इटानगर में PRAC का 12 घंटे का बंद: कार्यालय खुले, दुकानें बंद; सियांग परियोजना विरोध तेज
सारांश
मुख्य बातें
पीपुल्स राइट्स एक्शन कमेटी (PRAC) द्वारा 4 नवंबर 2026 को इटानगर राजधानी क्षेत्र (ICR) में बुलाए गए 12 घंटे के बंद का असर मिला-जुला रहा — सरकारी कार्यालय सामान्य रूप से चलते रहे, जबकि दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वाहनों की आवाजाही तो जारी रही, लेकिन राजधानी की सड़कें काफी हद तक सुनसान दिखीं।
यह बंद मूलतः 23 अक्टूबर को हुए बांध-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की माँग को लेकर बुलाया गया था। प्रदर्शनकारी सियांग, पूर्वी सियांग और ऊपरी सियांग जिलों में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना (SUMP) के विरोध में सक्रिय हैं।
मुख्य घटनाक्रम
इटानगर राजधानी क्षेत्र (नाहरलागुन) के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बंद पूर्णतः शांतिपूर्ण रहा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की कोई सूचना नहीं मिली। उन्होंने बताया कि करीब 30 प्रदर्शनकारियों ने निरजुली के पास बागे तिनाली से इंदिरा गांधी पार्क, इटानगर की ओर मार्च करने का प्रयास किया, जिसे पुलिसकर्मियों ने शांतिपूर्वक रोक दिया।
एहतियात के तौर पर सिविल सचिवालय और लोक भवन सहित संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। बंद सुबह शुरू होकर शाम तक चला।
प्रदर्शनकारियों की माँगें
PRAC और संबद्ध संगठनों ने कई माँगें रखी हैं। पहली, 23 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए सभी लोगों की बिना शर्त और कानूनी रिहाई। दूसरी, परियोजना-प्रभावित गाँवों में तैनात अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के कर्मियों की तत्काल वापसी।
तीसरी माँग यह है कि प्रस्तावित SUMP के लिए पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (PFR) तैयार करने हेतु जारी सर्वेक्षण गतिविधियाँ तत्काल प्रभाव से निलंबित की जाएँ। इसके अलावा, बांध-विरोधी प्रदर्शनों के सिलसिले में जारी ग्राम प्रधानों के निलंबन आदेश रद्द करने की भी माँग है।
PRAC ने कुछ स्थानीय नागरिक मुद्दे भी उठाए हैं, जिनमें ICR में सड़कों का उचित रखरखाव, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और एम्बुलेंस सेवाओं में सुधार शामिल हैं।
आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी की पदयात्रा
इसी दौरान, आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी ने 4 नवंबर को ऊपरी सियांग जिले के गेकू से इटानगर की ओर एक लंबी पदयात्रा आरंभ की। यह पदयात्रा भी सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के विरोध में है। गौरतलब है कि यह मार्च उस बड़े जन-आंदोलन का हिस्सा है जो पिछले कुछ हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में उभरा है।
व्यापक पृष्ठभूमि
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर स्थानीय समुदायों और सरकार के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि बड़े बाँध परियोजनाओं से स्थानीय आदिवासी समुदायों की ज़मीन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान पर संकट आता है। प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती ने इस विरोध को और तीव्र कर दिया है।
आने वाले दिनों में PRAC की माँगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और गेकू से शुरू हुई पदयात्रा की दिशा यह तय करेगी कि यह आंदोलन और बड़ा रूप लेता है या नहीं।