मुंबई: BJP ने CJP के ECI विरोध को बताया 'अराजक', कांग्रेस के इशारे पर प्रदर्शन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) द्वारा चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को लेकर 2 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक तनाव तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस विरोध प्रदर्शन को 'अराजक' करार देते हुए आरोप लगाया कि CJP भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के इशारे पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। वहीं CJP ने स्पष्ट किया कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रही है।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
BJP नेता राम कदम ने कहा, 'लोकतंत्र में हर दल को आंदोलन करने का अधिकार है। शिवाजी पार्क का मैदान चुनकर क्या CJP लोगों को परेशान करना चाहती है, क्योंकि वहाँ बगल में ही अस्पताल है। क्या वे मरीजों को तकलीफ पहुंचाना चाहते हैं? क्या मंशा है उनकी? आंदोलन करने की कई और जगह हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि CJP बिना किसी प्रमाण के देश की संवैधानिक संस्था को बदनाम करने पर तुली है और यह कांग्रेस के इशारे पर हो रहा है।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने और कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, 'यह विरोध प्रदर्शन नहीं है, यह एक अराजक आंदोलन है। यह अब एक राजनीतिक पार्टी बन गई है। अगर यह राजनीतिक पार्टी अपने दम पर अपनी राजनीति करती, तो कोई समस्या नहीं होती। लेकिन जिस तरह से एक-एक करके सभी संवैधानिक पदों को चुनौती दी जा रही है, भारत के आम लोगों को यह समझने की जरूरत है कि इसके बाद क्या हो सकता है।'
CJP का पक्ष
CJP नेता प्रणय अहीर ने BJP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संगठन को प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जबकि सत्ताधारी दलों को तुरंत अनुमति मिल जाती है। उनके शब्दों में, 'आम नागरिक के तौर पर हमें इजाजत लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन कुछ सत्ताधारी राजनीतिक दलों को सेकेंडों में इजाजत मिल जाती है। हम अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, फिर भी हमें इस बुनियादी चीज के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।'
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। दिपके ने कहा था, 'मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद सरकार तय कर रही है कि किसे वोट देने की अनुमति होगी और किसे नहीं। क्या ऐसी व्यवस्था को लोकतंत्र कहा जा सकता है।' उन्होंने यह भी कहा था कि ज्ञानेश कुमार देश के लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा हैं — एक ऐसा बयान जिसे BJP ने निराधार और संस्था-विरोधी करार दिया है।
आगे का रुख
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में चुनावी माहौल में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं। CJP और BJP के बीच इस टकराव से स्पष्ट है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और नागरिक समाज के अधिकारों को लेकर बहस आने वाले दिनों में और गहरी होगी।