इंदौर में 13 साल की नाबालिग की 42 वर्षीय से शादी रोकी, दादा-दादी समेत 13 पर FIR

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इंदौर में 13 साल की नाबालिग की 42 वर्षीय से शादी रोकी, दादा-दादी समेत 13 पर FIR

सारांश

इंदौर के राऊ इलाके में 13 साल की नाबालिग को 42 वर्षीय से ब्याहने की कोशिश नाकाम हुई — और खुद दादा-दादी पर आरोप है। माँ की शिकायत पर पुलिस ने 13 लोगों पर FIR दर्ज की, जिनमें पंडित और रिश्तेदार भी शामिल हैं।

मुख्य बातें

इंदौर के राऊ इलाके में 21 मई 2026 को 13 वर्षीय नाबालिग की 42 वर्षीय व्यक्ति से शादी पुलिस ने रोकी।
लड़की की माँ की शिकायत पर मामला दर्ज; आरोप है कि दादा-दादी जबरदस्ती शादी करा रहे थे।
आरोपी नाबालिग को उज्जैन के एक मंदिर में विवाह कराने की योजना बना रहे थे।
डीसीपी नरेंद्र रावत के नेतृत्व में पुलिस ने दूल्हे, परिजनों, पंडित सहित कुल 13 लोगों पर FIR दर्ज की।
नाबालिग फिलहाल बाल कल्याण समिति की निगरानी में सुरक्षित संरक्षण में है।

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित राऊ इलाके में 21 मई 2026 को पुलिस और बाल विवाह विरोधी उड़नदस्ता टीम ने एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़की की 42 वर्षीय व्यक्ति से हो रही शादी को समय रहते रोक दिया। लड़की की माँ की शिकायत पर पुलिस ने दूल्हे, दुल्हन के परिजनों और आयोजन में शामिल अन्य लोगों सहित कुल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

मुख्य घटनाक्रम

बाल विवाह रोकथाम उड़नदस्ता टीम को सूचना मिलते ही पुलिस दल तत्काल मौके पर पहुँचा और विवाह संपन्न होने से पहले ही परिवार को रोका गया। इंदौर के डीसीपी नरेंद्र रावत ने बताया कि उस समय परिवार के सदस्यों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया और उन्हें स्पष्ट किया गया कि यह विवाह कानूनन दंडनीय अपराध है।

डीसीपी रावत के अनुसार, शुरुआत में परिवार ने विवाह न करने पर सहमति जताई, परंतु कुछ समय बाद उन्होंने पुनः शादी की तैयारियाँ शुरू कर दीं। जैसे ही यह सूचना पुलिस को मिली, तत्काल कार्रवाई कर विवाह रुकवा दिया गया और नाबालिग लड़की को सुरक्षित संरक्षण में ले लिया गया।

दादा-दादी पर गंभीर आरोप

लड़की की माँ ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बताया कि दादा-दादी इस शादी को जबरदस्ती करवाने पर आमादा थे, जबकि वह स्वयं इसके सख्त खिलाफ थीं। आरोप है कि दादा-दादी नाबालिग को उज्जैन ले जाकर एक मंदिर में विवाह संपन्न कराने की योजना बना रहे थे।

यह मामला इस लिहाज से भी गंभीर है कि परिवार के भीतर ही नाबालिग की सुरक्षा को लेकर विरोधाभास था — एक तरफ माँ बेटी की रक्षा के लिए पुलिस के पास पहुँची, तो दूसरी तरफ दादा-दादी विवाह कराने पर अड़े रहे।

13 लोगों पर केस दर्ज

डीसीपी नरेंद्र रावत ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह के मामलों में केवल परिजन ही नहीं, बल्कि आयोजन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति कानूनी रूप से जिम्मेदार होता है। इसी आधार पर इस प्रकरण में दूल्हा, दुल्हन के परिवार के सदस्य, पंडित और अन्य रिश्तेदारों सहित कुल 13 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।

कानूनी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह कराना दंडनीय अपराध है। इस कानून के अंतर्गत विवाह कराने वाले, उसमें सहयोग करने वाले और समारोह में भाग लेने वाले सभी पर कार्रवाई का प्रावधान है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में बाल विवाह के मामले राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज किए जाते रहे हैं।

आगे की कार्रवाई

नाबालिग लड़की फिलहाल सुरक्षित संरक्षण में है और बाल कल्याण समिति उसकी देखभाल की निगरानी कर रही है। आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में आगे की जाँच जारी है। पुलिस का यह कदम जिले में बाल विवाह रोकथाम के प्रति सख्त संदेश देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उड़नदस्ता टीमों की सक्रियता सराहनीय है — लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे मामले सूचना मिलने पर ही क्यों सामने आते हैं, न कि निगरानी तंत्र से।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर में नाबालिग बाल विवाह मामला क्या है?
इंदौर के राऊ इलाके में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की की शादी 42 वर्षीय व्यक्ति से कराई जा रही थी, जिसे पुलिस और बाल विवाह विरोधी उड़नदस्ता टीम ने 21 मई 2026 को समय रहते रोक दिया। लड़की की माँ की शिकायत पर दादा-दादी समेत 13 लोगों पर FIR दर्ज की गई है।
इस मामले में कितने लोगों पर केस दर्ज हुआ और क्यों?
कुल 13 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, जिनमें दूल्हा, दुल्हन के परिजन, पंडित और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत आयोजन में शामिल हर व्यक्ति को जिम्मेदार माना जाता है।
दादा-दादी पर क्या आरोप हैं?
लड़की की माँ ने शिकायत दर्ज कराई कि दादा-दादी जबरदस्ती यह शादी करवाना चाहते थे। आरोप है कि वे नाबालिग को उज्जैन ले जाकर एक मंदिर में विवाह संपन्न कराने की योजना बना रहे थे।
नाबालिग लड़की अभी कहाँ है?
पुलिस ने नाबालिग को सुरक्षित संरक्षण में ले लिया है और वह अभी बाल कल्याण समिति की निगरानी में है। उसकी देखभाल और आगे की कार्रवाई समिति द्वारा की जा रही है।
भारत में बाल विवाह पर क्या कानून है?
भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह कराना दंडनीय अपराध है। इस कानून में विवाह कराने वाले, सहयोग करने वाले और समारोह में शामिल होने वाले सभी पर कार्रवाई का प्रावधान है।
राष्ट्र प्रेस
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