जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस: 10 दिनों में 44,727 यात्री, रविवार को 98% ऑक्यूपेंसी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ने अपने नियमित संचालन के पहले 10 दिनों (2 मई से 11 मई 2026) में 44,727 यात्रियों को सफर कराया है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस रूट पर यात्रा की माँग इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कि रविवार को ट्रेनों की औसत ऑक्यूपेंसी 98 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। मंत्रालय ने इस ट्रेन सेवा को जम्मू-कश्मीर की नई लाइफलाइन करार दिया है।
सेवा की शुरुआत और पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को ऐतिहासिक 272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) का उद्घाटन किया था। इसके बाद 30 अप्रैल 2026 को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 20 कोच वाली जम्मू तवी-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। यह सेवा उस ऐतिहासिक रेल परियोजना की परिणति है जिसे पूरा होने में दशकों लगे और जो कश्मीर घाटी को पहली बार देश के बाकी हिस्से से रेल नेटवर्क से जोड़ती है।
यात्री संख्या के आँकड़े
रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, पहले सप्ताह में ही 28,762 यात्रियों ने इस रूट पर सफर किया। 3 मई को 4,977 यात्रियों ने यात्रा की, जबकि 10 मई को यह संख्या बढ़कर 5,657 हो गई — यानी महज़ एक सप्ताह में प्रतिदिन यात्री संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पहले 8 कोच वाली ट्रेनें पूरी तरह भर जाती थीं और अब 20 कोच होने के बावजूद सीटें तेज़ी से भर रही हैं।
ट्रेन सेवाओं का विवरण
इस रूट पर ट्रेन संख्या 26401 और 26402 जम्मू तवी और श्रीनगर के बीच सप्ताह में छह दिन चलती हैं, जबकि ट्रेन संख्या 26403 और 26404 बुधवार को छोड़कर बाकी सभी दिनों में सेवा देती हैं। इस प्रकार अधिकांश दिनों में यात्रियों को चार ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध रहती हैं। जम्मू तवी से श्रीनगर तक का सफर 5 घंटे से भी कम समय में पूरा होता है।
किफायती किराया और विशेष तकनीकी क्षमता
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, यह ट्रेन इस रूट पर सबसे किफायती यात्रा विकल्प है — चेयर कार टिकट में भोजन भी शामिल है और कीमत हवाई यात्रा या टैक्सी के मुकाबले काफी कम है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे संचालन लागत से भी कम किराए पर यह सेवा उपलब्ध करा रहा है। ट्रेन को खासतौर पर माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे बर्फबारी और भूस्खलन के दौरान भी यात्रा बाधित नहीं होगी।
पर्यटन और आर्थिक प्रभाव
यह ट्रेन सेवा श्रद्धालुओं, छात्रों, व्यापारियों, सरकारी कर्मचारियों और पर्यटकों — सभी के लिए निर्बाध यात्रा का माध्यम बन रही है। पर्यटक अब चिनाब और अंजी जैसे विश्वस्तरीय रेलवे पुलों का नज़ारा लेते हुए कश्मीर पहुँच रहे हैं। रेलवे के अनुसार, गर्मियों के मौसम में डल झील, पहलगाम और गुलमर्ग जाने वाले पर्यटकों की संख्या और तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। हाईवे बंद होने की स्थिति में भी यह ट्रेन सेवा यात्रियों के लिए भरोसेमंद विकल्प बनी हुई है, जो इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी में गुणात्मक बदलाव का प्रतीक है।