13 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म: ३५०० किलो मेहंदी से अविवाहित भक्तों की मनोकामना पूरी होने की मान्यता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म: ३५०० किलो मेहंदी से अविवाहित भक्तों की मनोकामना पूरी होने की मान्यता

सारांश

जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी की पूर्वसंध्या पर सिंधारा रस्म के दौरान ३५०० किलो मेहंदी बाँटी जाएगी। मान्यता है कि यह मेहंदी हाथों पर रचाने से एक वर्ष के भीतर विवाह होता है — इसी आस्था में आज सैकड़ों अविवाहित युवा मंदिर पहुँचे।

मुख्य बातें

मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर में 13 सितंबर 2026 को सिंधारा (सिंजारा) रस्म आयोजित की जा रही है।
प्रसाद के रूप में ३५०० किलो मेहंदी का वितरण ८ अलग-अलग स्थानों पर होगा।
सिंधारा रस्म शाम ६:३० बजे से शुरू होगी, पहले भगवान को नई पोशाक और मुकुट धारण कराए जाएंगे।
मान्यता है कि मेहंदी रचाने वाले अविवाहित जनों का एक वर्ष के भीतर विवाह संपन्न होता है।
14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी; गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह ११:०२ बजे से दोपहर १:३१ बजे तक।

गणेश चतुर्थी की पूर्वसंध्या पर जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में परंपरागत सिंधारा (सिंजारा) रस्म के लिए 13 सितंबर 2026 को बड़ी संख्या में अविवाहित युवा पंक्तिबद्ध होने लगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस अवसर पर भक्तों को प्रसाद के रूप में ३५०० किलो मेहंदी वितरित की जाएगी, जो विवाह की कामना रखने वालों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है।

सिंधारा रस्म की परंपरा और महत्व

सिंधारा जयपुर की सदियों पुरानी लोक परंपरा है, जिसमें परिवार में जन्म या विवाह के शुभ अवसर पर नए वस्त्र और मेहंदी अर्पित की जाती है। मंदिर में यह रस्म गणेश चतुर्थी से एक दिन पूर्व मनाई जाती है, जब भगवान गणेश को नई पोशाक और मुकुट धारण कराकर मेहंदी चढ़ाई जाती है। यह उत्सव राजस्थानी संस्कृति में सामूहिक श्रद्धा और उत्सव का प्रतीक माना जाता है।

पुजारी ने बताई पूजा विधि और मनोकामना की मान्यता

मंदिर के पुजारी अभिषेक शर्मा ने बताया, 'मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म शाम ६:३० बजे से मनाया जाएगा। आज शाम भगवान को नई पोशाक और मुकुट धारण कराया जाएगा। जिसके बाद प्रसाद रूपी मेहंदी वितरण की जाएगी। भगवान को चढ़ाए जाने के बाद मेहंदी भक्तजनों को दी जाती है।'

पुजारी अभिषेक शर्मा ने आगे बताया कि मान्यता है कि भक्त जो भी मनोकामना लेकर आते हैं, वह पूरी हो जाती है। उन्होंने कहा, 'मेहंदी का संबंध विवाह से होता है, इसलिए जो विवाह करने की सोच रहे हैं और जिनका विवाह काफी समय से नहीं हुआ है और जो विवाह योग्य हैं, अगर वे हाथों पर ये मेहंदी रचाते हैं, तो माना जाता है कि एक वर्ष के अंदर विवाह संपन्न हो जाता है।'

३५०० किलो मेहंदी, ८ स्थानों पर वितरण

मंदिर प्रशासन ने इस वर्ष ३५०० किलो मेहंदी की व्यवस्था की है। पुजारी शर्मा के अनुसार ८ अलग-अलग स्थानों पर मेहंदी वितरित की जाएगी ताकि अधिक से अधिक भक्त प्रसाद प्राप्त कर सकें। मंदिर परिसर में सुबह से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा।

गणेश चतुर्थी की तैयारी

14 सितंबर 2026 को देशभर में गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह ११:०२ बजे से दोपहर १:३१ बजे तक रहेगा। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। यह पर्व सुख, शांति, समृद्धि और जीवन के संकटों से मुक्ति के लिए भगवान गणेश की आराधना को समर्पित है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है और प्रत्येक वर्ष गणेश चतुर्थी पर यहाँ लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। इस वर्ष सिंधारा रस्म का व्यापक प्रबंध इस बात का संकेत है कि परंपरागत आस्था आज भी युवा पीढ़ी में जीवित है। आने वाले दिनों में गणेश उत्सव के दौरान जयपुर में धार्मिक गतिविधियाँ और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो क्या वे आस्था को पुष्ट करती हैं या उसे उपभोक्तावादी बना देती हैं — यह विमर्श का विषय है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंधारा रस्म क्या होती है?
सिंधारा जयपुर की पुरानी परंपरा है जिसमें जन्म या विवाह के शुभ अवसर पर नए वस्त्र और मेहंदी अर्पित की जाती है। मोती डूंगरी मंदिर में यह रस्म गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले मनाई जाती है, जब भगवान गणेश को नई पोशाक-मुकुट धारण कराने के बाद मेहंदी को प्रसाद रूप में बाँटा जाता है।
2026 में मोती डूंगरी मंदिर में सिंधारा रस्म कब और कितने बजे होगी?
13 सितंबर 2026 को शाम ६:३० बजे से सिंधारा रस्म का आयोजन होगा। इसी दिन शाम को भगवान को नई पोशाक और मुकुट धारण कराए जाएंगे, उसके बाद ८ स्थानों पर मेहंदी प्रसाद वितरण शुरू होगा।
मेहंदी प्रसाद का अविवाहित युवाओं के लिए क्या महत्व है?
मंदिर के पुजारी अभिषेक शर्मा के अनुसार, मान्यता है कि सिंधारा पर भगवान गणेश को चढ़ाई गई मेहंदी हाथों पर रचाने से अविवाहित जनों का एक वर्ष के भीतर विवाह संपन्न हो जाता है। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में विवाह-योग्य युवा मंदिर में उमड़ते हैं।
गणेश चतुर्थी 2026 कब है और गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह ११:०२ बजे से दोपहर १:३१ बजे तक रहेगा। गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है।
मोती डूंगरी मंदिर में कितनी मेहंदी वितरित की जाएगी?
मंदिर प्रशासन ने इस वर्ष ३५०० किलो मेहंदी का इंतजाम किया है, जिसे ८ अलग-अलग स्थानों पर वितरित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक भक्तों को प्रसाद मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 10 महीने पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले