जगुआर फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स संकट से निपटने को भारतीय वायुसेना ने शुरू की स्वदेशी इजेक्शन सीट विकास की मुहिम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना के जगुआर फाइटर जेट बेड़े पर स्पेयर पार्ट्स का गहरा संकट मंडरा रहा है — ठीक वैसा ही जैसा कभी मिग-21 के साथ हुआ था। वायुसेना के कैपेबिलिटी रोडमैप दस्तावेज के अनुसार, जगुआर विमानों में लगी मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीटों के 250 से अधिक स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति मूल उपकरण निर्माता ने बंद कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, आज की तारीख में भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो जगुआर फाइटर जेट का सक्रिय संचालन कर रहा है।
संकट की जड़: क्या है इजेक्शन सीट की समस्या
इजेक्शन सीट किसी भी लड़ाकू विमान का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण होती है। बर्ड हिट, इंजन फेलियर या अन्य तकनीकी खराबी की स्थिति में यही सीट पायलट को सुरक्षित विमान से बाहर निकालती है। मार्टिन-बेकर द्वारा 250 से अधिक पार्ट्स लाइनों की आपूर्ति बंद करने के बाद, इन सीटों में लगे अहम पुर्जों की निर्धारित सेवा-अवधि समाप्त होते ही विमान का उड़ान भरना संभव नहीं रहेगा।
गौरतलब है कि किसी भी एयरक्राफ्ट को उड़ान की अनुमति देने से पहले फॉर्म-700 प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य है, जिसमें प्रत्येक पुर्जे की कार्यक्षमता, एम्यूनिशन, सिस्टम स्थिति और ईंधन की मात्रा की जाँच की जाती है। यदि इस फॉर्म में किसी भी खराबी का उल्लेख हो, तो उड़ान की अनुमति नहीं दी जाती।
स्वदेशी समाधान की दिशा में वायुसेना के प्रयास
फिलहाल वायुसेना मौजूदा इजेक्शन सीटों की मरम्मत इन-हाउस कर रही है, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीटों के सटीक आकार, फिटिंग, कार्यक्षमता और सामग्री मानकों को पूरा करने वाला स्वदेशी विकल्प तैयार करना अब प्राथमिकता बन गई है। वायुसेना पार्ट्स की सेवा-अवधि पूरी होने से पहले ही यह समाधान विकसित करना चाहती है।
जगुआर बेड़े की मौजूदा स्थिति
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास जगुआर के 6 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें हाल ही में अपग्रेड किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वायुसेना की पुरानी फ्लीट तेज़ी से सेवामुक्त हो रही है — मिग-21 के विभिन्न वेरिएंट (बिस, टाइप-96, बाइसन) और मिग-27 पहले ही फेज आउट हो चुके हैं। मिग-29 2030 से चरणबद्ध सेवामुक्ति शुरू करेंगे, और उसके बाद मिराज-2000 के 3 स्क्वाड्रन तथा जगुआर के 6 स्क्वाड्रन भी इसी प्रक्रिया में शामिल होंगे। अनुमान है कि 2035 तक वायुसेना की पुरानी फाइटर फ्लीट लगभग पूरी तरह सेवामुक्त हो जाएगी।
तेजस और MRFA पर टिकी है उम्मीद
इस रिक्तता को भरने के लिए वायुसेना स्वदेशी तेजस मार्क-1ए और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद पर निर्भर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ कुल 220 तेजस फाइटर जेट की खरीद का अनुबंध हो चुका है। अब तक तेजस मार्क-1 के 38 विमान वायुसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है — जो एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।