10 अक्टूबर 2026
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जामनगर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: 8 साल की बच्ची की हत्या में दोषी नितिन माणेक को फांसी की सजा

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जामनगर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: 8 साल की बच्ची की हत्या में दोषी नितिन माणेक को फांसी की सजा

सारांश

जामनगर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 8 साल की बच्ची की क्रूर हत्या के दोषी नितिन माणेक को फांसी की सजा सुनाई। 35 दिन में चार्जशीट, 23 गवाह और 95 साक्ष्य — इस मामले को न्यायालय ने 'दुर्लभतम' करार देते हुए अपराध की जघन्यता पर कड़ा रुख अपनाया।

मुख्य बातें

जामनगर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को नितिन माणेक को 8 साल की बच्ची की हत्या में मौत की सजा सुनाई।
पीड़िता के साथ माचिस की तीलियों से जलाने और लोहे के मूसल से बार-बार हमले सहित दीर्घकालिक क्रूर शोषण किया गया था।
पुलिस ने घटना के 35 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की; ट्रायल में 23 गवाह और 95 दस्तावेज़ी साक्ष्य पेश किए गए।
न्यायालय ने मामले को 'दुर्लभतम मामलों में से एक' करार दिया; पॉक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद और ₹50,000 जुर्माना भी लगाया गया।
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने पुलिस और न्यायपालिका को बधाई दी; सरकार ने बाल अपराधों पर जीरो-टॉलरेंस नीति दोहराई।

गुजरात के जामनगर जिले की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को नितिन माणेक को 8 साल की एक बच्ची की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई। न्यायालय ने इस मामले को साक्ष्यों और अपराध की अत्यंत जघन्य प्रकृति को देखते हुए 'दुर्लभतम मामलों में से एक' करार दिया। पीड़िता के साथ लंबे समय तक क्रूर शारीरिक शोषण किया गया था, जिसमें माचिस की तीलियों से जलाना और लोहे के मूसल से बार-बार हमला करना शामिल था।

मुख्य घटनाक्रम

यह घटना 2025 में जामनगर जिले के सिक्का क्षेत्र में घटित हुई। प्रारंभ में अपराध का पता नहीं चल सका, जिसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू की और नितिन माणेक — जो सिक्का का ही निवासी है — की पहचान आरोपी के रूप में की गई। जाँच में वैज्ञानिक, तकनीकी और दस्तावेज़ी साक्ष्य एकत्र किए गए तथा घटना के मात्र 35 दिनों के भीतर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई।

न्यायालय में अभियोजन

ट्रायल के दौरान सरकारी वकील ने 23 गवाहों से पूछताछ की और पॉक्सो कोर्ट के समक्ष लगभग 95 दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत किए। साक्ष्यों और अपराध की परिस्थितियों पर विचार करने के पश्चात न्यायालय ने हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, माणेक को पॉक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा और ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पुलिस टीम और न्यायपालिका को बधाई दी। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध अपराधों के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई है। गौरतलब है कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और समयबद्ध चार्जशीट को इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया को गति देने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

आम जनता पर असर

यह फैसला उन माता-पिता और बाल-अधिकार संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है जो देश में बच्चों के विरुद्ध यौन और शारीरिक अपराधों के प्रति कड़े न्यायिक हस्तक्षेप की माँग करते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पॉक्सो मामलों में त्वरित सुनवाई और कठोर दंड की माँग राष्ट्रीय विमर्श में बनी हुई है।

क्या होगा आगे

मौत की सजा पर अमल से पहले मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में होना अनिवार्य है, जहाँ निचली अदालत की सजा की पुष्टि की जाएगी। क़ानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की समीक्षा प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह प्रणालीगत बदलाव का संकेत है। देश में पॉक्सो मामलों के निपटारे की औसत अवधि वर्षों में मापी जाती है; जामनगर मॉडल एक मानक बन सकता है — लेकिन केवल तब, जब इसे संसाधन और राजनीतिक इच्छाशक्ति की निरंतर पीठ मिले, न कि महज़ सरकारी प्रशंसा।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामनगर पॉक्सो कोर्ट ने किसे और किस मामले में फांसी की सजा सुनाई?
जामनगर जिले के सिक्का निवासी नितिन माणेक को 8 साल की एक बच्ची की हत्या और दीर्घकालिक क्रूर शोषण के मामले में 9 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने इसे 'दुर्लभतम मामलों में से एक' माना।
इस मामले में 'दुर्लभतम' का आधार क्या था?
पीड़िता के साथ माचिस की तीलियों से जलाने और लोहे के मूसल से बार-बार हमले जैसी क्रूरता को देखते हुए कोर्ट ने इसे 'दुर्लभतम मामलों में से एक' करार दिया। साक्ष्यों और अपराध की परिस्थितियों के समग्र मूल्यांकन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया।
नितिन माणेक को मौत की सजा के अलावा और क्या दंड मिला?
माणेक को पॉक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा और ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया गया। मौत की सजा और उम्रकैद दोनों एक साथ सुनाई गई हैं।
पुलिस ने इस मामले में कितनी तेज़ी से जाँच पूरी की?
पुलिस ने वैज्ञानिक, तकनीकी और दस्तावेज़ी साक्ष्य एकत्र करते हुए घटना के मात्र 35 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल के दौरान 23 गवाहों से पूछताछ की गई और 95 दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
क्या यह फांसी की सजा तुरंत लागू होगी?
नहीं। मौत की सजा पर अमल से पहले मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय और क्षमादान की प्रक्रिया भी लागू हो सकती है, जिसमें समय लग सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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