नरसिंहपुर में 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या: कांग्रेस ने मांगा फास्ट-ट्रैक ट्रायल, पुलिस ने दिलाया कड़ी सजा का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में 8 साल की एक बच्ची के कथित अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। 7 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने गिरफ्तार आरोपी के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और सबसे कड़ी सजा की माँग की। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, पीड़ित बच्ची बुधवार को स्कूल से वापस नहीं लौटी, जिसके बाद उसे खोजने के लिए कई टीमें गठित की गईं। जाँच में सामने आया कि उसे आखिरी बार उसके पड़ोसी अन्नू यादव के साथ देखा गया था। आरोप है कि आरोपी लंच ब्रेक के दौरान स्कूल पहुँचा और बच्ची से कहा कि उसके पिता ने उसे घर ले जाने के लिए भेजा है।
पुलिस के बयान के अनुसार, आरोपी बच्ची को पास के जंगल में ले गया, जहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया गया और गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने जब आरोपी का पता लगाया तो वह मोटरसाइकिल से फरार होने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गाड़ी के सड़क से फिसलने के बाद उसे पकड़ लिया गया।
पुलिस की प्रतिक्रिया
नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने कहा कि जाँच तेज़ गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'हमारी जाँच टीम और सरकारी वकील गिरफ्तार व्यक्ति के लिए सबसे कड़ी सजा दिलाने की दिशा में काम करेंगे। हम मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराएँगे।' पुलिस ने बताया कि आरोपी ने शुरुआत में अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
कांग्रेस की माँग और राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस घटना को 'बेहद दुखद और झकझोर देने वाली' बताया। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए न्याय, आर्थिक सहायता और हर संभव सहयोग की माँग की। सिंघार ने कहा, 'खोखले भाषणों और दावों से बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए मज़बूत कानून-व्यवस्था, त्वरित न्याय और जवाबदेह सरकार की ज़रूरत है।'
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामले विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रदेश में बाल यौन अपराध के मामलों में त्वरित न्याय की व्यवस्था अभी भी अपर्याप्त है।
आम जनता पर असर
इस घटना ने नरसिंहपुर और आसपास के क्षेत्रों में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता है। गौरतलब है कि पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य एक वर्ष के भीतर निर्णय सुनिश्चित करना है।
क्या होगा आगे
पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा के अनुसार, मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभियोजन पक्ष अधिकतम सजा — जो इस प्रकार के मामलों में मृत्युदंड तक हो सकती है — की माँग करेगा। पीड़ित परिवार को राज्य सरकार की ओर से सहायता दिए जाने की भी उम्मीद जताई जा रही है।