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मुंबई: BJP ने CJP के ECI विरोध को बताया 'अराजक', कांग्रेस के इशारे पर प्रदर्शन का आरोप

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मुंबई: BJP ने CJP के ECI विरोध को बताया 'अराजक', कांग्रेस के इशारे पर प्रदर्शन का आरोप

सारांश

मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP के चुनाव आयोग-विरोधी प्रदर्शन पर BJP ने 'अराजक' और 'कांग्रेस-प्रायोजित' कहकर हमला बोला। मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और नेता राम कदम ने संस्था को बदनाम करने का आरोप लगाया, जबकि CJP ने संवैधानिक अधिकारों की दुहाई दी।

मुख्य बातें

CJP मुंबई में चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ शिवाजी पार्क में प्रदर्शन कर रही है।
BJP नेता राम कदम ने CJP पर कांग्रेस के इशारे पर प्रदर्शन करने और संवैधानिक संस्था को बदनाम करने का आरोप लगाया।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने CJP के आंदोलन को 'अराजक' करार दिया और कहा यह 'राजनीतिक पार्टी' बन गई है।
CJP नेता प्रणय अहीर ने कहा कि संगठन को अनुमति के लिए संघर्ष करना पड़ता है जबकि सत्ताधारी दलों को तुरंत मिलती है।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित करने का आरोप लगाया था।

मुंबई में सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) द्वारा चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को लेकर 2 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक तनाव तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस विरोध प्रदर्शन को 'अराजक' करार देते हुए आरोप लगाया कि CJP भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के इशारे पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। वहीं CJP ने स्पष्ट किया कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रही है।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया

BJP नेता राम कदम ने कहा, 'लोकतंत्र में हर दल को आंदोलन करने का अधिकार है। शिवाजी पार्क का मैदान चुनकर क्या CJP लोगों को परेशान करना चाहती है, क्योंकि वहाँ बगल में ही अस्पताल है। क्या वे मरीजों को तकलीफ पहुंचाना चाहते हैं? क्या मंशा है उनकी? आंदोलन करने की कई और जगह हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि CJP बिना किसी प्रमाण के देश की संवैधानिक संस्था को बदनाम करने पर तुली है और यह कांग्रेस के इशारे पर हो रहा है।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने और कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, 'यह विरोध प्रदर्शन नहीं है, यह एक अराजक आंदोलन है। यह अब एक राजनीतिक पार्टी बन गई है। अगर यह राजनीतिक पार्टी अपने दम पर अपनी राजनीति करती, तो कोई समस्या नहीं होती। लेकिन जिस तरह से एक-एक करके सभी संवैधानिक पदों को चुनौती दी जा रही है, भारत के आम लोगों को यह समझने की जरूरत है कि इसके बाद क्या हो सकता है।'

CJP का पक्ष

CJP नेता प्रणय अहीर ने BJP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संगठन को प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जबकि सत्ताधारी दलों को तुरंत अनुमति मिल जाती है। उनके शब्दों में, 'आम नागरिक के तौर पर हमें इजाजत लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन कुछ सत्ताधारी राजनीतिक दलों को सेकेंडों में इजाजत मिल जाती है। हम अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, फिर भी हमें इस बुनियादी चीज के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।'

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। दिपके ने कहा था, 'मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद सरकार तय कर रही है कि किसे वोट देने की अनुमति होगी और किसे नहीं। क्या ऐसी व्यवस्था को लोकतंत्र कहा जा सकता है।' उन्होंने यह भी कहा था कि ज्ञानेश कुमार देश के लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा हैं — एक ऐसा बयान जिसे BJP ने निराधार और संस्था-विरोधी करार दिया है।

आगे का रुख

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में चुनावी माहौल में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं। CJP और BJP के बीच इस टकराव से स्पष्ट है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और नागरिक समाज के अधिकारों को लेकर बहस आने वाले दिनों में और गहरी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना किसी साक्ष्य के लगाया गया है — और यही वह विरोधाभास है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है। नागरिक समाज संगठनों पर 'राजनीतिक एजेंट' का लेबल चस्पा करना एक जानी-पहचानी रणनीति है जो असहमति को वैधता से वंचित करती है। दूसरी तरफ, CJP का मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाया गया आरोप — कि सरकार तय कर रही है किसे वोट देने की अनुमति होगी — एक गंभीर संवैधानिक दावा है जिसे साक्ष्य-सहित सार्वजनिक मंच पर रखा जाना चाहिए। शिवाजी पार्क के पास अस्पताल का तर्क वैध नागरिक चिंता है, लेकिन इसका इस्तेमाल पूरे प्रदर्शन को 'अराजक' ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CJP मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रही है?
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मौजूदा व्यवस्था में सरकार तय कर रही है कि किसे वोट देने की अनुमति होगी, जिसे वे लोकतंत्र-विरोधी मानते हैं।
BJP ने CJP के प्रदर्शन पर क्या आरोप लगाए हैं?
BJP नेता राम कदम ने आरोप लगाया कि CJP कांग्रेस के इशारे पर यह प्रदर्शन कर रही है और बिना प्रमाण के संवैधानिक संस्था को बदनाम करना चाहती है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने इसे 'अराजक आंदोलन' बताया।
CJP के बारे में BJP की मुख्य आपत्ति शिवाजी पार्क को लेकर क्या है?
BJP नेता राम कदम ने कहा कि शिवाजी पार्क के बगल में एक अस्पताल है और वहाँ प्रदर्शन करने से मरीजों को असुविधा होती है। उनका सुझाव था कि आंदोलन के लिए अन्य स्थान चुने जा सकते थे।
CJP ने अनुमति को लेकर क्या सवाल उठाए हैं?
CJP नेता प्रणय अहीर ने आरोप लगाया कि उनके जैसे नागरिक संगठनों को प्रदर्शन की अनुमति के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है, जबकि BJP जैसे सत्ताधारी दलों को शिवाजी पार्क में कार्यक्रमों के लिए तुरंत अनुमति मिल जाती है। उन्होंने इसे संवैधानिक अधिकारों के साथ भेदभाव बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा था कि ज्ञानेश कुमार देश के लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा हैं और उन पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में मतदान प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ा है। BJP ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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