बाकू में भारतीय दूतावास का 'बिहार दिवस': नालंदा से मखाना तक, अजरबैजान में बिहार की विरासत की झलक
सारांश
मुख्य बातें
अजरबैजान की राजधानी बाकू स्थित भारतीय दूतावास ने 14 अगस्त 2026 को 'बिहार दिवस' का भव्य आयोजन किया, जिसमें बिहार की सभ्यतागत विरासत, पर्यटन संभावनाओं, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में अजरबैजान में भारत के राजदूत अभय कुमार ने बिहार को भारतीय सभ्यता की आत्मा बताते हुए वैश्विक समुदाय को इस राज्य की विविध धरोहर से परिचित कराया।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए
समारोह में विभिन्न देशों के राजदूत, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी, कारोबारी जगत के लोग, मीडियाकर्मी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही अजरबैजान के नागरिकों ने भी इस उत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
राजदूत अभय कुमार का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजदूत अभय कुमार ने बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बिहार बौद्ध और जैन धर्म की जन्मभूमि है और प्राचीन मगध साम्राज्य का केंद्र रहा है। उन्होंने नालंदा — विश्व के प्राचीनतम शिक्षा केंद्रों में से एक — और बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर का विशेष उल्लेख किया, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
दूतावास की ओर से जारी बयान के अनुसार, अभय कुमार ने सम्राट अशोक, आर्यभट्ट, चाणक्य, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जयप्रकाश नारायण जैसी महान विभूतियों से बिहार के ऐतिहासिक संबंध को भी याद किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों से बिहार को इतिहास, आध्यात्मिकता, संस्कृति और पर्यटन के अनूठे केंद्र के रूप में जानने का आह्वान किया।
फैशन शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण एक फैशन शो रहा, जिसमें अजरबैजान के नागरिकों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली पारंपरिक भारतीय पोशाकें पहनकर प्रस्तुति दी। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की भरपूर सराहना की। इसके अलावा बिहार की संगीत परंपराओं से प्रेरित संगीत और नृत्य कार्यक्रम ने समारोह में और रंग भर दिया।
बिहारी व्यंजन और विशेष उत्पाद
अतिथियों को भारत के अंतरराष्ट्रीय शेफ द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए पारंपरिक बिहारी व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिला। नमकीन पकवानों से लेकर मिठाइयों तक, सभी को मेहमानों ने खूब पसंद किया। कार्यक्रम में मखाना, भागलपुरी सिल्क, मधुबनी पेंटिंग और दाल चादर जैसे बिहार के विशिष्ट उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया, जिनके माध्यम से राज्य की कृषि, हस्तशिल्प और वस्त्र परंपराओं की समृद्धि को उजागर किया गया।
दूतावास का उद्देश्य और आगे की राह
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने बयान में कहा कि यह आयोजन अजरबैजान में भारत की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने और दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक समझ तथा आपसी संपर्क को मजबूत करने के दूतावास के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। दूतावास के अनुसार, कार्यक्रम को मिली व्यापक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि अजरबैजान के नागरिकों और व्यापक राजनयिक समुदाय में भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर को जानने की गहरी रुचि है। यह आयोजन भारत-अजरबैजान सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ।