मिथिला पेंटिंग की शंघाई में धूम: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय वाणिज्य दूतावास ने आयोजित की मधुबनी कार्यशाला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वाणिज्य दूतावास, शंघाई ने 10 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें भारतीय प्रवासी समुदाय और चीन में 'भारत के दोस्त' के 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व शंघाई में भारत के महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर ने किया।
कार्यशाला का आयोजन और उद्देश्य
भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्यशाला चीन में चल रहे स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ के समारोहों का हिस्सा थी। दूतावास ने लिखा, 'महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर के नेतृत्व वाली टीम सीजीआई, शंघाई ने पारंपरिक भारतीय कला मधुबनी को समर्पित एक इंटरैक्टिव कार्यशाला का आयोजन किया।'
उद्घाटन संबोधन में महावाणिज्यदूत ने भारत की लोक और सांस्कृतिक परंपराओं की अहम भूमिका को रेखांकित किया — विशेष रूप से उनकी उस क्षमता को, जो देश की अनूठी पहचान को जीवंत रखती है और प्रवासी समुदाय को एकसूत्र में बाँधती है।
मधुबनी कला की जड़ें और वैश्विक पहचान
महावाणिज्यदूत माथुर ने इस अवसर पर विशेष रूप से रेखांकित किया कि मधुबनी कला की उत्पत्ति बिहार के मिथिला क्षेत्र से हुई है, जिसका भारत के सभ्यतागत इतिहास और सांस्कृतिक विरासत में अनूठा स्थान है। हाथ से बनाई गई इस शैली में गहरी रेखाओं, बारीक डिजाइन और प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है, जो मनुष्य और प्रकृति के बीच के गहरे संबंध को दर्शाती है।
हाल के वर्षों में इस कला को वैश्विक मंच पर व्यापक पहचान मिली है। अपने एक विदेश दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विक्टोरिया के गवर्नर जनरल को उपहार में एक मधुबनी पेंटिंग और 'मार्बल इनले वर्क बॉक्स' भेंट किया था — जिसमें हरे-भरे पेड़ों और पत्तों के बीच एक मोर को चित्रित किया गया था। मोर सौंदर्य, खुशहाली और संतुलन का प्रतीक है, जबकि वृक्ष जीवन और प्रकृति-संरक्षण का संदेश देता है।
युवा चीनी छात्रों की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान महावाणिज्यदूत माथुर को शंघाई जिंसाई इंटरनेशनल स्कूल के युवा छात्रों हान और लियू से मिलकर उन्हें सम्मानित करने का अवसर मिला। ये दोनों छात्र छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत हाल ही में भारत आए थे और अब एक नवाचारी तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य मधुबनी जैसी पारंपरिक भारतीय कला के प्रति चीन में जागरूकता और समझ बढ़ाना है।
सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश
पीढ़ियों से चली आ रही मधुबनी कला न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्रकृति के प्रति सम्मान को व्यक्त करती है, बल्कि यह बिहार के कलाकारों और उनके समुदायों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण आधार है। शंघाई में इस कार्यशाला का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत सांस्कृतिक कूटनीति को विदेश नीति के एक सशक्त उपकरण के रूप में अपना रहा है।
आने वाले समय में इस तरह के और आयोजनों की संभावना है, जो भारत-चीन जन-संपर्क को कला और संस्कृति के माध्यम से और गहरा कर सकते हैं।