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जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस: 22 दिनों में 1 लाख 1 हज़ार से अधिक यात्री, रेलवे का नया कीर्तिमान

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जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस: 22 दिनों में 1 लाख 1 हज़ार से अधिक यात्री, रेलवे का नया कीर्तिमान

सारांश

22 दिन, 1 लाख से अधिक यात्री — जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ने साबित कर दिया कि कश्मीर घाटी को भरोसेमंद रेल कनेक्टिविटी की कितनी ज़रूरत थी। NH-44 की अनिश्चितताओं से परे, यह ट्रेन पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

मुख्य बातें

जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ने 2 मई से 23 मई 2025 के बीच केवल 22 दिनों में 1 लाख 1 हज़ार 50 से अधिक यात्रियों को सेवा दी।
ट्रेन को 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय रेल मंत्री ने हरी झंडी दिखाई और 2 मई से नियमित परिचालन शुरू हुआ।
यह स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर भूस्खलन और मौसम से होने वाली बाधाओं का विकल्प बनी।
जम्मू मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उदित सिंघल ने इसे उत्तरी रेलवे की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
ट्रेन से स्थानीय सेब उद्योग और हस्तशिल्प कारोबार को देश के बड़े बाज़ारों तक सीधी पहुँच मिल रही है।

जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ने अपनी पहली वाणिज्यिक यात्रा के महज 22 दिनों के भीतर 1 लाख 1 हज़ार 50 से अधिक यात्रियों को सेवा देकर भारतीय रेलवे के इतिहास में एक उल्लेखनीय मील का पत्थर स्थापित किया है। 2 मई 2025 को नियमित परिचालन शुरू करने के बाद से 23 मई 2025 तक यह स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन कश्मीर घाटी की नई जीवनरेखा बनकर उभरी है।

कैसे हुई शुरुआत

इस ट्रेन को 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय रेल मंत्री ने हरी झंडी दिखाई थी, जिसके बाद 2 मई से इसका नियमित परिचालन आरंभ हुआ। यह ट्रेन उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का हिस्सा है, जो दशकों की मेहनत और हिमालयी इंजीनियरिंग चुनौतियों के बाद साकार हुई है। महज तीन सप्ताह में एक लाख से अधिक यात्रियों का आँकड़ा पार करना इस मार्ग पर दमदार माँग का स्पष्ट संकेत है।

यात्रियों के लिए क्या बदला

इससे पहले जम्मू से श्रीनगर की यात्रा पूरी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर निर्भर थी, जहाँ भूस्खलन, बर्फबारी और खराब मौसम के कारण यात्रा अक्सर घंटों या दिनों के लिए बाधित हो जाती थी। वंदे भारत एक्सप्रेस ने इस अनिश्चितता को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। ट्रेन की समय-पाबंदी, वातानुकूलित कोच, स्वचालित दरवाज़े और उन्नत सुरक्षा प्रणाली की यात्रियों ने व्यापक सराहना की है।

रेलवे अधिकारी का बयान

इस उपलब्धि पर जम्मू मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उदित सिंघल ने कहा, '2 मई से 23 मई तक के 22 दिनों में एक लाख एक हज़ार पचास से ज़्यादा यात्रियों को सफर कराना उत्तरी रेलवे के लिए गर्व का विषय है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को विश्व स्तरीय रेल सुविधा देने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।' उन्होंने यह भी बताया कि यात्रियों की प्रतिक्रियाएँ अत्यंत सकारात्मक रही हैं और रेलवे स्वच्छता, सुरक्षा तथा समय-पालन पर विशेष ध्यान दे रहा है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

सिंघल के अनुसार, इस ट्रेन ने कश्मीर घाटी को शेष भारत से बारहमासी रेल कनेक्टिविटी प्रदान की है। इससे न केवल पर्यटन को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि स्थानीय सेब उद्योग और हस्तशिल्प कारोबार को भी देश के बड़े बाज़ारों तक सुगम पहुँच मिल रही है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के प्रयास तेज़ हो रहे हैं।

आगे की राह

वंदे भारत एक्सप्रेस की इस प्रारंभिक सफलता से उम्मीद जगी है कि भविष्य में इस क्षेत्र में और अधिक रेल सेवाएँ शुरू की जाएँगी। गौरतलब है कि USBRL परियोजना का विस्तार कार्य अभी भी जारी है और पूर्ण रूप से चालू होने पर यह नेटवर्क जम्मू-कश्मीर के दूरदराज़ इलाकों को भी मुख्यधारा की रेल प्रणाली से जोड़ेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक रेल परिवहन की यह सफलता देश के अन्य दुर्गम क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल यात्रा सुविधा तक सीमित रहेगी। सेब और हस्तशिल्प उद्योग के लिए बाज़ार पहुँच का दावा उत्साहजनक है, लेकिन इसके सत्यापन योग्य आर्थिक आँकड़े अभी सामने आने बाकी हैं। USBRL परियोजना की पूर्ण क्षमता तभी मापी जा सकेगी जब पूरा नेटवर्क चालू हो और माल ढुलाई सेवाएँ भी इसमें जुड़ें।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस कब से चल रही है?
यह ट्रेन 30 अप्रैल 2025 को हरी झंडी मिलने के बाद 2 मई 2025 से नियमित वाणिज्यिक परिचालन में आई। 23 मई 2025 तक यह 22 दिनों में 1 लाख 1 हज़ार 50 से अधिक यात्रियों को सेवा दे चुकी थी।
वंदे भारत एक्सप्रेस से पहले जम्मू से श्रीनगर कैसे जाते थे?
पहले यात्री पूरी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर निर्भर थे, जहाँ भूस्खलन और खराब मौसम के कारण यात्रा अक्सर बाधित हो जाती थी। वंदे भारत एक्सप्रेस ने इस मार्ग पर एक विश्वसनीय और मौसम-प्रतिरोधी विकल्प उपलब्ध कराया है।
इस ट्रेन से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा है?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन से स्थानीय सेब उद्योग और हस्तशिल्प कारोबार को देश के बड़े बाज़ारों तक सुगम पहुँच मिल रही है। इसके साथ ही पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है, जो घाटी की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है।
1 लाख यात्रियों का यह आँकड़ा किसने दिया?
जम्मू मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उदित सिंघल ने यह जानकारी दी। उन्होंने इसे उत्तरी रेलवे के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों को विश्व स्तरीय रेल सुविधा देने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
क्या भविष्य में इस रूट पर और ट्रेनें आएँगी?
वंदे भारत एक्सप्रेस की प्रारंभिक सफलता से संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में और रेल सेवाएँ शुरू की जा सकती हैं। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का विस्तार कार्य अभी जारी है, जिसके पूरा होने पर नेटवर्क और व्यापक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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