जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म: ३५०० किलो मेहंदी से अविवाहित भक्तों की मनोकामना पूरी होने की मान्यता
सारांश
मुख्य बातें
गणेश चतुर्थी की पूर्वसंध्या पर जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में परंपरागत सिंधारा (सिंजारा) रस्म के लिए 13 सितंबर 2026 को बड़ी संख्या में अविवाहित युवा पंक्तिबद्ध होने लगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस अवसर पर भक्तों को प्रसाद के रूप में ३५०० किलो मेहंदी वितरित की जाएगी, जो विवाह की कामना रखने वालों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है।
सिंधारा रस्म की परंपरा और महत्व
सिंधारा जयपुर की सदियों पुरानी लोक परंपरा है, जिसमें परिवार में जन्म या विवाह के शुभ अवसर पर नए वस्त्र और मेहंदी अर्पित की जाती है। मंदिर में यह रस्म गणेश चतुर्थी से एक दिन पूर्व मनाई जाती है, जब भगवान गणेश को नई पोशाक और मुकुट धारण कराकर मेहंदी चढ़ाई जाती है। यह उत्सव राजस्थानी संस्कृति में सामूहिक श्रद्धा और उत्सव का प्रतीक माना जाता है।
पुजारी ने बताई पूजा विधि और मनोकामना की मान्यता
मंदिर के पुजारी अभिषेक शर्मा ने बताया, 'मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म शाम ६:३० बजे से मनाया जाएगा। आज शाम भगवान को नई पोशाक और मुकुट धारण कराया जाएगा। जिसके बाद प्रसाद रूपी मेहंदी वितरण की जाएगी। भगवान को चढ़ाए जाने के बाद मेहंदी भक्तजनों को दी जाती है।'
पुजारी अभिषेक शर्मा ने आगे बताया कि मान्यता है कि भक्त जो भी मनोकामना लेकर आते हैं, वह पूरी हो जाती है। उन्होंने कहा, 'मेहंदी का संबंध विवाह से होता है, इसलिए जो विवाह करने की सोच रहे हैं और जिनका विवाह काफी समय से नहीं हुआ है और जो विवाह योग्य हैं, अगर वे हाथों पर ये मेहंदी रचाते हैं, तो माना जाता है कि एक वर्ष के अंदर विवाह संपन्न हो जाता है।'
३५०० किलो मेहंदी, ८ स्थानों पर वितरण
मंदिर प्रशासन ने इस वर्ष ३५०० किलो मेहंदी की व्यवस्था की है। पुजारी शर्मा के अनुसार ८ अलग-अलग स्थानों पर मेहंदी वितरित की जाएगी ताकि अधिक से अधिक भक्त प्रसाद प्राप्त कर सकें। मंदिर परिसर में सुबह से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा।
गणेश चतुर्थी की तैयारी
14 सितंबर 2026 को देशभर में गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह ११:०२ बजे से दोपहर १:३१ बजे तक रहेगा। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। यह पर्व सुख, शांति, समृद्धि और जीवन के संकटों से मुक्ति के लिए भगवान गणेश की आराधना को समर्पित है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है और प्रत्येक वर्ष गणेश चतुर्थी पर यहाँ लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। इस वर्ष सिंधारा रस्म का व्यापक प्रबंध इस बात का संकेत है कि परंपरागत आस्था आज भी युवा पीढ़ी में जीवित है। आने वाले दिनों में गणेश उत्सव के दौरान जयपुर में धार्मिक गतिविधियाँ और तेज होने की संभावना है।