20 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इस्मत चुगताई की 111वीं जयंती: 'लेडी चंगेज खां' जिन्होंने उर्दू साहित्य को नई दिशा दी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इस्मत चुगताई की 111वीं जयंती: 'लेडी चंगेज खां' जिन्होंने उर्दू साहित्य को नई दिशा दी

सारांश

21 अगस्त 1915 को बदायूं में जन्मीं इस्मत चुगताई ने उर्दू साहित्य में महिला अधिकार और धर्मनिरपेक्षता की आवाज़ उठाई। 'लेडी चंगेज खां' की उपाधि पाने वाली इस्मत आपा की 111वीं जयंती पर उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

मुख्य बातें

इस्मत चुगताई का जन्म 21 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था; 21 अगस्त 2026 को उनकी 111वीं जयंती है।
लेखिका कुर्रतुल ऐन हैदर ने उनकी बेबाक लेखनी के कारण उन्हें 'लेडी चंगेज खां' की उपाधि दी।
फिल्म 'गरम हवा' (1973) के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ लेखन पुरस्कार मिला।
उनकी कहानी 'लिहाफ' को माधुरी दीक्षित की फिल्म 'डेढ़ इश्किया' में रूपांतरित किया गया।
टेढ़ी लकीर , जिद्दी , एक कतरा ए खून सहित 10 प्रमुख उपन्यास उनकी साहित्यिक विरासत का हिस्सा हैं।
24 अक्टूबर 1991 को मुंबई में उनका निधन हुआ।

उर्दू साहित्य की निर्भीक आवाज़ इस्मत चुगताई की 21 अगस्त 2026 को 111वीं जयंती मनाई जा रही है। 21 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में जन्मी इस्मत चुगताई ने अपनी लेखनी से महिलाओं के अधिकार, धर्मनिरपेक्षता और आधुनिकता के सवालों को उर्दू गद्य में केंद्र में रखा। प्रगतिशील लेखक आंदोलन की अग्रणी हस्ती के रूप में उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

बचपन से कलम तक का सफर

इस्मत चुगताई ने बेहद कम उम्र में लेखन शुरू कर दिया था। परिवार ने उनके इस रुझान को रोकने की कोशिश की और समाज ने ताने दिए, लेकिन उनकी कलम नहीं रुकी। उनकी इसी अडिग जिद और बेबाक शैली के कारण प्रसिद्ध लेखिका कुर्रतुल ऐन हैदर ने उन्हें 'लेडी चंगेज खां' की उपाधि दी — एक ऐसा विशेषण जो उनकी साहित्यिक आक्रामकता और अदम्य साहस को रेखांकित करता है। स्नेह से उन्हें 'इस्मत आपा' भी कहा जाता था।

साहित्यिक योगदान और प्रमुख रचनाएँ

इस्मत चुगताई ने उर्दू कथा-साहित्य को कई यादगार उपन्यास और कहानियाँ दीं। उनके उपन्यासों में टेढ़ी लकीर, जिद्दी, एक कतरा ए खून, दिल की दुनिया, मासूमा, बहरूप नगर, सैदाई, जंगली कबूतर, अजीब आदमी और बांदी शामिल हैं। उनकी कहानी 'लिहाफ' ने अपने समय में व्यापक बहस छेड़ी और आज भी उर्दू साहित्य की क्लासिक रचनाओं में गिनी जाती है। यह ऐसे समय में आया जब महिला लेखकों का सामाजिक और यौन विषयों पर खुलकर लिखना दुर्लभ था।

फिल्म जगत से जुड़ाव

इस्मत चुगताई का हिंदी सिनेमा से भी गहरा नाता रहा। उनके पति शाहिद लतीफ फिल्म निर्देशक थे और उन्होंने इस्मत की कई कहानियों पर फिल्में बनाईं। वर्ष 1953 में आई फिल्म 'फरेब' में वे सह-निर्देशिका रहीं। उनकी कहानी पर आधारित फिल्म 'गरम हवा' (1973) को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ लेखन पुरस्कार मिला। इसके अलावा, उनकी कहानी 'लिहाफ' को माधुरी दीक्षित अभिनीत फिल्म 'डेढ़ इश्किया' में भी रूपांतरित किया गया।

विरासत और अंतिम समय

लंबी बीमारी के बाद 24 अक्टूबर 1991 को मुंबई स्थित अपने घर में इस्मत चुगताई का निधन हो गया। गौरतलब है कि उनके जाने के तीन दशक से भी अधिक समय बाद उनकी रचनाएँ विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों, साहित्यिक उत्सवों और फिल्म अध्ययन में निरंतर उद्धृत होती हैं — यही उनकी स्थायी प्रासंगिकता का प्रमाण है। उनकी 111वीं जयंती पर साहित्य प्रेमी उनकी उस विरासत को याद कर रहे हैं जिसने उर्दू गद्य में स्त्री-स्वर को एक नई भाषा दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि उनकी रचनाएँ पाठ्यक्रमों में कितनी जगह पाती हैं। 'लिहाफ' जैसी कहानी पर एक ज़माने में अश्लीलता का मुकदमा चला था — आज वही कहानी अकादमिक शोध का विषय है, लेकिन हिंदी-उर्दू साहित्य में महिला लेखकों को मिलने वाली केंद्रीय जगह अभी भी सीमित है। इस्मत आपा की विरासत केवल स्मरण नहीं, बल्कि उस परंपरा को आगे बढ़ाने की माँग करती है जो उन्होंने शुरू की थी।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस्मत चुगताई कौन थीं और उनका साहित्य में क्या योगदान है?
इस्मत चुगताई उर्दू साहित्य की प्रमुख नारीवादी और प्रगतिशील लेखिका थीं, जिन्होंने महिलाओं के अधिकार, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक स्वतंत्रता को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उनके उपन्यास और कहानियाँ आज भी उर्दू-हिंदी साहित्य में पढ़ी और पढ़ाई जाती हैं।
इस्मत चुगताई को 'लेडी चंगेज खां' क्यों कहा जाता था?
यह उपाधि प्रसिद्ध लेखिका कुर्रतुल ऐन हैदर ने इस्मत चुगताई को उनकी बेबाक, आक्रामक और निर्भीक लेखन शैली के कारण दी थी। यह नाम उनकी साहित्यिक दृढ़ता और सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ने के साहस का प्रतीक बन गया।
इस्मत चुगताई की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
उनके प्रमुख उपन्यासों में टेढ़ी लकीर, जिद्दी, एक कतरा ए खून, दिल की दुनिया, मासूमा, बहरूप नगर, सैदाई, जंगली कबूतर, अजीब आदमी और बांदी शामिल हैं। उनकी कहानी 'लिहाफ' उर्दू साहित्य की सर्वाधिक चर्चित रचनाओं में गिनी जाती है।
इस्मत चुगताई का फिल्म जगत से क्या संबंध था?
इस्मत चुगताई ने फिल्म 'गरम हवा' (1973) की कहानी लिखी, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ लेखन पुरस्कार मिला। वर्ष 1953 में फिल्म 'फरेब' में वे सह-निर्देशिका रहीं और उनके पति शाहिद लतीफ ने उनकी कई कहानियों पर फिल्में बनाईं।
इस्मत चुगताई का निधन कब और कहाँ हुआ?
लंबी बीमारी के बाद 24 अक्टूबर 1991 को मुंबई स्थित अपने घर में इस्मत चुगताई का निधन हुआ। उनका जन्म 21 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले