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जगुआर फाइटर जेट्स के इजेक्शन सीट पार्ट्स संकट से जूझ रही वायुसेना, स्वदेशी समाधान की तलाश तेज

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जगुआर फाइटर जेट्स के इजेक्शन सीट पार्ट्स संकट से जूझ रही वायुसेना, स्वदेशी समाधान की तलाश तेज

सारांश

दुनिया में जगुआर उड़ाने वाला एकमात्र देश भारत अब उसी संकट में है जो कभी मिग-21 को ले डूबा था — स्पेयर पार्ट्स की कमी। मार्टिन-बेकर ने 250+ पार्ट्स लाइनें बंद कीं, इजेक्शन सीटें खतरे में हैं। वायुसेना स्वदेशी समाधान की दौड़ में है, और घड़ी की सुइयाँ तेज़ी से घूम रही हैं।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना के जगुआर फाइटर जेट्स में मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीट के 250 से अधिक स्पेयर पार्ट्स लाइनों की आपूर्ति बंद हो चुकी है।
रिपोर्टों के अनुसार भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो अभी भी जगुआर का परिचालन कर रहा है।
वायुसेना फिलहाल इजेक्शन सीटों की मरम्मत इन-हाउस कर रही है और स्थायी स्वदेशी समाधान विकसित करने में जुटी है।
2035 तक मिग-29, मिराज-2000 और जगुआर सहित पुराना लड़ाकू बेड़ा लगभग पूरी तरह फेज आउट हो जाएगा।
HAL के साथ 220 तेजस का अनुबंध है; 38 तेजस मार्क-1 शामिल हो चुके हैं, लेकिन 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी बाकी है।

भारतीय वायुसेना के जगुआर फाइटर जेट्स इस समय गंभीर स्पेयर पार्ट्स संकट का सामना कर रहे हैं — ठीक वैसे ही जैसे कभी मिग-21 बेड़े के साथ हुआ था। वायुसेना के कैपेबिलिटी रोडमैप दस्तावेज के अनुसार, रिपोर्टों के मुताबिक भारत अब दुनिया का एकमात्र देश है जो जगुआर विमान का परिचालन जारी रखे हुए है, और मूल उपकरण निर्माताओं ने आवश्यक पुर्जे आपूर्ति करने में असमर्थता व्यक्त कर दी है। पार्ट्स की जीवन-अवधि समाप्त होने से पहले ही वायुसेना स्वदेशी विकल्प तलाशने में जुट गई है।

मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीट संकट

वायुसेना के कैपेबिलिटी रोडमैप दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि जगुआर विमानों में लगी मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीटें अप्रचलन की समस्या से ग्रस्त हैं। निर्माता कंपनी ने 250 से अधिक स्पेयर पार्ट्स लाइनों की आपूर्ति करने में असमर्थता जताई है। इजेक्शन सीट किसी भी लड़ाकू विमान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण होती है — बर्ड हिट, इंजन फेलियर या किसी अन्य आपात स्थिति में यही सीट पायलट को सुरक्षित बाहर निकालती है।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, जब तक इन पार्ट्स का स्वदेशी विकल्प नहीं मिलता, तब तक निर्धारित जीवन-अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित विमानों को उड़ान की अनुमति देना संभव नहीं होगा। फिलहाल वायुसेना इन सीटों की मरम्मत इन-हाउस कर रही है, परंतु यह केवल अल्पकालिक उपाय है।

फॉर्म-700 और उड़ान सुरक्षा प्रोटोकॉल

रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी विमान को उड़ान से पहले व्यापक जाँच प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य है। प्रत्येक पार्ट की कार्यक्षमता, लगाए गए एम्यूनिशन, सभी सिस्टम की स्थिति और ईंधन की मात्रा — इन सभी की जाँच फॉर्म-700 में दर्ज की जाती है, जिस पर सभी जाँच अधिकारी हस्ताक्षर करते हैं।

यह फॉर्म पायलट को सौंपा जाता है और यदि इसमें कोई खराबी दर्ज हो, तो विमान को उड़ान की अनुमति नहीं मिलती। इजेक्शन सीट के पार्ट्स की अनुपलब्धता इसी प्रोटोकॉल के तहत परिचालन क्षमता को सीधे प्रभावित करती है।

