28 जून 2026
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भारत-सेशेल्स: ₹1,250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट समेत कई MOU पर हस्ताक्षर, मोदी बने नेशनल असेंबली संबोधित करने वाले पहले भारतीय PM

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भारत-सेशेल्स: ₹1,250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट समेत कई MOU पर हस्ताक्षर, मोदी बने नेशनल असेंबली संबोधित करने वाले पहले भारतीय PM

सारांश

PM मोदी की सेशेल्स यात्रा महज़ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं थी — ₹1,250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट, UPI से लेकर अंतरिक्ष तक के MOU, और नेशनल असेंबली में ऐतिहासिक संबोधन ने हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक पकड़ को नई परिभाषा दी।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी की 27-29 जून 2026 की सेशेल्स यात्रा में भारत ने ₹1,250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की।
स्वास्थ्य, UPI , कृषि, शिपिंग, अंतरिक्ष, रक्षा और प्रत्यर्पण सहित कई क्षेत्रों में MOU पर हस्ताक्षर हुए।
मोदी सेशेल्स नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने पर संयुक्त स्मृति-लोगो का अनावरण किया गया।
सेशेल्स ने भारत-प्रवर्तित CDRI (कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर) में शामिल होने की घोषणा की।
मोदी ने मॉरीशस के PM डॉ.
नवीनचंद्र रामगुलाम से भी मुलाकात की — नवंबर 2024 के बाद उनकी चौथी द्विपक्षीय बैठक।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 27 से 29 जून तक की सेशेल्स राजकीय यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्षा, अंतरिक्ष, डिजिटल परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MOU) पर हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय ने 28 जून को जारी बयान में बताया कि भारत ने सेशेल्स को ₹1,250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की है।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता और मुख्य समझौते

प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच विक्टोरिया स्थित स्टेट हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, अवैध मछली पकड़ने, मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती जैसी साझा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। वार्ता के बाद क्षमता निर्माण, UPI, स्वास्थ्य, कृषि, शिपिंग, अंतरिक्ष, प्रत्यर्पण और लाइन ऑफ क्रेडिट से जुड़े कई MOU का आदान-प्रदान हुआ।

50 वर्षों की राजनयिक मित्रता का उत्सव

दोनों नेताओं ने भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में संयुक्त स्मृति-लोगो का अनावरण किया। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और भारत अपनी 'पड़ोसी प्रथम' तथा 'विजन महासागर' नीति के तहत द्वीपीय राष्ट्रों के साथ संबंध और गहरे करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

नेशनल असेंबली में ऐतिहासिक संबोधन

प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली के विशेष सत्र को संबोधित किया और ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने संबोधन में उन्होंने लोकतंत्र, कानून के शासन और जन-केंद्रित सुशासन जैसे साझा मूल्यों का उल्लेख करते हुए संसदीय आदान-प्रदान को और बढ़ाने का आह्वान किया। गौरतलब है कि यह कदम भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का हिस्सा है, जो केवल सरकारी स्तर से आगे बढ़कर विधायी और जन-संपर्क तक पहुँचती है।

मॉरीशस के PM से भी अहम मुलाकात

सेशेल्स के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम से भी मुलाकात की। नवंबर 2024 में रामगुलाम के पदभार संभालने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बैठक थी। बैठक में भारत-मॉरीशस उन्नत रणनीतिक साझेदारी, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, सतत विकास और ब्लू इकोनॉमी से जुड़ी चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

नई विकासात्मक पहलें और CDRI में सेशेल्स का प्रवेश

खाद्य सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रक्षा क्षेत्र में भी कई नई विकासात्मक पहलों की घोषणा की गई। सेशेल्स ने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) में शामिल होने की भी घोषणा की, जो भारत की पहल पर स्थापित एक वैश्विक गठबंधन है। यह यात्रा हिंद महासागर में भारत की बढ़ती कूटनीतिक और रणनीतिक उपस्थिति की दिशा में एक और सुदृढ़ कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट और MOU की लंबी सूची यह संकेत देती है कि भारत हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति के जवाब में अपनी कूटनीतिक पहुँच को व्यवस्थित रूप से गहरा कर रहा है। नेशनल असेंबली में संबोधन एक चतुर सॉफ्ट-पावर कदम है — सरकार से संसद तक पहुँचना विश्वास की गहराई दर्शाता है। हालाँकि, असली परीक्षा इन MOU के क्रियान्वयन की है; भारत की पिछली कई विकासात्मक प्रतिबद्धताएँ कागज़ पर मज़बूत रही हैं, लेकिन ज़मीनी अमल में धीमी। CDRI में सेशेल्स का प्रवेश एक सकारात्मक संकेत है, पर ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा के वादों को सत्यापन-योग्य समयसीमा की ज़रूरत है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने सेशेल्स को कितनी लाइन ऑफ क्रेडिट दी है और इसका उपयोग कहाँ होगा?
भारत ने सेशेल्स को ₹1,250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह राशि खाद्य सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा जैसी विकासात्मक प्राथमिकताओं के लिए उपयोग की जाएगी।
PM मोदी की सेशेल्स यात्रा में कौन-कौन से क्षेत्रों में MOU हुए?
यात्रा के दौरान क्षमता निर्माण, UPI, स्वास्थ्य, कृषि, शिपिंग, अंतरिक्ष, प्रत्यर्पण और लाइन ऑफ क्रेडिट से जुड़े MOU पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा अक्षय ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में भी नई पहलों की घोषणा की गई।
मोदी सेशेल्स नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय PM क्यों बने यह महत्वपूर्ण है?
किसी विदेशी देश की संसद को संबोधित करना राजनयिक विश्वास और साझेदारी की गहराई का प्रतीक माना जाता है। मोदी ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने, जो भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति को सरकारी स्तर से आगे बढ़ाकर विधायी और जन-संपर्क तक ले जाने की रणनीति को दर्शाता है।
CDRI क्या है और सेशेल्स का इसमें शामिल होना क्यों अहम है?
कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) भारत की पहल पर स्थापित एक वैश्विक गठबंधन है जो आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देता है। सेशेल्स जैसे द्वीपीय राष्ट्र के लिए — जो जलवायु परिवर्तन और समुद्र-स्तर वृद्धि से सर्वाधिक प्रभावित हैं — CDRI में शामिल होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मोदी की मॉरीशस PM से मुलाकात का क्या महत्व है?
प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मॉरीशस के PM डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात की, जो नवंबर 2024 के बाद उनकी चौथी द्विपक्षीय बैठक थी। बैठक में भारत-मॉरीशस उन्नत रणनीतिक साझेदारी, ब्लू इकोनॉमी और हिंद महासागर में शांति व स्थिरता पर चर्चा हुई।
राष्ट्र प्रेस
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