मुंबई: शिवाजी पार्क में सीजेपी प्रदर्शन के दौरान 'जय श्री राम' नारेबाजी, पुलिस ने टाला टकराव
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर 2026 को सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) द्वारा आयोजित विरोध-प्रदर्शन के दौरान तब तनाव उत्पन्न हो गया, जब भगवा रंग के मफलर पहने कुछ अज्ञात लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे और 'जय श्री राम' के नारे लगाने लगे। मुंबई पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते दोनों समूहों के बीच किसी बड़े हिंसक टकराव को समय रहते टाल दिया गया।
प्रदर्शन का उद्देश्य और मुख्य मांगें
यह विरोध-प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित किया गया था। आयोजकों के अनुसार, बड़ी संख्या में युवक-युवतियों सहित कई प्रमुख व्यक्तित्व भी इस प्रदर्शन में सम्मिलित हुए।
प्रदर्शनकारियों ने तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की विस्तृत जाँच, और चुनाव आयोग अधिनियम 2023 को वापस लेना। गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध की आवाज़ें उठती रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे बिगड़ी स्थिति
प्रदर्शन के दौरान अचानक भगवा मफलर पहने कुछ लोगों का एक समूह कार्यक्रम स्थल पर पहुँचा और ज़ोर-शोर से 'जय श्री राम' के नारे लगाने लगा। इस अप्रत्याशित नारेबाजी से कुछ देर के लिए स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और दोनों समूह आमने-सामने आ खड़े हुए।
यह ऐसे समय में हुआ जब प्रदर्शन अपने चरम पर था और बड़ी संख्या में लोग एकत्रित थे। नारे लगाने वाले इन लोगों के किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़े होने की पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
पुलिस की प्रतिक्रिया
मौके पर पहले से तैनात मुंबई पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और दोनों समूहों के बीच घेराबंदी कर उन्हें अलग कर दिया। नारे लगाने वाले लोगों को प्रदर्शन स्थल से बाहर निकाला गया और व्यवस्था बहाल की गई।
पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखी, जिससे स्थिति नियंत्रण में आ गई और कोई हिंसक घटना नहीं घटी।
आम जनता और राजनीतिक प्रभाव
शिवाजी पार्क मुंबई का ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील स्थल रहा है। यहाँ इस तरह की घटना का व्यापक राजनीतिक संदेश हो सकता है, विशेषतः जब प्रदर्शन चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के विरुद्ध था।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह की प्रति-नारेबाजी से नागरिक समाज के प्रदर्शनों में व्यवधान की प्रवृत्ति चिंताजनक है। आगे इस मामले में पुलिस की जाँच से यह स्पष्ट हो सकता है कि नारे लगाने वाले समूह की पृष्ठभूमि क्या थी।