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आईएनएस सुदर्शिनी का 'लोकायन-26' अभियान पूरा: 10 महीने, 22,000 समुद्री मील, 11 देश

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आईएनएस सुदर्शिनी का 'लोकायन-26' अभियान पूरा: 10 महीने, 22,000 समुद्री मील, 11 देश

सारांश

10 महीने, 22,000 से अधिक समुद्री मील और चार महाद्वीपों के जलमार्गों को पार करते हुए आईएनएस सुदर्शिनी ने 'लोकायन-26' अभियान पूरा किया। यह यात्रा भारतीय नौसेना की नौकायन विरासत, युवा अधिकारियों के प्रशिक्षण और वैश्विक समुद्री कूटनीति का एक अनूठा संगम थी।

मुख्य बातें

आईएनएस सुदर्शिनी ने 2 नवंबर 2026 को 'लोकायन-26' अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर कोच्चि में प्रवेश किया।
अभियान में 10 महीनों में 22,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की गई; 11 देशों के 17 बंदरगाहों पर पहुँचा।
अटलांटिक महासागर में 18 दिनों में 2,200 समुद्री मील केवल पाल के सहारे — पूरे अभियान की सर्वाधिक दूरी।
मोरक्को, पुर्तगाल, इटली, मिस्र और स्पेन की नौसेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर सहयोग।
फ्रांस के 'एस्केल आ सेट' महोत्सव और अमेरिका के 'सेल-250' समारोह में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व।
वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने चालक दल की 'असाधारण धैर्य और पेशेवर दक्षता' के लिए प्रशंसा की।

भारतीय नौसेना का पारंपरिक नौकायन पोत आईएनएस सुदर्शिनी अपना ऐतिहासिक 'लोकायन-26' अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर 2 नवंबर 2026 को कोच्चि लौट आया। 10 महीनों में 22,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय करते हुए इस पोत ने एशिया, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के जलमार्गों से होते हुए 11 देशों के 17 बंदरगाहों पर भारतीय तिरंगे को फहराया। इस दौरान पोत ने दो बार अटलांटिक महासागर को पार किया, जो इस अभियान की सबसे बड़ी समुद्री उपलब्धियों में से एक रही।

भव्य स्वागत और कमांडर की सराहना

कोच्चि बंदरगाह पर आईएनएस सुदर्शिनी के लौटने पर उसे वाटर कैनन की सलामी दी गई और नौसेना के बैंड ने पारंपरिक धुनों के साथ चालक दल का जोरदार स्वागत किया। दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना इस अवसर पर उपस्थित रहे। उन्होंने अभियान को सफल बनाने वाले सभी अधिकारियों और नाविकों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

वाइस एडमिरल सक्सेना ने कहा कि चालक दल ने 'असाधारण धैर्य, पेशेवर दक्षता और कर्तव्य के प्रति अडिग समर्पण' का परिचय दिया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारतीय नौसेना की नौकायन परंपरा, समुद्री कौशल और परिचालन तैयारियों की जीवंत मिसाल है।

अभियान की शुरुआत और प्रमुख पड़ाव

आईएनएस सुदर्शिनी ने 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से 'लोकायन-26' अभियान की शुरुआत की थी। यात्रा के दौरान पोत फ्रांस के प्रतिष्ठित समुद्री विरासत महोत्सव 'एस्केल आ सेट' में शामिल हुआ। इसके अलावा अमेरिका में आयोजित 'सेल-250' समारोह और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक समीक्षा में भी भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व किया।

अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण और उल्लेखनीय पड़ाव अटलांटिक महासागर में रहा, जहाँ आईएनएस सुदर्शिनी ने केवल पाल के सहारे 18 दिनों में 2,200 समुद्री मील की दूरी तय की — पूरे अभियान में पालों की शक्ति से तय की गई यह सबसे लंबी एकल दूरी थी।

अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सहयोग

'लोकायन-26' के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने मोरक्को, पुर्तगाल, इटली, मिस्र और स्पेन की नौसेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियों में भाग लिया। विभिन्न देशों के नाविकों के साथ अनुभव साझा किए गए और एक-दूसरे की परिचालन कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला। यह अभियान भारत के 'महासागर' दृष्टिकोण और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को विश्व मंच पर प्रसारित करने का सशक्त माध्यम भी बना।

युवा अधिकारियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण

इस लंबी यात्रा का एक अहम उद्देश्य नौसेना के युवा प्रशिक्षु अधिकारियों को खुले महासागर में नौकायन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था। प्रशिक्षुओं ने दिशा निर्धारण, पाल संभालना, रस्सियों और उपकरणों का प्रयोग, मौसम आकलन तथा जहाज के दैनंदिन संचालन जैसे महत्वपूर्ण कौशल प्रत्यक्ष रूप से सीखे।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 'लोकायन-26' महज एक समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, समुद्री सहयोग और भारत की सांस्कृतिक-समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक सुविचारित राष्ट्रीय प्रयास था। 22,000 से अधिक समुद्री मील की यह यात्रा भारतीय नौसेना की नौकायन क्षमता और उसके नाविकों के अदम्य साहस की शानदार गवाह बन गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 मील की शुद्ध पाल-यात्रा यह दर्शाती है कि भारतीय नौसेना अपनी पारंपरिक नौकायन विरासत को आधुनिक परिचालन प्रशिक्षण के साथ जोड़ने में गंभीर है। पाँच यूरोपीय और अफ्रीकी नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास यह भी संकेत देते हैं कि भारत 'महासागर' दृष्टिकोण के तहत समुद्री साझेदारी को विस्तार दे रहा है — जो रणनीतिक दृष्टि से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कोई युद्धाभ्यास।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस सुदर्शिनी का 'लोकायन-26' अभियान क्या था?
'लोकायन-26' भारतीय नौसेना के पारंपरिक नौकायन पोत आईएनएस सुदर्शिनी का 10 महीने का वैश्विक समुद्री अभियान था, जो 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से शुरू हुआ था। इसमें एशिया, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में 11 देशों के 17 बंदरगाहों तक 22,000 से अधिक समुद्री मील की यात्रा शामिल थी।
आईएनएस सुदर्शिनी कोच्चि कब लौटा?
आईएनएस सुदर्शिनी 2 नवंबर 2026 को कोच्चि बंदरगाह पर लौटा। उसका स्वागत वाटर कैनन की सलामी और नौसेना बैंड की पारंपरिक धुनों से किया गया।
अभियान का सबसे कठिन पड़ाव कौन-सा रहा?
अटलांटिक महासागर इस अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ाव रहा, जहाँ पोत ने केवल पाल के सहारे 18 दिनों में 2,200 समुद्री मील की दूरी तय की। यह पूरे अभियान में पालों से तय की गई सबसे लंबी एकल दूरी थी।
'लोकायन-26' में किन देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोग हुआ?
अभियान के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने मोरक्को, पुर्तगाल, इटली, मिस्र और स्पेन की नौसेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियों में भाग लिया। इन नौसेनाओं के साथ अनुभव और कार्यप्रणाली का आदान-प्रदान किया गया।
इस अभियान से युवा नौसैनिक अधिकारियों को क्या लाभ मिला?
प्रशिक्षु नौसैनिक अधिकारियों को खुले महासागर में दिशा निर्धारण, पाल संभालना, मौसम आकलन और जहाज के दैनंदिन संचालन जैसे व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर मिला। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण कक्षाओं में संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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