8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जगुआर फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स संकट से निपटने को भारतीय वायुसेना ने शुरू की स्वदेशी इजेक्शन सीट विकास की मुहिम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जगुआर फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स संकट से निपटने को भारतीय वायुसेना ने शुरू की स्वदेशी इजेक्शन सीट विकास की मुहिम

सारांश

जगुआर — डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक का माहिर — अब उसी दुर्दशा में है जो कभी मिग-21 की थी। मार्टिन-बेकर ने 250+ पार्ट्स की आपूर्ति बंद की, और भारत दुनिया में इसे उड़ाने वाला आखिरी देश है। वायुसेना के पास अब एक ही रास्ता है — स्वदेशी समाधान, और वह घड़ी की सुइयों के साथ दौड़ रही है।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना के जगुआर बेड़े में मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीटों के 250 से अधिक स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति मूल निर्माता ने बंद कर दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब दुनिया का एकमात्र देश है जो जगुआर फाइटर जेट का सक्रिय संचालन कर रहा है।
वायुसेना फिलहाल इजेक्शन सीटों की मरम्मत इन-हाउस कर रही है और स्थायी स्वदेशी समाधान विकसित करने में जुटी है।
वायुसेना के पास जगुआर के 6 स्क्वाड्रन हैं; 2035 तक पुरानी फाइटर फ्लीट लगभग पूरी तरह सेवामुक्त हो जाएगी।
HAL के साथ 220 तेजस जेट का अनुबंध हुआ है, लेकिन 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हुई।

भारतीय वायुसेना के जगुआर फाइटर जेट बेड़े पर स्पेयर पार्ट्स का गहरा संकट मंडरा रहा है — ठीक वैसा ही जैसा कभी मिग-21 के साथ हुआ था। वायुसेना के कैपेबिलिटी रोडमैप दस्तावेज के अनुसार, जगुआर विमानों में लगी मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीटों के 250 से अधिक स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति मूल उपकरण निर्माता ने बंद कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, आज की तारीख में भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो जगुआर फाइटर जेट का सक्रिय संचालन कर रहा है।

संकट की जड़: क्या है इजेक्शन सीट की समस्या

इजेक्शन सीट किसी भी लड़ाकू विमान का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण होती है। बर्ड हिट, इंजन फेलियर या अन्य तकनीकी खराबी की स्थिति में यही सीट पायलट को सुरक्षित विमान से बाहर निकालती है। मार्टिन-बेकर द्वारा 250 से अधिक पार्ट्स लाइनों की आपूर्ति बंद करने के बाद, इन सीटों में लगे अहम पुर्जों की निर्धारित सेवा-अवधि समाप्त होते ही विमान का उड़ान भरना संभव नहीं रहेगा।

गौरतलब है कि किसी भी एयरक्राफ्ट को उड़ान की अनुमति देने से पहले फॉर्म-700 प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य है, जिसमें प्रत्येक पुर्जे की कार्यक्षमता, एम्यूनिशन, सिस्टम स्थिति और ईंधन की मात्रा की जाँच की जाती है। यदि इस फॉर्म में किसी भी खराबी का उल्लेख हो, तो उड़ान की अनुमति नहीं दी जाती।

स्वदेशी समाधान की दिशा में वायुसेना के प्रयास

फिलहाल वायुसेना मौजूदा इजेक्शन सीटों की मरम्मत इन-हाउस कर रही है, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीटों के सटीक आकार, फिटिंग, कार्यक्षमता और सामग्री मानकों को पूरा करने वाला स्वदेशी विकल्प तैयार करना अब प्राथमिकता बन गई है। वायुसेना पार्ट्स की सेवा-अवधि पूरी होने से पहले ही यह समाधान विकसित करना चाहती है।

जगुआर बेड़े की मौजूदा स्थिति

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास जगुआर के 6 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें हाल ही में अपग्रेड किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वायुसेना की पुरानी फ्लीट तेज़ी से सेवामुक्त हो रही है — मिग-21 के विभिन्न वेरिएंट (बिस, टाइप-96, बाइसन) और मिग-27 पहले ही फेज आउट हो चुके हैं। मिग-29 2030 से चरणबद्ध सेवामुक्ति शुरू करेंगे, और उसके बाद मिराज-2000 के 3 स्क्वाड्रन तथा जगुआर के 6 स्क्वाड्रन भी इसी प्रक्रिया में शामिल होंगे। अनुमान है कि 2035 तक वायुसेना की पुरानी फाइटर फ्लीट लगभग पूरी तरह सेवामुक्त हो जाएगी।

तेजस और MRFA पर टिकी है उम्मीद

इस रिक्तता को भरने के लिए वायुसेना स्वदेशी तेजस मार्क-1ए और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद पर निर्भर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ कुल 220 तेजस फाइटर जेट की खरीद का अनुबंध हो चुका है। अब तक तेजस मार्क-1 के 38 विमान वायुसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है — जो एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्तराधिकारी बेड़े की तैयारी पिछड़ती रही। मिग-21 के साथ भी यही हुआ था, और अब जगुआर उसी राह पर है। असली सवाल यह है कि 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में जो देरी हो रही है, वह इस रिक्तता को और कितना चौड़ा करेगी। स्वदेशी इजेक्शन सीट विकसित करना सराहनीय है, लेकिन बिना समयबद्ध डिलीवरी ढाँचे के यह भी एक और अधूरा वादा बनने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगुआर फाइटर जेट के स्पेयर पार्ट्स संकट की असल वजह क्या है?
मूल उपकरण निर्माता मार्टिन-बेकर ने जगुआर विमानों की इजेक्शन सीटों के 250 से अधिक स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति बंद कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब दुनिया का एकमात्र देश है जो जगुआर का संचालन कर रहा है, इसलिए निर्माता के लिए यह व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं रहा।
इजेक्शन सीट की खराबी से वायुसेना को क्या खतरा है?
इजेक्शन सीट पायलट की जान बचाने वाला सबसे अहम उपकरण है। जब इसके पुर्जों की निर्धारित सेवा-अवधि खत्म हो जाएगी और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं होंगे, तो संबंधित विमान को उड़ान की अनुमति नहीं दी जा सकेगी — जिससे जगुआर स्क्वाड्रन की परिचालन क्षमता सीधे प्रभावित होगी।
भारतीय वायुसेना इस समस्या से निपटने के लिए क्या कर रही है?
वायुसेना अभी इजेक्शन सीटों की मरम्मत इन-हाउस कर रही है। साथ ही, सीटों के सटीक आकार, फिटिंग और सामग्री मानकों को पूरा करने वाला स्वदेशी विकल्प विकसित करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।
2035 तक भारतीय वायुसेना की फाइटर फ्लीट में क्या बदलाव आएंगे?
मिग-21 के सभी वेरिएंट और मिग-27 पहले ही सेवामुक्त हो चुके हैं। मिग-29 2030 से, और उसके बाद मिराज-2000 के 3 स्क्वाड्रन व जगुआर के 6 स्क्वाड्रन चरणबद्ध तरीके से बाहर होंगे। 2035 तक पुरानी फाइटर फ्लीट लगभग पूरी तरह सेवामुक्त हो जाएगी।
तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में देरी क्यों चिंताजनक है?
HAL के साथ 220 तेजस जेट का अनुबंध हो चुका है, लेकिन 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हुई है। जगुआर और अन्य पुराने विमानों की सेवामुक्ति के साथ यह देरी वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या में बड़ी कमी ला सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले