2 नवंबर 2026
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भारत यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी: विदेश सचिव मिस्री ने अबू धाबी में रीम अल हाशमी से की बैठक

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भारत यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी: विदेश सचिव मिस्री ने अबू धाबी में रीम अल हाशमी से की बैठक

सारांश

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की अबू धाबी यात्रा और जयशंकर शेख अब्दुल्ला की मुंबई बैठक — भारत यूएई 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' अब व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे बहुआयामी क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ छू रही है, और पश्चिम एशिया की उथल पुथल के बीच यह साझेदारी और अधिक रणनीतिक महत्व रखती है।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 2 नवंबर 2026 को अबू धाबी में यूएई की विशेष दूत रीम अल हाशमी से मुलाकात की।
बैठक में भारत यूएई 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को गहरा करने के तरीकों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई।
इससे पहले 20 अक्टूबर को विदेश मंत्री जयशंकर और शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मुंबई में व्यापक बैठक की थी।
साझेदारी में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, रक्षा और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
यूएई में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने मिस्री का स्वागत किया; दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने बैठक की एक्स पर पुष्टि की।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 2 नवंबर 2026 को अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशमी से मुलाकात की। इस बैठक में भारत यूएई द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई और 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक गहरा करने के तौर तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तरीय कूटनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है।

बैठक का एजेंडा और प्रमुख चर्चाएँ

मिस्री और अल हाशमी ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों के सभी आयामों की समीक्षा की, बल्कि पश्चिम एशिया के बदलते घटनाक्रम और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान प्रदान किया। यूएई स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पुष्टि की कि दोनों पक्षों ने 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को और गहरा करने के रास्तों पर सोच विचार किया।

मिस्री के अबू धाबी पहुँचने पर यूएई में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने उनका स्वागत किया। यह दौरा विदेश सचिव की आधिकारिक यात्रा के रूप में आयोजित किया गया था।

जयशंकर शेख अब्दुल्ला बैठक की पृष्ठभूमि

इससे पहले 20 अक्टूबर को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके यूएई समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मुंबई में बैठक की थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने के नए अवसरों पर विमर्श किया।

जयशंकर ने उस बैठक के बाद एक्स पर लिखा, "यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। हमारे सहयोग का दायरा और महत्वाकांक्षा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखाई देती है। भारत यूएई संबंध, एक 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।"

यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी उस बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग का दायरा बढ़ाने और विकास व समृद्धि की साझा आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि शेख अब्दुल्ला का वह भारत दौरा जयशंकर की हालिया यूएई यात्रा के तुरंत बाद हुआ था।

साझेदारी का व्यापक दायरा

भारत यूएई 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, रक्षा और शिक्षा जैसे बहुआयामी क्षेत्र शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत खाड़ी क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को और मजबूत कर रहा है तथा पश्चिम एशिया की अस्थिर भू राजनीतिक स्थिति में स्थिर साझेदारियाँ बनाए रखने की दिशा में सक्रिय है।

यह Nवीं ऐसी उच्च स्तरीय बैठक है जो दर्शाती है कि दोनों देश महज औपचारिकताओं से आगे बढ़कर ठोस कार्यक्षेत्रों में सहयोग गहरा कर रहे हैं।

क्या होगा आगे

विदेश सचिव मिस्री की इस यात्रा से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में भारत यूएई के बीच कई क्षेत्रों में ठोस समझौते और कार्य योजनाएँ सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर मिस्री अल हाशमी — दर्शाती है कि नई दिल्ली खाड़ी में अपनी कूटनीतिक लय को तेज कर रही है। लेकिन 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' की भाषा जितनी महत्वाकांक्षी है, उतनी ही आम रही है — असली सवाल यह है कि व्यापार, ऊर्जा और रक्षा में इरादों को ठोस समझौतों में बदला कब जाएगा। पश्चिम एशिया की अस्थिरता भारत को एक अवसर और एक परीक्षा दोनों दे रही है — अपनी तटस्थता बनाए रखते हुए यूएई जैसे साझेदारों के साथ संबंध और गहरे करना। आने वाले महीनों में अगर ठोस क्षेत्रीय समझौते सामने नहीं आते, तो ये बैठकें केवल कूटनीतिक रिवायत बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की अबू धाबी यात्रा का उद्देश्य क्या था?
विक्रम मिस्री ने 2 नवंबर 2026 को अबू धाबी में यूएई की राज्य मंत्री रीम अल हाशमी से मुलाकात की, जिसमें भारत यूएई 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को और गहरा करने के तरीकों तथा पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार विमर्श हुआ। यह आधिकारिक यात्रा दोनों देशों के बीच चल रही उच्च स्तरीय कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।
भारत यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी में कौन कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
इस साझेदारी में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंध जैसे बहुआयामी क्षेत्र शामिल हैं। विदेश मंत्री जयशंकर के अनुसार, इस सहयोग का दायरा और महत्वाकांक्षा दोनों स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
जयशंकर और शेख अब्दुल्ला बिन जायद की मुंबई बैठक कब हुई थी?
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और यूएई के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की मुंबई में बैठक 20 अक्टूबर को हुई थी। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने के अवसरों पर चर्चा की गई।
भारत यूएई संबंधों में पश्चिम एशिया का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
पश्चिम एशिया के बदलते घटनाक्रम सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीय समुदाय और व्यापारिक हितों को प्रभावित करते हैं। यूएई इस क्षेत्र में भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है, इसलिए दोनों देश इन मुद्दों पर नियमित रूप से विचारों का आदान प्रदान करते हैं।
रीम अल हाशमी कौन हैं और भारत से उनका क्या संबंध है?
रीम अल हाशमी यूएई की राज्य मंत्री हैं और भारत के लिए यूएई की विशेष दूत के रूप में नियुक्त हैं। वे भारत यूएई उच्च स्तरीय संवाद में एक प्रमुख भूमिका निभाती हैं और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
राष्ट्र प्रेस
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