वायुसेना का घटता पुराना बेड़ा

गौरतलब है कि मिग-21 बिस, मिग-21 टाइप-96, मिग-27 और मिग-21 बाइसन पहले ही सेवामुक्त हो चुके हैं। मिग-29 का चरणबद्ध सेवामुक्तिकरण 2030 से शुरू होगा। इसके बाद मिराज-2000 के 3 स्क्वाड्रन और जगुआर के 6 स्क्वाड्रन भी फेज-आउट की प्रक्रिया में आ जाएंगे। यानी 2035 तक वायुसेना का पुराना लड़ाकू बेड़ा लगभग पूरी तरह सेवानिवृत्त हो जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब वायुसेना पहले से ही स्क्वाड्रन संख्या के मोर्चे पर दबाव में है। जगुआर के 6 स्क्वाड्रन को हाल ही में अपग्रेड किया गया है, लेकिन पार्ट्स संकट इस अपग्रेड की उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

तेजस और MRFA पर टिकी उम्मीद

इस रिक्तता को भरने के लिए वायुसेना स्वदेशी तेजस मार्क-1ए और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद पर निर्भर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ कुल 220 तेजस की खरीद का अनुबंध हो चुका है। अब तक तेजस मार्क-1 के 38 विमान वायुसेना में शामिल किए जा चुके हैं, जबकि 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।

आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि वायुसेना इजेक्शन सीट के स्वदेशी विकल्प कितनी जल्दी विकसित कर पाती है और HAL तेजस की डिलीवरी समयसीमा पर खरी उतरती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब जगुआर उसी राह पर है। असली सवाल यह है कि HAL की तेजस मार्क-1ए डिलीवरी में देरी और MRFA प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार के बीच वायुसेना 2035 तक स्क्वाड्रन संख्या का संतुलन कैसे बनाए रखेगी। इजेक्शन सीट का स्वदेशी विकल्प तकनीकी रूप से जटिल है — सटीक आकार, सामग्री और सुरक्षा मानकों पर कोई समझौता संभव नहीं — और इसमें लगने वाला समय वायुसेना के पास शायद उतना नहीं है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगुआर फाइटर जेट्स में स्पेयर पार्ट्स संकट क्यों आया है?
मार्टिन-बेकर सहित मूल उपकरण निर्माताओं ने 250 से अधिक स्पेयर पार्ट्स लाइनों की आपूर्ति बंद कर दी है, क्योंकि भारत के अलावा दुनिया में कोई देश अब जगुआर का परिचालन नहीं करता। निर्माताओं के लिए इतने सीमित बाजार के लिए उत्पादन जारी रखना व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं रहा।
इजेक्शन सीट पार्ट्स की कमी से पायलट सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
इजेक्शन सीट विमान का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है जो आपात स्थिति में पायलट को सुरक्षित बाहर निकालती है। पार्ट्स की निर्धारित जीवन-अवधि समाप्त होने के बाद उन विमानों को उड़ान की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे परिचालन क्षमता सीधे प्रभावित होगी।
भारतीय वायुसेना इस समस्या से कैसे निपट रही है?
वायुसेना फिलहाल इजेक्शन सीटों की मरम्मत इन-हाउस कर रही है। साथ ही, वायुसेना के कैपेबिलिटी रोडमैप दस्तावेज के अनुसार, सटीक आकार, फिटिंग और सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाला स्थायी स्वदेशी समाधान विकसित करने पर काम जारी है।
जगुआर के बाद वायुसेना का बेड़ा कैसा दिखेगा?
2035 तक मिग-29, मिराज-2000 के 3 स्क्वाड्रन और जगुआर के 6 स्क्वाड्रन सेवामुक्त हो जाएंगे। इनकी जगह HAL के साथ अनुबंधित 220 तेजस (मार्क-1 और मार्क-1ए) और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट लेंगे।
तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी कब तक होगी?
अब तक तेजस मार्क-1 के 38 विमान वायुसेना में शामिल हो चुके हैं, लेकिन 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। डिलीवरी की सटीक समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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