्तियाँ भाग लेती हैं।

मानवीय सहायता की निरंतर श्रृंखला

भारत सरकार का यह कदम अफगानिस्तान को मानवीय सहायता देने की उसकी निरंतर पहल का हिस्सा है। पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि भारत से जीवन रक्षक दवाओं और मेडिकल सामान की एक और खेप काबुल के एक सरकारी अस्पताल में पहुँचाई गई। मंत्रालय ने कहा कि 'स्वास्थ्य सेवा अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत की मानवीय सहायता का मुख्य हिस्सा है।'

20 अगस्त 2026 को भी भारत ने काबुल के एक सरकारी अस्पताल में दवाएं और मेडिकल सामग्री पहुँचाकर अफगान जनता के साथ अपनी स्वास्थ्य साझेदारी को पुनः मजबूत किया था।

आपदा राहत में भी भारत की भूमिका

यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने जुलाई में नूरिस्तान में आई भयानक बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए अफगानिस्तान के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को राहत सामग्री भी पहुँचाई थी। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत केवल राजनयिक स्तर पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक मानवीय सहायता के जरिए भी अफगान जनता के साथ खड़ा है।

भारत की अफगानिस्तान नीति का व्यापक संदर्भ

भारत की अफगानिस्तान नीति लंबे समय से बहुआयामी रही है — एक तरफ राजनयिक जुड़ाव और दूसरी तरफ मानवीय सहायता। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भी भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने मानवीय संपर्क बनाए रखे हैं। मॉस्को फॉर्मेट में भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत इस मुद्दे पर बहुपक्षीय कूटनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अफगानिस्तान में स्थिरता और मानवाधिकार की स्थिति में किस हद तक सुधार होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक वह दीर्घकालिक प्रभाव नहीं डाल सकती। भारत के पास अफगानिस्तान में निवेश का ऐतिहासिक अनुभव है — सलमा बाँध से लेकर संसद भवन तक — और उस विरासत की रक्षा के लिए कूटनीतिक सक्रियता ज़रूरी है। सवाल यह है कि क्या यह जुड़ाव केवल प्रतीकात्मक रहेगा या ठोस परिणामों में तब्दील होगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

8वीं मॉस्को फॉर्मेट बातचीत क्या है और इसमें भारत ने क्या कहा?
मॉस्को फॉर्मेट अफगानिस्तान मुद्दे पर एक बहुपक्षीय कूटनीतिक मंच है जिसे रूस ने शुरू किया था। 5 अक्टूबर 2026 को हुई 8वीं बैठक में भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की पुनः पुष्टि की और अफगान जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत ने अफगानिस्तान को हाल ही में क्या मानवीय सहायता दी है?
भारत ने हाल ही में काबुल के एक सरकारी अस्पताल को जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल सामान की एक खेप भेजी। इससे पहले 20 अगस्त 2026 को भी ऐसी ही आपूर्ति की गई थी और जुलाई में नूरिस्तान बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री दी गई थी।
मॉस्को बातचीत में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार और विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. एम. सुरेश कुमार ने किया।
तालिबान शासन के बाद भारत की अफगानिस्तान नीति क्या है?
2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अफगानिस्तान को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन मानवीय सहायता के जरिए अफगान जनता से संपर्क बनाए रखा है। स्वास्थ्य सेवा, आपदा राहत और बहुपक्षीय कूटनीतिक मंचों में भागीदारी इस नीति के मुख्य स्तंभ हैं।
भारत की अफगानिस्तान को मानवीय सहायता क्यों जारी है?
भारत का कहना है कि अफगानिस्तान के साथ उसकी पुरानी दोस्ती और ऐतिहासिक संबंध इस सहायता का आधार हैं। स्वास्थ्य सेवा को भारत अपनी मानवीय सहायता का केंद्रीय तत्व मानता है, जो अफगान जनता की तत्काल जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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