जम्मू की उपेक्षा पर दविंदर चौधरी का सरकार पर हमला: 'कोई जम्मू को बचाना नहीं चाहता'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दविंदर चौधरी ने 13 अगस्त 2026 को जम्मू क्षेत्र के विकास, पर्यटन और अमरनाथ यात्रा प्रबंधन को लेकर सरकार पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार का पूरा फोकस कश्मीर पर केंद्रित रहता है, जबकि जम्मू को बजट, विकास परियोजनाओं और पर्यटन प्रचार — सभी मोर्चों पर — लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
अमरनाथ यात्रा और शिवलिंग का पिघलना
चौधरी ने अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के महज 8-10 दिनों में पिघलकर समाप्त हो जाने पर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार यह मसला केवल धार्मिक भावनाओं से नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के पर्यटन और स्थानीय कारोबार से भी सीधे जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'अगर यात्रा के दौरान बाबा के दर्शन ही नहीं हो पाएंगे, तो लोगों की भावनाएं आहत होंगी।'
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को दर्शन व्यवस्था के लिए स्पष्ट नियम बनाने चाहिए और श्रद्धालुओं के लिए एक निश्चित दूरी तय की जानी चाहिए, जहाँ से वे बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।
यात्रा प्रबंधन पर सवाल
चौधरी ने स्वीकार किया कि इस साल अमरनाथ यात्रा कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रही और इसके लिए उन्होंने सरकार तथा सुरक्षाबलों का धन्यवाद किया। हालाँकि, उन्होंने यात्रा के प्रबंधन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक साथ आने से व्यवस्थाओं पर अनावश्यक दबाव बढ़ गया।
उनका तर्क है कि यदि प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाती, तो यात्रा अधिक समय तक चलती और स्थानीय कारोबारियों को भी ज्यादा लाभ मिलता। उन्होंने कहा, 'हम पूरे साल इस यात्रा का इंतजार करते हैं। इसी दौरान होने वाली कमाई से कई लोगों का कारोबार चलता है।'
स्थानीय कारोबार पर असर
अमरनाथ यात्रा से जम्मू के हजारों परिवारों की पूरे साल की आजीविका जुड़ी है। होटल, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट, दुकानदारी और अन्य छोटे-बड़े कारोबार इस यात्रा के दौरान मिलने वाले रोजगार पर निर्भर रहते हैं। चौधरी ने कहा कि इस साल अपेक्षाएँ ऊँची थीं, लेकिन प्रबंधन की कमियों के कारण स्थानीय कारोबारियों की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं।
जम्मू की उपेक्षा का आरोप
चौधरी ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद विकास और पर्यटन के मामले में जम्मू को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। उनका दावा है कि बजट और विकास परियोजनाओं में जम्मू की हिस्सेदारी बेहद कम है। उन्होंने कहा, 'सरकारों का नजरिया हमेशा यही रहा है कि कश्मीर को कैसे ज्यादा हाईलाइट किया जाए। जम्मू शहर में पर्यटन विभाग की तरफ से पर्याप्त प्रचार-प्रसार तक नहीं दिखता।'
उन्होंने माँग की कि जम्मू को विकास और पर्यटन का समान लाभ मिलना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
आगे की राह
चौधरी की माँगें जम्मू के व्यापारिक और नागरिक समुदाय की व्यापक भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। यह ऐसे समय में आई हैं जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार के कार्यकाल की समीक्षा जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू के विकास की अनदेखी दीर्घकालिक रूप से क्षेत्रीय असंतुलन को बढ़ावा दे सकती है।