जम्मू पुलिस की साउथ जोन की ऐतिहासिक सफलता: 90 लाख की चोरी-गुमशुदा संपत्ति की बरामदगी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू पुलिस साउथ जोन ने नए साल 2026 के पहले 57 दिनों में चोरी और गुमशुदगी के मामलों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। विभिन्न ऑपरेशनों के तहत, पुलिस ने लगभग 90 लाख रुपए की चोरी गई और गुमशुदा संपत्ति बरामद की है। इस उपलब्धि के बारे में जानकारी देते हुए एसपी साउथ जम्मू ने मॉडल पुलिस स्टेशन गांधीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और बरामद सामान के मालिकों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस ने तीन महत्वपूर्ण ऑपरेशनों - रीकनेक्ट, अवतार और मेघदूत के तहत यह कार्रवाई की। सबसे बड़ी सफलता ऑपरेशन रीकनेक्ट में मिली, जिसमें ईएसयू (इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस यूनिट) की एक छोटी टीम ने 196 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी कुल कीमत लगभग 68 लाख रुपए है। इनमें से 36 मोबाइल फोन प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही उनके मालिकों को सौंप दिए गए, जबकि बाकी 160 मोबाइल कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आज ही सौंपे जा रहे हैं।
इस टीम का नेतृत्व सार्जेंट ऋषि अबरोल ने किया। टीम ने जम्मू भर में दर्ज गुमशुदगी रिपोर्टों के आधार पर इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन, टेक्निकल एनालिसिस और निरंतर ट्रैकिंग के जरिए यह सफलता हासिल की।
ऑपरेशन 'अवतार' के तहत गांधीनगर पुलिस स्टेशन ने एक महत्वपूर्ण मोटरसाइकिल चोरी के मामले को सुलझाया। सार्जेंट विनय कुमार की शिकायत पर दर्ज एफआईआर नंबर 34/2026 (सेक्शन 303(2) बीएनएस) में उनकी हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल चोरी होने की रिपोर्ट थी। इंस्पेक्टर जयपाल शर्मा, पीएसआई नदीम अकरम और एएसआई पिंटू कुमार की टीम ने सीनियर अधिकारियों की देखरेख में टेक्निकल एनालिसिस और जेएमसी स्मार्ट सिटी सर्विलांस के सीसीटीवी फुटेज की जांच की।
जांच में दो आरोपियों, मनसा चौधरी और अब्दुल रहमान, को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान 15 और चोरी के दोपहिया वाहन बरामद हुए, जिनमें मुख्य रूप से हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल के साथ एक पल्सर आरएस200 और एक स्कूटी प्लेजर शामिल हैं। इनकी कुल कीमत लगभग 12 लाख रुपए है।
ऑपरेशन 'मेघदूत' में गांधीनगर पुलिस ने एक बड़े सैलून चोरी के मामले को सुलझाया। इस केस में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया और लगभग 10 लाख रुपए कीमत के चोरी हुए सैलून सामान बरामद किए गए। पुलिस ने बताया कि ये सभी कार्रवाइयां प्रिवेंटिव पुलिसिंग, टेक्निकल सर्विलांस और स्मार्ट सिटी सीसीटीवी नेटवर्क के मजबूत इस्तेमाल से संभव हुईं।