जम्मू-कश्मीर: JKSPDC के रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पर चार्जशीट, जन्मतिथि में हेरफेर का आरोप

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जम्मू-कश्मीर: JKSPDC के रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पर चार्जशीट, जन्मतिथि में हेरफेर का आरोप

सारांश

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की EOW ने JKSPDC के एक रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ श्रीनगर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। आरोप है कि उसने सर्विस लाभ के लिए जन्मतिथि 1955 से बदलकर 1958 की और मूल सर्विस बुक नष्ट कर दी — FSL रिपोर्ट ने हेरफेर की पुष्टि की।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने 18 मई 2026 को श्रीनगर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
आरोपी JKSPDC के तत्कालीन इंचार्ज सुपरिटेंडेंट इंजीनियर हैं, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
आरोप है कि आरोपी ने जन्मतिथि 28 अक्टूबर 1955 से बदलकर 28 अक्टूबर 1958 दर्ज करवाई।
FSL श्रीनगर की फोरेंसिक रिपोर्ट ने सर्विस रिकॉर्ड में हेरफेर की पुष्टि की।
आरोपी पर RPC धारा 420, 467, 468, 471 और 201 के तहत मामला दर्ज है; मूल सर्विस बुक नष्ट करने पर धारा 201 लागू।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने 18 मई 2026 को श्रीनगर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (JKSPDC) के एक रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। आरोपी पर अपने आधिकारिक सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि में हेरफेर कर सरकारी सेवा लाभ अवैध रूप से हासिल करने का गंभीर आरोप है।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच का आगाज़ एक लिखित शिकायत से हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया था कि JKSPDC के तत्कालीन इंचार्ज सुपरिटेंडेंट इंजीनियर ने अपने सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि के साथ छेड़छाड़ की है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच कश्मीर — जो अब इकोनॉमिक ऑफेंस विंग कश्मीर के नाम से जानी जाती है — में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

मुख्य आरोप: जन्मतिथि में फेरबदल

जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी जन्मतिथि को 28 अक्टूबर 1955 से बदलकर 28 अक्टूबर 1958 दर्ज करवाया, ताकि सेवानिवृत्ति में देरी कर अतिरिक्त सरकारी लाभ हासिल किए जा सकें। इस हेरफेर की पुष्टि FSL (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) श्रीनगर की सत्यापन रिपोर्ट से हुई।

गौरतलब है कि आरोपी ने सबूत मिटाने के इरादे से अपनी मूल सर्विस बुक को भी नष्ट कर दिया। इसी आधार पर उस पर RPC की धारा 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के अतिरिक्त धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 467 (मूल्यवान दस्तावेज़ की जालसाजी), धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और धारा 471 (जाली दस्तावेज़ का उपयोग) भी लगाई गई हैं।

जांच का निष्कर्ष और चार्जशीट

क्राइम ब्रांच के अनुसार, मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी के विरुद्ध आरोप साबित हो गए हैं। न्यायिक निर्णय के लिए चार्जशीट चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, श्रीनगर की अदालत में विधिवत दाखिल कर दी गई है। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि आरोपी एक सरकारी निगम में वरिष्ठ पद पर था और उसने कथित तौर पर लंबे समय तक इस धोखाधड़ी को छिपाए रखा।

जनता के लिए चेतावनी और शिकायत प्रक्रिया

क्राइम ब्रांच ने इस मामले के साथ-साथ आम जनता को आगाह किया है कि वे आर्थिक जालसाज़ों से सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध आर्थिक अपराध की सूचना SSP, EOW कश्मीर, क्राइम ब्रांच जम्मू-कश्मीर को दी जा सकती है। इसके अलावा, आर्थिक धोखाधड़ी के पीड़ित अपनी शिकायतें आधिकारिक ईमेल के ज़रिए भी दर्ज करा सकते हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच विशेष और आर्थिक अपराधों की समर्पित जांच के लिए जानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तभी काम आती है जब शिकायत दर्ज हो। बिना मज़बूत आंतरिक ऑडिट के, ऐसे मामले शिकायत मिलने तक अनदेखे रह सकते हैं।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने किस मामले में चार्जशीट दाखिल की है?
क्राइम ब्रांच की EOW ने JKSPDC के एक रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के खिलाफ जालसाजी और सबूत नष्ट करने के मामले में 18 मई 2026 को श्रीनगर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। आरोपी पर अपनी जन्मतिथि में हेरफेर कर अतिरिक्त सरकारी सेवा लाभ हासिल करने का आरोप है।
आरोपी इंजीनियर ने सर्विस रिकॉर्ड में क्या बदलाव किया था?
आरोपी ने अपनी जन्मतिथि 28 अक्टूबर 1955 से बदलकर 28 अक्टूबर 1958 दर्ज करवाई, जिससे वह सेवानिवृत्ति में देरी कर अतिरिक्त लाभ उठा सके। FSL श्रीनगर की फोरेंसिक रिपोर्ट ने इस हेरफेर की पुष्टि की।
आरोपी पर कौन-कौन सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपी पर RPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेज़ की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज़ का उपयोग) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के तहत मामला दर्ज है। धारा 201 इसलिए लगाई गई क्योंकि आरोपी ने मूल सर्विस बुक नष्ट कर दी थी।
इस मामले की जांच कैसे शुरू हुई?
एक लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच कश्मीर में जांच शुरू हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि बदली है। बाद में यह मामला इकोनॉमिक ऑफेंस विंग कश्मीर को सौंपा गया।
आर्थिक धोखाधड़ी की शिकायत कहाँ दर्ज कराई जा सकती है?
आर्थिक अपराध या जालसाजी की जानकारी SSP, EOW कश्मीर, क्राइम ब्रांच जम्मू-कश्मीर को दी जा सकती है। पीड़ित अपनी शिकायतें विभाग के आधिकारिक ईमेल पर भी भेज सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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