17 जुलाई 2026
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संशोधित उड़ान योजना: ₹28,840 करोड़ से 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड, क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मिलेगी रफ्तार

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संशोधित उड़ान योजना: ₹28,840 करोड़ से 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड, क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मिलेगी रफ्तार

सारांश

₹28,840 करोड़ की संशोधित उड़ान योजना सिर्फ एयरपोर्ट बनाने की कवायद नहीं — यह उन करोड़ों भारतीयों तक हवाई पहुँच पहुँचाने का दाँव है जो अब तक नक्शे से बाहर थे। 100 नए एयरपोर्ट, 200 हेलीपैड और 441 हवाई अड्डों को परिचालन सहायता — यह योजना भारत के विमानन इतिहास का सबसे बड़ा क्षेत्रीय विस्तार हो सकती है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने ₹28,840 करोड़ की संशोधित उड़ान योजना के तहत 100 नए एयरपोर्ट और 200 आधुनिक हेलीपैड निर्माण का प्रस्ताव रखा है।
एयरपोर्ट विकास के लिए ₹12,159 करोड़ का बजट, आठ वर्षों में लागू होगा।
देशभर में लगभग 441 हवाई अड्डों को ₹2,577 करोड़ की परिचालन एवं रखरखाव सहायता मिलेगी।
200 हेलीपैड के लिए ₹3,661 करोड़ , प्रत्येक हेलीपैड की लागत ₹15 करोड़ अनुमानित।
VGF के लिए ₹10,043 करोड़ का प्रावधान; एयरलाइनों को पाँच साल तक फंडिंग सहायता।
भारत में संचालित हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 15 जुलाई 2026 तक 165 हो गई है।

केंद्र सरकार ने ₹28,840 करोड़ की संशोधित उड़ान योजना के तहत देश के क्षेत्रीय शहरों को हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, जिसमें 100 नए हवाई अड्डों और 200 आधुनिक हेलीपैड के निर्माण की परिकल्पना की गई है। 17 जुलाई को जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, यह योजना भारत के विमानन क्षेत्र में एक और परिवर्तनकारी अध्याय जोड़ने की तैयारी में है।

योजना की पृष्ठभूमि और विकास-यात्रा

अक्टूबर 2016 में शुरू की गई क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS)–उड़ान का मूल उद्देश्य आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को किफायती और सुलभ बनाना था। इस पहल के परिणामस्वरूप देश में संचालित हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 15 जुलाई 2026 तक 165 हो गई है। आज भारत घरेलू विमानन बाज़ार के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के दूरदराज़ और पहाड़ी इलाकों में हवाई संपर्क की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

एयरड्रोम विकास: मुख्य घटनाक्रम

संशोधित उड़ान योजना के तहत अगले आठ वर्षों में मौजूदा बिना सेवा वाले एयरस्ट्रिप से 100 नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएँगे, जिसके लिए ₹12,159 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। इसके अलावा, छोटे एयरड्रोम की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तीन साल की अवधि के लिए परिचालन एवं रखरखाव सहायता दी जाएगी — प्रति एयरपोर्ट प्रति वर्ष ₹3.06 करोड़ और प्रति हेलीपोर्ट या वॉटर एयरड्रोम प्रति वर्ष ₹0.90 करोड़ की सीमा के साथ। इस मद में ₹2,577 करोड़ का प्रावधान है और इससे देशभर में लगभग 441 हवाई अड्डों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

हेलीपैड नेटवर्क और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच

जहाँ भौगोलिक बाधाओं के कारण पारंपरिक हवाई अड्डा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना संभव नहीं है, वहाँ योजना में 200 आधुनिक हेलीपैड निर्मित करने का प्रस्ताव है। प्रत्येक हेलीपैड की अनुमानित लागत ₹15 करोड़ है और इस मद में आठ वर्षों में कुल ₹3,661 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इन सुविधाओं से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बेहतर होने, आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार और प्रशासनिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

वायबिलिटी गैप फंडिंग और एयरलाइन सहायता

छोटे बाज़ारों में एयरलाइन परिचालन को व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए योजना में वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का प्रावधान जारी रखा गया है। दस वर्षों की अवधि में VGF के लिए ₹10,043 करोड़ प्रस्तावित हैं। एयरलाइनों को पाँच साल तक फंडिंग सहायता मिलेगी, जबकि तीसरे वर्ष से फंडिंग धीरे-धीरे घटाई जाएगी। रूट पर विशेष अधिकार (एक्सक्लूसिविटी) तीन साल तक सीमित रहेगी, ताकि बाज़ार विकास और व्यावसायिक आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बना रहे।

आत्मनिर्भर भारत और घरेलू विमान निर्माण

गौरतलब है कि संशोधित उड़ान योजना में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत घरेलू विमानन क्षमता को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। इसके तहत पवन हंस के लिए दो HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और अलायंस एयर के लिए दो HAL डॉर्नियर विमान शामिल करने का प्रस्ताव है। ये विमान कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी संचालन के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक ठोस कदम हैं। आने वाले वर्षों में इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार वास्तविक ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी और पारदर्शिता के साथ होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — 2016 से अब तक उड़ान के कई मार्गों पर एयरलाइनें VGF के बावजूद परिचालन बंद कर चुकी हैं। तीसरे वर्ष से फंडिंग घटाने की संरचना व्यावसायिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सही सोच है, लेकिन छोटे बाज़ारों में यात्री माँग उस गति से नहीं बढ़ती जिस गति से सब्सिडी घटाई जाती है। 441 हवाई अड्डों को परिचालन सहायता देने का प्रस्ताव स्वागतयोग्य है, पर यह सवाल अनुत्तरित है कि इनमें से कितने वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य होंगे और कितने सरकारी धन पर निर्भर बने रहेंगे।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संशोधित उड़ान योजना क्या है और इसका बजट कितना है?
संशोधित उड़ान योजना केंद्र सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना का नया चरण है, जिसके लिए ₹28,840 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसका लक्ष्य देश के अल्प-सेवित और असेवित क्षेत्रों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड बनाना है।
उड़ान योजना के नए चरण में कितने एयरपोर्ट बनाए जाएँगे और कब तक?
संशोधित उड़ान योजना के तहत अगले आठ वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएँगे, जिसके लिए ₹12,159 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। ये एयरपोर्ट मौजूदा बिना सेवा वाले एयरस्ट्रिप को उन्नत करके बनाए जाएँगे।
वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) क्या है और एयरलाइनों को कितनी मदद मिलेगी?
VGF एक सरकारी वित्तीय सहायता तंत्र है जो छोटे और कम लाभकारी मार्गों पर एयरलाइन परिचालन को व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनाता है। संशोधित उड़ान योजना में दस वर्षों की अवधि में VGF के लिए ₹10,043 करोड़ का प्रावधान है और एयरलाइनों को पाँच साल तक फंडिंग सहायता मिलेगी।
200 हेलीपैड किन इलाकों में बनाए जाएँगे और इनसे क्या फायदा होगा?
200 आधुनिक हेलीपैड उन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बनाए जाएँगे जहाँ भौगोलिक बाधाओं के कारण पारंपरिक हवाई अड्डा निर्माण संभव नहीं है। इनसे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, आपातकालीन प्रतिक्रिया और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
उड़ान योजना शुरू होने के बाद से भारत में कितने एयरपोर्ट बढ़े हैं?
2014 में भारत में केवल 74 हवाई अड्डे संचालित थे, जो 15 जुलाई 2026 तक बढ़कर 165 हो गए हैं। इस विस्तार में उड़ान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आज भारत घरेलू विमानन बाज़ार में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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