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जागेश्वर महादेव मंदिर: अल्मोड़ा के देवदार वनों में बसा 2500 साल पुराना बाल शिव का पावन धाम

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जागेश्वर महादेव मंदिर: अल्मोड़ा के देवदार वनों में बसा 2500 साल पुराना बाल शिव का पावन धाम

सारांश

अल्मोड़ा के देवदार वनों में जटा गंगा के तट पर बसा श्री जागेश्वर महादेव मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है। यहाँ बाल शिव की उपासना होती है, स्कंद पुराण में इसका उल्लेख है, और 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था। श्रावण में मुख्यमंत्री धामी ने भी इसके दर्शन की अपील की।

मुख्य बातें

श्री जागेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में जटा गंगा नदी के तट पर स्थित है और लगभग 2500 वर्ष प्राचीन माना जाता है।
यहाँ शिव जी के बाल स्वरूप (बाल जागेश्वर) की पूजा होती है, जो इसे अन्य शैव तीर्थों से अलग बनाती है।
परिसर का सबसे पुराना मंदिर 8वीं सदी का मृत्युंजय मंदिर है; निर्माण कत्यूरी राजाओं द्वारा कराया गया था।
आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में यहाँ ध्यान किया और मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया।
मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 6 अगस्त को एक्स पर वीडियो साझा कर श्रावण में दर्शन की अपील की।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में देवदार के घने जंगलों और जटा गंगा नदी के तट पर स्थित श्री जागेश्वर महादेव मंदिर लगभग 2500 वर्ष प्राचीन माना जाता है। यह पावन धाम न केवल धार्मिक आस्था का अटूट केंद्र है, बल्कि अपनी अनुपम वास्तुकला के कारण देश-विदेश में विख्यात है। यहाँ शिव जी के बाल स्वरूप — बाल जागेश्वर — की पूजा की जाती है, जो इस तीर्थ को अन्य शैव स्थलों से विशिष्ट बनाती है।

मंदिर का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थल पर सप्तऋषियों ने दीर्घकाल तक तपस्या की थी। 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने केदारनाथ की यात्रा से पूर्व यहाँ ध्यान किया और इन मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया। गौरतलब है कि इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण सहित अनेक प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जो इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को प्रमाणित करता है।

निर्माण और वास्तुशिल्प

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का मूल निर्माण गुप्त काल के पश्चात और मध्यकाल से पूर्व कत्यूरी राजाओं द्वारा कराया गया था। परिसर का सबसे प्राचीन मंदिर 8वीं सदी का मृत्युंजय मंदिर है। इसके बाद जागेश्वर, नवदुर्गा, कालिका, पुष्टिदेवी और बालेश्वर सहित कई मंदिरों का निर्माण हुआ — ये सभी प्रारंभिक कत्यूरी शासकों की देन हैं।

परवर्ती कत्यूरी राजाओं ने 11वीं से 14वीं शताब्दी के मध्य सूर्य, नवग्रह और नीलकंठेश्वर मंदिरों का निर्माण करवाया। पाँच छोटे मंदिर गरुड़ ज्ञान चंद के शासनकाल से संबद्ध बताए जाते हैं। यह संपूर्ण परिसर भारतीय मंदिर-स्थापत्य की सदियों की यात्रा का जीवंत दस्तावेज़ है।

मुख्यमंत्री धामी की अपील

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार, 6 अगस्त को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंदिर का भव्य वीडियो साझा करते हुए लिखा: "अल्मोड़ा जिले के घने देवदार के जंगलों के बीच बसा, देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्री जागेश्वर महादेव मंदिर, एक बहुत ही मनमोहक तीर्थस्थल है जो लाखों भक्तों की अटूट आस्था का एक बड़ा केंद्र है।" उन्होंने श्रावण मास में श्रद्धालुओं से इस धाम के दर्शन का आग्रह किया।

श्रद्धालुओं के लिए महत्व

श्रावण के पवित्र महीने में यहाँ देशभर से लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। देवदार वनों की सघन छाँव, जटा गंगा का कलकल प्रवाह और प्राचीन शिवालयों की श्रृंखला इस स्थान को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट बनाती है। आने वाले समय में पर्यटन विभाग की ओर से इस धाम को और अधिक सुलभ बनाने की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी कवरेज अक्सर धार्मिक भावना तक सिमट जाती है — स्थापत्य और ऐतिहासिक गहराई पीछे छूट जाती है। कत्यूरी राजाओं से लेकर आदि शंकराचार्य तक की उपस्थिति यह बताती है कि यह स्थल उत्तर भारत के सांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। मुख्यमंत्री धामी की एक्स पोस्ट धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की रणनीति का हिस्सा लगती है, पर असली सवाल यह है कि इस विरासत के संरक्षण और बुनियादी ढाँचे पर ठोस निवेश कब होगा।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री जागेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में देवदार के घने जंगलों और जटा गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह अल्मोड़ा शहर से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर है।
जागेश्वर महादेव मंदिर कितना पुराना है?
यह मंदिर लगभग 2500 वर्ष प्राचीन माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसका निर्माण मुख्यतः गुप्त काल के बाद कत्यूरी राजाओं ने करवाया था।
जागेश्वर मंदिर में किसकी पूजा होती है?
यहाँ शिव जी के बाल स्वरूप की पूजा होती है, जिन्हें 'बाल जागेश्वर' कहा जाता है। यह विशेषता इस मंदिर को अन्य शैव तीर्थों से अलग पहचान देती है।
आदि शंकराचार्य का जागेश्वर से क्या संबंध है?
मान्यता है कि 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने केदारनाथ की यात्रा पर जाने से पूर्व यहाँ ध्यान किया था और मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया था।
जागेश्वर मंदिर का धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है?
हाँ, इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण सहित कई प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जो इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को प्रमाणित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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