औरैया में दो बहनों का बाल विवाह रोका गया, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की सूचना पर प्रशासन ने की त्वरित कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल कल्याण समिति की संयुक्त कार्रवाई से दो नाबालिग बहनों का बाल विवाह 19 मई को समय रहते रोक दिया गया। थाना ऐरवाकटरा क्षेत्र के एक गाँव में होने वाले इस विवाह की सूचना हेल्पलाइन के ज़रिए मिलते ही संरक्षण अधिकारी रीना चौहान के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम मौके पर पहुँची और जाँच शुरू की।
मामले का घटनाक्रम
जाँच में सामने आया कि एक बहन की उम्र अभिलेखों में 18 वर्ष दर्ज थी, किंतु जिस लड़के से उसका विवाह तय था, उसकी आयु 17 वर्ष 4 माह पाई गई। दूसरी बहन की उम्र मात्र 14 वर्ष 11 दिन निकली। इस प्रकार दोनों विवाह बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत अवैध घोषित किए गए।
रेस्क्यू टीम ने परिजनों को कानून की विस्तृत जानकारी दी और स्पष्ट किया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
सरकार की प्रतिक्रिया
महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक सी. इंदुमती ने बताया कि सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा, 'हमारा उद्देश्य केवल बाल विवाह रोकना ही नहीं, बल्कि बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।'
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति निरंतर जागरूक किया जा रहा है और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
मुख्यमंत्री की नीति और प्रशासनिक सक्रियता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि बाल विवाह, महिला उत्पीड़न और बाल श्रम जैसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। इसी नीति का परिणाम है कि प्रशासनिक टीमें संवेदनशील मामलों में तत्काल कार्रवाई कर रही हैं।
गौरतलब है कि यह मामला उत्तर प्रदेश में बाल विवाह के विरुद्ध बढ़ती प्रशासनिक सजगता को दर्शाता है, जहाँ हेल्पलाइन-आधारित सूचना तंत्र ज़मीनी स्तर पर प्रभावी साबित हो रहा है।
आम जनता पर असर
इस कार्रवाई ने न केवल दो बेटियों के जीवन और शिक्षा के अधिकार को सुरक्षित किया, बल्कि ग्रामीण समाज में कानून के प्रति जागरूकता का भी संदेश दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि 1098 हेल्पलाइन जैसे सामुदायिक माध्यम बाल संरक्षण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, बशर्ते जागरूकता का दायरा और बढ़ाया जाए।
क्या होगा आगे
अधिकारियों के अनुसार, दोनों बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाल कल्याण समिति आगे की कार्रवाई करेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह की किसी भी सूचना पर त्वरित हस्तक्षेप जारी रहेगा।