भारत यूरोप को रक्षा निर्यात में तीसरा सबसे बड़ा देश, ₹38,424 करोड़ का रिकॉर्ड: रक्षा सचिव
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि भारत अब यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। देश का रक्षा निर्यात अब तक के सर्वोच्च स्तर ₹38,424 करोड़ (लगभग 3.6 अरब यूरो) तक पहुँच गया है। यूरोप की 'रीआर्म यूरोप' पहल के तहत गोला-बारूद और रक्षा उपकरणों की बढ़ती माँग इस उछाल का मुख्य कारण बताई जा रही है।
रिकॉर्ड निर्यात और यूरोप की माँग
रक्षा सचिव ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में भारत यूरोप को रक्षा सामग्री निर्यात करने के मामले में तीसरे स्थान पर आ गया है। 'रीआर्म यूरोप' पहल के चलते मानक गोला-बारूद, तोप के गोले और बड़े-छोटे कैलिबर के गोला-बारूद की माँग में तेज़ वृद्धि हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का निर्यात केवल भारी शस्त्र प्रणालियों तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और छोटे हथियार भी शामिल हैं।
रक्षा विनिर्माण का विस्तृत आधार
राजेश कुमार सिंह ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है। देश में अब 16 बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियाँ, लगभग 840 बड़ी और मध्यम आकार की निजी कंपनियाँ, तथा स्टार्टअप समेत करीब 17,000 छोटे उद्यम सक्रिय हैं। इस विविध औद्योगिक ढाँचे का सीधा असर घरेलू रक्षा बिक्री पर भी दिख रहा है, जो अब लगभग 17 अरब यूरो तक पहुँच गई है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार ने रक्षा पूंजीगत व्यय के 20-25 अरब डॉलर के सालाना बजट का 75 प्रतिशत देश के भीतर खर्च करने का लक्ष्य रखा है। भारतीय डिजाइन, विकास और विनिर्माण (IDDM) उत्पादों को प्राथमिकता देकर तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा रही है।
आयात विविधीकरण और रूस पर निर्भरता में कमी
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत पहले रक्षा उपकरणों के लिए मुख्यतः रूस पर निर्भर था, लेकिन अब इस निर्भरता में काफी कमी आई है। रूस के बाद फ्रांस का भारत के रक्षा आयात में लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि इज़राइल की हिस्सेदारी भी लगभग इतनी ही है। फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत हुए हैं।
उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने ग्रीस और साइप्रस का दौरा किया। भारत इन दोनों देशों को नए रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, जो यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच बनाने के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण हैं।
संयुक्त उद्यम और 'मेक इन इंडिया' की शर्त
राजेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत यूरोपीय रक्षा खरीद कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए यूरोपीय देशों में भारतीय संयुक्त उद्यम स्थापित करने की योजना है। साथ ही, यूरोपीय कंपनियों को भारतीय रक्षा बाज़ार में प्रवेश के लिए 'मेक इन इंडिया' की शर्तों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित कई क्षेत्रों में नए अनुबंधों पर बातचीत जारी है।
आगे की राह: एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला
रक्षा सचिव ने उम्मीद जताई कि भारत और यूरोप के बीच प्रस्तावित साझेदारी समझौता दोनों क्षेत्रों के रक्षा विनिर्माताओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं को और एकीकृत करेगा। यदि यह समझौता साकार होता है, तो भारत केवल निर्यातक नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का एक अनिवार्य अंग बन सकता है।