14 अगस्त 2026
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जम्मू की उपेक्षा पर दविंदर चौधरी का सरकार पर हमला: 'कोई जम्मू को बचाना नहीं चाहता'

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जम्मू की उपेक्षा पर दविंदर चौधरी का सरकार पर हमला: 'कोई जम्मू को बचाना नहीं चाहता'

सारांश

जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दविंदर चौधरी ने सरकार पर जम्मू की व्यवस्थित उपेक्षा का आरोप लगाया है — बजट से लेकर अमरनाथ यात्रा प्रबंधन तक। उनका कहना है कि हजारों स्थानीय कारोबारियों की आजीविका दाँव पर है, और बिना ठोस नीतिगत बदलाव के जम्मू का हाशियाकरण जारी रहेगा।

मुख्य बातें

दविंदर चौधरी ने 13 अगस्त 2026 को सरकार पर जम्मू की विकास और पर्यटन में उपेक्षा का आरोप लगाया।
अमरनाथ गुफा में बर्फ का शिवलिंग महज 8-10 दिनों में पिघलने से श्रद्धालुओं की भावनाएँ और स्थानीय कारोबार प्रभावित हुए।
चौधरी ने माँग की कि प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाए ताकि यात्रा लंबी चले और कारोबारियों को अधिक लाभ मिले।
उनके अनुसार बजट और विकास परियोजनाओं में जम्मू की हिस्सेदारी बेहद कम है और पर्यटन विभाग का प्रचार-प्रसार नगण्य है।
अमरनाथ यात्रा से जम्मू के हजारों परिवारों — होटल, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट, दुकानदारी — की सालभर की आजीविका जुड़ी है।

जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दविंदर चौधरी ने 13 अगस्त 2026 को जम्मू क्षेत्र के विकास, पर्यटन और अमरनाथ यात्रा प्रबंधन को लेकर सरकार पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार का पूरा फोकस कश्मीर पर केंद्रित रहता है, जबकि जम्मू को बजट, विकास परियोजनाओं और पर्यटन प्रचार — सभी मोर्चों पर — लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

अमरनाथ यात्रा और शिवलिंग का पिघलना

चौधरी ने अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के महज 8-10 दिनों में पिघलकर समाप्त हो जाने पर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार यह मसला केवल धार्मिक भावनाओं से नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के पर्यटन और स्थानीय कारोबार से भी सीधे जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'अगर यात्रा के दौरान बाबा के दर्शन ही नहीं हो पाएंगे, तो लोगों की भावनाएं आहत होंगी।'

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को दर्शन व्यवस्था के लिए स्पष्ट नियम बनाने चाहिए और श्रद्धालुओं के लिए एक निश्चित दूरी तय की जानी चाहिए, जहाँ से वे बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।

यात्रा प्रबंधन पर सवाल

चौधरी ने स्वीकार किया कि इस साल अमरनाथ यात्रा कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रही और इसके लिए उन्होंने सरकार तथा सुरक्षाबलों का धन्यवाद किया। हालाँकि, उन्होंने यात्रा के प्रबंधन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक साथ आने से व्यवस्थाओं पर अनावश्यक दबाव बढ़ गया।

उनका तर्क है कि यदि प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाती, तो यात्रा अधिक समय तक चलती और स्थानीय कारोबारियों को भी ज्यादा लाभ मिलता। उन्होंने कहा, 'हम पूरे साल इस यात्रा का इंतजार करते हैं। इसी दौरान होने वाली कमाई से कई लोगों का कारोबार चलता है।'

स्थानीय कारोबार पर असर

अमरनाथ यात्रा से जम्मू के हजारों परिवारों की पूरे साल की आजीविका जुड़ी है। होटल, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट, दुकानदारी और अन्य छोटे-बड़े कारोबार इस यात्रा के दौरान मिलने वाले रोजगार पर निर्भर रहते हैं। चौधरी ने कहा कि इस साल अपेक्षाएँ ऊँची थीं, लेकिन प्रबंधन की कमियों के कारण स्थानीय कारोबारियों की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं।

जम्मू की उपेक्षा का आरोप

चौधरी ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद विकास और पर्यटन के मामले में जम्मू को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। उनका दावा है कि बजट और विकास परियोजनाओं में जम्मू की हिस्सेदारी बेहद कम है। उन्होंने कहा, 'सरकारों का नजरिया हमेशा यही रहा है कि कश्मीर को कैसे ज्यादा हाईलाइट किया जाए। जम्मू शहर में पर्यटन विभाग की तरफ से पर्याप्त प्रचार-प्रसार तक नहीं दिखता।'

उन्होंने माँग की कि जम्मू को विकास और पर्यटन का समान लाभ मिलना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

आगे की राह

चौधरी की माँगें जम्मू के व्यापारिक और नागरिक समुदाय की व्यापक भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। यह ऐसे समय में आई हैं जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार के कार्यकाल की समीक्षा जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू के विकास की अनदेखी दीर्घकालिक रूप से क्षेत्रीय असंतुलन को बढ़ावा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दीर्घकालिक योजना में नहीं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार से उम्मीदें थीं, लेकिन बजट आवंटन और पर्यटन नीति में जम्मू की हिस्सेदारी के ठोस आँकड़े अभी सामने नहीं आए हैं। जब तक विकास की जवाबदेही क्षेत्रवार पारदर्शी नहीं होगी, ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को और चौड़ा करते रहेंगे।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दविंदर चौधरी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दविंदर चौधरी ने आरोप लगाया है कि सरकार का पूरा ध्यान कश्मीर को उजागर करने पर रहता है, जबकि जम्मू को बजट, विकास परियोजनाओं और पर्यटन प्रचार में लगातार नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने माँग की कि जम्मू को समान विकास का अवसर मिले।
अमरनाथ शिवलिंग के पिघलने से क्या समस्या हुई?
इस साल अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग केवल 8-10 दिनों में पिघलकर समाप्त हो गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन से वंचित रह गए। चौधरी के अनुसार इससे श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हुईं और जम्मू के स्थानीय कारोबार पर भी नकारात्मक असर पड़ा।
अमरनाथ यात्रा प्रबंधन में क्या सुधार की माँग की गई है?
दविंदर चौधरी ने सुझाव दिया है कि प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाए ताकि यात्रा अधिक समय तक चले। साथ ही, श्रद्धालुओं के लिए एक निश्चित दूरी तय की जाए जहाँ से वे बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।
जम्मू के स्थानीय कारोबारियों पर क्या असर पड़ा?
अमरनाथ यात्रा से जम्मू के हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है — होटल, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट और दुकानदारी सभी इस यात्रा पर निर्भर हैं। चौधरी के अनुसार इस साल प्रबंधन की कमियों के कारण स्थानीय कारोबारियों की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं।
जम्मू और कश्मीर के बीच विकास में असमानता का मुद्दा क्या है?
दविंदर चौधरी का आरोप है कि बजट और विकास परियोजनाओं में जम्मू की हिस्सेदारी बेहद कम है और पर्यटन विभाग का जम्मू में प्रचार-प्रसार नगण्य है। उनके अनुसार सरकारें हमेशा कश्मीर को प्राथमिकता देती हैं, जबकि जम्मू को उसका उचित हक नहीं मिल रहा।
राष्ट्र प्रेस
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